उम्र की सांध्य वेला में लोगों का स्वभाव तो बदलता ही है, विचार भी बदल जाते हैं। बूढ़े भी बच्चों की तरह हरकतें करने लगते हैं। शायद इसीलिए बच्चे और बूढ़ों का स्वभाव एक जैसा माना जाता है। कई बार तो बूढ़े ऐसी बातें कह जाते हैं, जिससे वे पहले बचते रहने की कोशिश करते रहे हैं। उम्र के साथ आदमी का अंदाज बदल जाना स्वाभाविक स्थिति है। बिहार के सीएम नीतीश कुमार के साथ भी ऐसा ही हो रहा है। पिछले हफ्ते भर से नीतीश कुमार कुछ इसी तरह की हरकतें कर रहे हैं। उनके बदले अंदाज को देख कर कुछ लोगों को आश्चर्य होता है तो कई अपनी हंसी नहीं रोक पाते। गुरुवार को भी नीतीश ने कुछ ऐसा किया कि लोग हंसते रह गए।
जब नीतीश ने मंत्री की गर्दन पकड़ी
नीतीश कुमार ने दो दिन पहले मंत्री और जेडीयू नेता अशोक चौधरी की गर्दन पकड़ कर एक पत्रकार के सिर से उनका सिर लड़ाने की कोशिश की। उसे देख लोग भौचक रह गए थे। यह वाकया तब हुआ, जब एक तिलक धारी पत्रकार ने नीतीश से कुछ पूछा। जवाब देने के बजाय नीतीश कुमार ने पहले दायें-बायें देखा और पीछे खड़े अशोक चौधरी की गर्दन में हाथ डाल उन्हें धकियाते हुए सामने ले आए। फिर उन्होंने पत्रकार के ललाट से चौधरी के ललाट को टकरा दिया। पहले किसी को यह बात समझ में नहीं आई कि हुआ क्या है। बाद में चौधरी शायद उनकी मंशा भांप गए और खुद उस पत्रकार के ललाट से अपना ललाट रगड़ने लगे। यह देख सब लोग हंस पड़े। बाद में लोगों को यह बात समझ में आई कि नीतीश कुमार ने ऐसा क्यों किया। दरअसल पत्रकार ने तिलक लगा रखा था। अशोक चौधरी भी तिलक लगा कर ही रोज घर से निकलते हैं। दोनों तिलक धारियों को सटा कर उन्होंने तिलक का जवाब तिलक से देने की कोशिश की थी।
अशोक चौधरी से हम बहुत प्यार करते हैं-नीतीश
गुरुवार को भी अशोक चौधरी नीतीश के निशाने पर रहे। इस बार नीतीश की नई अदा का अवसर पत्रकारों ने ही दिया। पत्रकारों का मूल सवाल था कि क्या नीतीश तिलक लगाने वालों से नफरत करते हैं ? उन्होंने दो तिलक धारियों का सिर उस दिन क्यों टकरा दिया था ? इस पर नीतीश कोई जवाब देते, इसके पहले ही वे अशोक चौधरी के गले से लिपट गए। उन्होंने कहा- नहीं भाई, मैं किसी धर्म से नफरत नहीं करता। मैं तो सभी धर्मों का आदर करता हूं। दरअसल मैं अशोक चौधरी से बहुत प्यार करता हूं। इस दौरान वे चौधरी के कंधे पर अपना सिर रखकर उनसे लिपटे रहे। उन्होंने कहा कि जब भी हम अशोक चौधरी को टीका लगाए देखते हैं तो हमें बेहद खुशी होती है।
नेताओं के बोल-व्यवहार को बदलते देखा है- जानकार
उम्र की सांध्य वेला में कई नेताओं के विचार या स्वभाव को बदलते देखा है। वे इसके कई उदाहरण गिनाते हैं। वे बताते हैं कि बोफोर्स तोप दलाली का मामला वीपी सिंह ने उजागर किया था, लेकिन उम्र के आखिरी पड़ाव पर पहुंचते ही सन् 2004 में उनका सुर बदल गया। उन्होंने कहा कि ‘ऐसा आरोप मैंने कभी नहीं लगाया कि राजीव गांधी ने बोफोर्स सौदे में दलाली ली।’ इस प्रसंग को सुरेंद्र किशोर विस्तार देते हुए बताते हैं कि 4 नवंबर, 1988 को वीपी सिंह पटना में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। संवाददाता के रूप में मैं वहां मौजूद था। उन्होंने स्विस बैंक का एक खाता नंबर बताया। कहा कि उसी खाते में बोफोर्स दलाली का पैसा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह खाता लोटस नाम से है। लोटस और राजीव का एक ही मतलब है।







