डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल संसद से पास हो गया है। सोमवार को लोकसभा से पास होने के बाद बुधवार को राज्यसभा में वॉइस वोट से बिल पास हो गया। राष्ट्रपति के साइन के बाद ये बिल अब कानून बन जाएगा।
यह कानून लागू होने के बाद लोगों को अपने डेटा कलेक्शन, स्टोरेज और प्रोसेसिंग के बारे में डिटेल मांगने का अधिकार मिल जाएगा। कंपनियों को यह बताना होगा कि वे कौन सा डेटा ले रही हैं और डेटा का क्या इस्तेमाल कर रही हैं।
विधेयक में इसके प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों पर न्यूनतम 50 करोड़ रुपए से लेकर अधिकतम 250 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। पुराने बिल में यह 500 करोड़ रुपए तक था।
लोगों की प्राइवेसी का बचाव करना बिल का मकसद
केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार (3 अगस्त) को इस बिल को लोकसभा में पेश किया था। राज्य सभा में बिल पास होने के बाद IT मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने कहा, ‘इस बिल का मकसद पर्सनल डिजिटल डेटा की प्रोसेसिंग को रेगुलेशन करना है, ताकि लोगों की प्राइवेसी का बचाव किया जा सके।
ये बिल प्रो प्राइवेसी और प्रो सिटीजन है। उन्होंने बताया कि बिल को बहुत ज्यादा प्रिसक्रिप्टिव नहीं बनाया गया है, ताकि वक्त के साथ इसमें बदलाव किया जा सके।’
विपक्ष ने किया विरोध, 20 हजार से ज्यादा सुझाव आए
लोकसभा में पेश होने के दौरान विपक्ष ने बिल का विरोध किया था। तब इसे वापस संसदीय समिति के पास भेजे जाने की मांग उठी थी। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने बिल लाने में जल्दबाजी की है और इससे लोगों के राइट टु प्राइवेसी के उल्लंघन का खतरा है।
बिल में टेक और सोशल मीडिया कंपनियों की काफी दिलचस्पी है, क्योंकि सजेशन पीरियड के दौरान 20 हजार से ज्यादा सुझाव आए थे। इन सुझावों के अध्ययन के बाद बिल को सरल बनाया गया और यूजर्स सिक्योरिटी को इसके केंद्र में रखा गया है।
डिजिटल पर्सनल डेटा क्या होता है?
डिजिटल पर्सनल डेटा को हम एक उदाहरण से समझते हैं। जब आप अपने मोबाइल में किसी कंपनी का ऐप इंस्टॉल करते हैं तो वह आपसे कई प्रकार की परमिशन मांगता है, जिसमें कैमरा, गैलरी, कॉन्टैक्ट, GPS जैसी अन्य चीजों का एक्सेस शामिल होता है। इसके बाद वह ऐप आपके डेटा को अपने हिसाब से एक्सेस कर सकता है।
कई बार तो ये ऐप आपके पर्सनल डेटा को अपने सर्वर पर अपलोड कर लेते हैं और उसके बाद अन्य कंपनियों को बेच भी देते हैं। अभी तक हम ऐप से यह जानकारी नहीं ले पाते हैं कि वह हमारा कौन सा डेटा ले रहे हैं और उसका क्या यूज कर रहे हैं। यह बिल इसी तरह के डेटा को प्रोटेक्ट करने के लिए लाया गया है।







