केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 16 सितंबर को झंझारपुर के ललित कर्पूरी स्टेडियम में एक रैली को संबोधित करेंगे। रैली से पहले वे अररिया में आईटीबीपी (इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस) के एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद अमित शाह की एक साल में यह छठवां दौरा है।
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा 24 जून को झंझारपुर में रैली करने वाले थे, लेकिन उनका कार्यक्रम रद्द हो गया था। अब झंझारपुर की रैली को खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संबोधित करेंगे।
अमित शाह के कार्यक्रम को बीजेपी के नेता लोकसभा प्रवास कार्यक्रम के तहत एक रूटीन रैली बता रहे हैं, लेकिन पॉलिटिकल एक्सपर्ट की माने तो झंझारपुर सीट रणनीतिक दृष्टिकोण से काफी अहम है।
गृहमंत्री की इस रैली से पार्टी मिथिलाांचल की 5 लोकसभा सीटें झंझारपुर, मधुबनी, दरभंगा, सुपौल और मधेपुरा को साधेगी। इसके साथ ही इसका असर यहां के 30 विधानसभा सीटों पर भी पड़ेगा।
सबसे पहले समझिए अमित शाह ने मिथिलांचल में रैली के लिए झंझारपुर को ही क्यों चुना
बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष संतोष पाठक कहते हैं कि पार्टी की तरफ से देशभर में 10 सीटों को चुना गया है, जहां पार्टी अपना उम्मीदवार नहीं उतारती थी।
2024 में पार्टी वहां अपना उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है। इनमें एक सीट झंझारपुर भी है। केंद्रीय गृहमंत्री अपने झंझारपुर रैली से लोकसभा की 5 सीटें और विधानसभा की 30 सीटों को साधेंगे।
पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में जब नीतीश कुमार बीजेपी के साथ थे, तब एनडीए ने यहां से विपक्ष का सफाया कर दिया था। 2019 के लोकसभा चुनाव में सभी 5 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
2020 के विधानसभा चुनाव में भी यहां की 30 विधानसभा सीटों में से 25 पर एनडीए के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। इनमें 11 सीटों पर बीजेपी और 14 सीटों पर जेडीयू को जीत मिली थी।
नीतीश के अलग होते ही बदला समीकरण, बीजेपी उसे दुरुस्त करने में जुटी है
नीतीश कुमार जब बीजेपी के साथ थे तो मिथिलांचल के इलाकों में एनडीए का एकछत्र राज था, लेकिन नीतीश के अलग होने के बाद यहां का पूरा समीकरण बिगड़ गया।
यहां बीजेपी अब पूरी तरह कमजोर पड़ती नजर आ रही है। विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. यहां भारी पड़ता दिखाई दे रहा है।
अगर आंकड़ों की बात करें तो फिलहाल लोकसभा की 5 सीटों में 3 पर जेडीयू का कब्जा है। वहीं, विधानसभा की 30 सीटों में 19 महागठबंधन के पास है। इनमें 14 जेडीयू के पास और 5 आरजेडी के पास है। अब बीजेपी यहां ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने की कोशिश में जुटी गई है।
अब 2 पॉइंट में समझिए बार-बार बिहार क्यों आ रहे हैं अमित शाह
1. बिहार में बीजेपी के नेताओं का कद बढ़ा, लेकिन संगठन पिछड़ता गया
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी कहते हैं अमित शाह और नरेंद्र मोदी की जोड़ी को एक बार बिहार की जनता नकार चुकी है। 2015 के विधानसभा चुनाव में उन्हें यहां करारी शिकस्त मिली थी। अब वे इस गलती को दोहराना नहीं चाहते हैं। वे इसे चुनौती के रूप में स्वीकार कर रहे हैं।
बिहार में बीजेपी अपने बूते सरकार बनाना चाहती है। इसके लिए अमित शाह खुद पार्टी की हर कमियों को दूर कर रहे हैं। उनके पास फीडबैक है कि बीजेपी के पास बड़े-बड़े नेता हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर पार्टी फिलहाल उतनी मजबूत नहीं है, जितनी होनी चाहिए।
बूथ लेवल पर जितना काम होना चाहिए उतना नहीं हुआ है। वे अपनी मॉनिटरिंग में पार्टी के कील-कांटे को दुरुस्त करने में जुटे हैं।
2. यूपी की तरह बिहार में सभी जातियों को जगह देने की कोशिश
पॉलिटिकल एक्सपर्ट कहते हैं कि यूपी की तरह बिहार में भी बीजेपी का एक मजबूत सांगठनिक ढांचा तैयार करना चाह रही है। यूपी में पार्टी ने छोटी-छोटी जातियों को एकजुट कर एक मजबूत संगठन तैयार किया है। उनका ये प्रयोग वहां अपराजेय रहा।
यही कारण है कि वे अब यूपी मॉडल बिहार में भी लागू करना चाहते हैं। बीजेपी की नई प्रदेश कमेटी में भी यह प्रयोग स्पष्ट तौर पर दिख रहा है। मुख्य कमेटी के अलावा प्रदेश के विभिन्न मोर्चा में भी इसे लागू किया गया है।
लोकसभा प्रवास के दौरान अमित शाह केवल रैली नहीं करते हैं, बल्कि वे जिला स्तर और इसके नीचे के स्तर के कार्यकर्ताओं से मुलाकात भी करते हैं।
झंझारपुर में बस एक बार जीती है भाजपा, इस बार नीतीश मिश्रा हो सकते हैं उम्मीदवार
झंझारपुर लोकसभा सीट से बीजेपी बस एक बार चुनाव जीती है। 2014 में बीजेपी के वीरेंद्र कुमार चौधरी यहां से जीतने में कामयाब हुए थे। हालांकि, एनडीए गठबंधन में ये सीट हमेशा से जेडीयू के हिस्से रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू के रामप्रीत मंडल 2 लाख 23 हजार वोट से जीतने में कामयाब हुए थे।
इस बार बीजेपी झंझारपुर विधानसभा क्षेत्र से 4 बार के विधायक और राज्य के पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र के बेटे नीतीश मिश्र को झंझारपुर लोकसभा से अपना उम्मीदवार बना सकती है। हालांकि पार्टी के कोई नेता फिलहाल इस पर औपचारिक रूप से कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
बीजेपी का दावा रैली में डेढ़ लाख से ज्यादा की भीड़ जुटेगी
बीजेपी उपाध्यक्ष संतोष पाठक ने बताया कि देशभर में बीजेपी ने उन 160 लोकसभा क्षेत्रों को चिन्हित किया है, जहां से पार्टी ने अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया है। इस बार पार्टी इन कमजोर सीटों पर मजबूती से लड़ना चाहती है।
इसमें बिहार की 10 सीटों को चिन्हित किया गया है। झंझारपुर से मिथिला को साधने की कोशिश की जा रही है। संतोष पाठक ने बताया कि रैली में लगभग 1.5 लाख लोगों के आने की संभावना है।
राजद ने कहा- अमित शाह बिहार में नफरत फैलाना चाह रहे हैं
आरजेडी के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि I.N.D.I.A. के गठन के बाद भारतीय जनता पार्टी बौखलाहट में है। बिहार से भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के बाद अमित शाह लगातार बिहार का दौरा कर रहे हैं।
बिहार में वे कार्यकर्ताओं को बूस्ट अप करने आते हैं, लेकिन उनकी रैली के बाद कार्यकर्ता हताश हो जाते हैं। ये समाज में नफरत फैलाना चाहते हैं।
एजाज अहमद ने कहा कि मिथिलांचल के लोग एम्स खोज रहे हैं। भाजपा जिस तरह मिथ्या प्रचार कर लोगों को ठगने रही है। इससे जनता सूद समेत बदला लेगी।
गृह मंत्री इस बार झूठ बोले तो जेडीयू पर्दाफाश करेगी- हिम राज राम
अमित शाह के बिहार दौरे पर जेडीयू के प्रदेश प्रवक्ता हिम राज राम ने कहा कि वे बार-बार बिहार आ रहे हैं। जब भी आते हैं झूठा वादा और झूठी रिपोर्ट पेश करते हैं।
चुनाव में वादा करते हैं और चुनाव बाद जुमला घोषित कर देते हैं। इस बार भी दो-चार झूठ बोलकर जाएंगे। अब देश की जनता जान चुकी है कि बीजेपी के पास झूठ के अलावा कुछ नहीं रह गया है। इस बार झूठ बोलेंगे तो उसका पर्दाफाश किया जाएगा।
सत्ता परिवर्तन के बाद बिहार में अमित शाह की रैलियों के मायने समझिए ..
ललन सिंह के गढ़ से शाह ने सीएम को ललकारा था
अमित शाह 29 जून को जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के संसदीय क्षेत्र मुंगेर के लखीसराय पहुंचे थे। यहां वे बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर जमकर बरसे थे। अपने 27 मिनट के भाषण में 8 बार नीतीश कुमार का नाम लिया था।
नीतीश पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा था नीतीश कुमार बस सीएम बने रहना चाहते हैं, उन्हें पीएम नहीं बनना है। वो बस मूर्ख बना रहे हैं। भ्रष्टाचारियों के साथ बैठे हैं।
नवादा से दंगा पर महागठबंधन सरकार को घेरा
2 अप्रैल 2023 को अमित शाह बिहार के नवादा पहुंचे थे। सम्राट अशोक की जयंती पर उनका सासाराम में भी कार्यक्रम होना था, लेकिन दंगे के कारण उनका कार्यक्रम रद्द करना पड़ा था।
इसके बहाने उन्होंने राज्य की महागठबंधन सरकार पर जमकर निशाना साधा। साथ ही उन्होंने कुशवाहा समाज को भी गोलबंद करने की कोशिश की।
सहजानंद जयंती में भूमिहारों को दिया संदेश
25 फरवरी 2023 को भी अमित शाह बिहार आए थे। पहले उन्होंने वाल्मीकिनगर में जनसभा की थी। यहां से उन्होंने पूर्वी और पश्चिमी चंपारण लोकसभा को साधा। इसके बाद पटना में सहजानंद सरस्वती की जयंती सह किसान समागम में भाग लेकर भूमिहारों को संदेश दिया।
जेपी के गांव से लालू और नीतीश पर बोला हमला
11 अक्टूबर 2022 को अमित शाह लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा पर स्थित सिताब दियारा गांव पहुंचे थे। यहां उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के मिशन बिहार को धार दी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पर जमकर निशाना साधा था।







