लोकसभा चुनाव को लेकर दिल्ली कांग्रेस की एक बैठक पार्टी हाईकमान ने बुलाई थी। इस मीटिंग में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के साथ-साथ दिल्ली के पार्टी इंचार्ज दीपक बाबरिया, दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष अनिल चौधरी, अजय माकन, संदीप दीक्षित, हारून यूसुफ, किरन वालिया, अरविंदर सिंह लवली जैसे कई बड़े नेता मौजूद थे। जैसे ही ये मीटिंग खत्म हुई, दिल्ली कांग्रेस की प्रवक्ता अलका लाम्बा ने साफ-साफ कह दिया कि दिल्ली में कांग्रेस सभी सातों लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। इसके बाद दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष अनिल चौधरी ने अरविंद केजरीवाल पर सीधा अटैक किया। अनिल चौधरी ने कहा उनकी पार्टी भ्रष्टाचार और शराब नीति के साथ-साथ बाढ़ से हुई तबाही को लेकर अरविंद केजरीवाल को छोडे़गी नहीं।
दिल्ली के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि ये दोनों ही कांग्रेस के छोटे नेता हैं। उनकी बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कौन कितनी सीटों पर लड़ेगा, ये I.N.D.I.A. अलायंस की मीटिंग के बाद तय होगा। आम आदमी पार्टी के नेता सोमनाथ भारती ने कहा कि अभी तक ये साफ नहीं है कि ये स्टैंड कांग्रेस का है या फिर दिल्ली कांग्रेस का, लेकिन दिल्ली कांग्रेस के नेताओं को ये बात समझनी चाहिए कि अगर मोदी को हटाना है तो फिर ऐसी तुच्छ राजनीति बीच में नहीं आनी चाहिए। पार्टी की प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि अगर जो बात अल्का लाम्बा ने कही है, वह कांग्रेस पार्टी का स्टैंड है, तो फिर I.N.D.I.A. अलायंस की मीटिंग में जाने का कोई मतलब नहीं बनता। आम आदमी पार्टी का जब कांग्रेस को कड़ा संदेश गया तो पार्टी की लीडरशिप ने एक बार फिर दिल्ली कांग्रेस के नेताओं को बुलाया। कांग्रेस पार्टी के दिल्ली के इंचार्ज दीपक बाबरिया ने साफ-साफ कहा कि अगर किसी ने जल्दबाजी में कुछ कह दिया, तो वो कांग्रेस का ऑफिशियल स्टैंड नहीं है। बात सिर्फ इतनी है कि दिल्ली को लेकर कांग्रेस में कन्फ्यूजन है। कांग्रेस के स्थानीय नेता दिल्ली की सातों सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते है। कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व आम आदमी पार्टी को विपक्षी दलों के अलायंस में बनाए रखना चाहती है। इसीलिए ये विरोधाभास दिखाई दे रहा है। आम आदमी पार्टी को लगता है कि कांग्रेस के नेता जानबूझकर अपने नेताओं से इस तरह के बयान दिलवाते हैं, ताकि केजरीवाल की पार्टी पर प्रेशर बनाया जा सके लेकिन इस खेल में आम आदमी पार्टी भी माहिर है। उन्होंने काउंटर प्रेशर बना दिया। AAP ने कह दिया कि अगर यही रुख रहेगा तो फिर वो अलायंस की अगली बैठक में नहीं जाएंगे। पिछली मीटिंग के दौरान भी आम आदमी पार्टी का ऐसा ही प्रेशर काम आया था। हालांकि मुझे लगता है कि इस फैसले पर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी कि दिल्ली में तकरार की वजह से अलायंस में फूट पड़ जाएगी। जब जब सीटों के बंटवारे पर बात होगी, जहां जहां सीटों के बांटने को लेकर चर्चा होगी, इसी तरह की तकरार सामने आएगी। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की असली तकरार तो पंजाब में होगी जहां आम आदमी पार्टी की जबरदस्त जीत हुई थी। वहां 13 सीटों में से एक पर भी कांग्रेस जीतने की स्थिति में नहीं है। पंजाब में बीजेपी भी कमजोर है, इसीलिए केजरीवाल सारी 13 सीटों पर लड़ने का दावा कर सकते हैं।







