दिक़्कत सिर्फ़ आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच नहीं है। कांग्रेस को डर है कि महाराष्ट्र में शरद पवार भी खेल कर सकते हैं, I.N.D.I.A. गठबंधन छोड़कर अलग हो सकते हैं। असल में कांग्रेस को लग रहा है कि शरद पवार जिस तरह बार-बार अपने भतीजे अजित पवार से मिल रहे हैं, उससे उन पर भरोसा करना महंगा पड़ सकता है। कांग्रेस सवाल उठा रही है कि जब अजित पवार, बीजेपी के साथ चले गए हैं तो फिर शरद पवार उनसे क्यों मिल रहे हैं। दोनों की पिछली मुलाक़ात, शनिवार को पुणे में, एक बिज़नेसमैन के घर पर हुई थी। इसके बाद, कांग्रेस के सब्र का बांध टूट गया। कांग्रेस के नेता शरद पवार के इरादों पर सवाल उठाने लगे। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने कहा कि शरद पवार अपना स्टैंड क्लियर करें। कांग्रेस के एक और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि अजित पवार, शरद पवार के पास बीजेपी का ऑफ़र लेकर गए थे। बीजेपी, उनको केंद्र में मंत्री बनाने को तैयार है। बीजेपी, शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले को भी केंद्र में मंत्री बनाने के लिए राज़ी है। कांग्रेस की तरफ़ से बयान आया तो NCP ने जवाब देने में देर नहीं की। शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने बीजेपी से किसी तरह का ऑफ़र मिलने की बात को सिरे से ख़ारिज कर दिया। सुप्रिया सुले ने कहा कि अगर कांग्रेस के नेताओं को पता है कि शरद पवार को क्या ऑफ़र दिया गया, तो वो इसकी पूरी जानकारी जनता को दें। महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने NCP के ज़ख़्मों पर मरहम लगाने की कोशिश की। नाना पटोले ने कहा कि कांग्रेस को तो शरद पवार पर पूरा भरोसा है लेकिन, शरद पवार जिस तरह बार-बार अजित पवार से मुलाक़ात कर रहे हैं, उसको लेकर जनता में कनफ्यूज़न ज़रूर है। जब दिन भर ख़ूब बयानबाज़ी हो चुकी, कांग्रेस, शिवसेना और NCP के नेताओं ने एक दूसरे के ख़िलाफ़ भड़ास निकाल ली तो शाम को शरद पवार बोले। शरद पवार ने कहा, वो किसी भी क़ीमत पर बीजेपी के साथ नहीं जाने वाले। वो पूरे ज़ोर-शोर से 31 अगस्त को होने वाली INDIA की बैठक की तैयारी कर रहे हैं और इस बार देश को मोदी का विकल्प देंगे, मोदी को सत्ता में नहीं लौटने देंगे।
शरद पवार ने भतीजे अजित पवार से मुलाक़ात पर भी तस्वीर साफ़ की। पवार ने कहा कि वो परिवार में सबसे बड़े हैं और परिवार का कोई भी मसला होता है तो उनसे सलाह ली जाती है। अजित पवार इसीलिए उनसे पुणे में मिले थे और वो कोई ऑफ़र लेकर नहीं आए थे। एनसीपी में होने वाली इस तरह की हर गतिविधि पर कांग्रेस की नज़र है। और शरद पवार की बिडंबना देखिए। वो बार बार कह रहे हैं कि वो बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे, वो बार बार दावा कर रहे हैं कि वो मोदी को हटाने के लिए काम करेंगे, वो बार बार बता रहे हैं कि वो विरोधी दलों के अलायंस के साथ हैं लेकिन महाराष्ट्र में उनके दोनों अलायंस पार्टनर उद्धव की शिवसेना और कांग्रेस उनकी बात पर यकीन करने को तैयार नहीं है। उनका शक भी बेवजह नहीं है। भतीजे पवार की बगावत के बाद चाचा पवार उनसे पांच बार मिल चुके हैं। आखिरी मीटिंग तो सीक्रेट थी, वो लीक हो गई। इसीलिए शक होना लाजिमी है। मुझे लगता है कि शरद पवार ने फाइनल फैसला नहीं लिया है। वो हालात को तौल रहे हैं। किसमें कितना है दम, इसका अंदाजा लगा रहे हैं। शरद पवार दूर की सोचते हैं। कोई फैसला जल्दबाजी में नहीं करते। आज की तारीख में उनके दोनों हाथों में लड्डू है, इसीलिए उन्हें कोई जल्दी नहीं है।







