पहले जानते हैं अभी क्या हुआ है?
कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी शनिवार सुबह अचानक हरियाणा में सोनीपत जिले के बरोदा क्षेत्र में पहुंचे। यहां उन्होंने गांव मदीना के खेतों में पहुंचकर किसानों और मजदूरों से बातचीत की। फसल की जानकारी ली। उन्होंने ट्रैक्टर भी चलाया और धान की रोपाई भी की।
बरोदा से कांग्रेस विधायक इंदुराज नरवाल और गोहाना विधायक जगबीर सिंह मलिक भी उनके आने के बाद मदीना पहुंचे। राहुल तड़के दिल्ली से शिमला के लिए निकले थे। कुंडली बॉर्डर पर पहुंचने के बाद उन्होंने अचानक अपना कार्यक्रम बदला और सोनीपत का रुख कर लिया। सुबह करीब सात बजे राहुल बरोदा के गांव मदीना पहुंचे गए।
धन रोपाई की और ट्रैक्टर चलाया
रास्ते में कई जगह वह खेतों में रुके। मदीना में उन्होंने खेतों में धान रोपाई की जानकारी ली और खुद भी मजदूरों के साथ धान रोपने लगे। इस दौरान मौके पर पहुंचे ग्रामीणों से भी उन्होंने बातचीत की। उन्होंने खेत में धान की रोपाई से पहले जमीन तैयार करने को ट्रैक्टर भी चलाया।
इससे पहले कब-कब इस तरह नजर आ चुके राहुल?
दिल्ली में बंटाया मैकेनिकों का हाथ: पिछले महीने 27 जून को राहुल अचानक दिल्ली के करोल बाग मार्केट में एक बाइक बनाने वाले मैकेनिक की दुकान पर पहुंच गए थे। उन्होंने फेसबुक पर मैकेनिकों के साथ अपनी बातचीत की तस्वीरें पोस्ट कीं और लिखा, ‘उन हाथों से सीखना जो रिंच घुमाते हैं और भारत के पहियों को गतिमान रखते हैं।’
अमेरिका में ट्रक यात्रा की: 23 जून को राहुल गांधी ने अमेरिका में भारतीय मूल के एक ड्रक ड्राइवर के साथ वॉशिंगटन डीसी से न्यूयॉर्क तक की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने ट्रक ड्राइवर से लंबी बातचीत की और उनके रोजमर्रा के जीवन के बारे में जाना। कांग्रेस के मुताबिक, भारत के साथ-साथ विदेश में भी लोगों को सुनने की यात्रा को जारी रखते हुए कांग्रेस नेता वाशिंगटन डीसी से न्यूयॉर्क तक ट्रक ड्राइवर तलजिंदर सिंह विक्की गिल और उनके साथी रंजीत सिंह बानीपाल के साथ 190 किलोमीटर की ‘अमेरिकी ट्रक यात्रा’ पर निकले।
जब चंडीगढ़ में भी ट्रक यात्रा पर निकले राहुल: 23 मई को राहुल ने दिल्ली से चंडीगढ़ तक का सफर ट्रक से किया और इस दौरान ट्रक चालकों की समस्याएं सुनीं। राहुल ने रास्ते के ढाबों में रुककर ट्रक चालकों से बातचीत भी की।
झुग्गियों में रहने वाली महिलाओं से मिलने पहुंचे: 17 मई को राहुल दिल्ली के शकूर बस्ती इलाके में पहुंचे। यहां उन्होंने रेलवे स्टेशन के पास झुग्गियों में रहने वाली महिलाओं से बात की। पार्टी की ओर से जारी एक वीडियो में झुग्गी की कुछ महिलाएं महंगाई को लेकर भी राहुल से बात करती दिखीं।
डीयू में छात्रों के साथ खाया खाना: पांच मई को राहुल दिल्ली विश्वविद्यालय के हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के बीच पहुंचे। राहुल आधे घंटे से ज्यादा छात्रों के साथ रहे और कैंटीन में बैठकर खाना खाया। इस दौरान उन्होंने छात्रों के साथ पढ़ाई, रोजगार, बेरोजगारी से संबंधित विषयों पर बातचीत की।
मुखर्जी नगर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों से मिले: 20 अप्रैल को राहुल दिल्ली के मुखर्जी नगर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के साथ बात करने के लिए पहुंच गए थे। मुखर्जी नगर में राहुल को छात्रों के साथ सड़क किनारे एक कुर्सी पर बैठे देखा गया और उन्होंने उनसे उनकी उम्मीदों और अनुभवों के बारे में पूछा। इससे एक दिन पहले 19 अप्रैल को राहुल ने पुरानी दिल्ली में जामा मस्जिद क्षेत्र और बंगाली बाजार का में इन इलाकों के लोकप्रिय व्यंजनों का लुत्फ उठाते नजर आए। उन्होंने जामा मस्जिद क्षेत्र और अन्य भोजनालयों में एक प्रसिद्ध ‘शरबत’ विक्रेता से मुलाकात की। उन्होंने खुद को फल भी खिलाए और बंगाली मार्केट में नाथू स्वीट्स में ‘गोलगप्पों’ का स्वाद चखा।
आम लोगों से मुलाकात के मायने क्या हैं?
कांग्रेस पार्टी से जुड़े नेताओं के मुताबिक राहुल गांधी का रोजमर्रा की जिंदगी में रोज कमाने खाने वालों से मिलने का यह सिलसिला भारत जोड़ो यात्रा का अगला हिस्सा है। इसे लेकर पार्टी ने एक बड़ी योजना बनाई है। इस योजना के तहत राहुल गांधी न सिर्फ मिस्त्री, मैकेनिक, राजगीर, कपड़े प्रेस करने पर वाले, सड़कों की सफाई करने वाले, सुरक्षाकर्मी और होटल रेस्टोरेंट पर काम करने वाले वेटर समेत उन सभी लोगों से मुलाकात करेंगे, जो अपने परिवार का पेट भरने के लिए रोज कमाते हैं उसी से रोज खाते हैं।
कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता पीएल पुनिया कहते हैं कि उनके नेता राहुल गांधी जिस तरह से सामान्य लोगों से मिलते हैं, तो उन लोगों का हौसला बढ़ता है और हमें उनकी समस्याओं से रूबरू होने का भी एक मौका मिलता है। राजनीतिक विश्लेषक जटाशंकर सिंह कहते हैं कि राहुल गांधी की इस तरह की मुलाकातें कांग्रेस के लिए आने वाले चुनावों के लिहाज से बूस्टर डोज की तौर पर देखी जा रही है।
क्या इसे लोकसभा चुनाव से जोड़ा जा रहा है?
राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार जीडी शुक्ला का मानना है कि किसी बड़े राजनेता खासतौर से राहुल गांधी जैसे बड़े कद के नेताओं का इस तरह लोगों से मिलना-जुलना एक सामान्य प्रक्रिया तो नहीं हो सकती है। निश्चित तौर पर इसके पीछे सियासत ही है। हालांकि यह बात अलग है कि किसी भी बड़े कद के नेता का ऐसे लोगों से मिलना-जुलना उन्हें सीधे तौर पर जोड़ता है।
शुक्ला का मानना है कि राहुल गांधी ने बीते चुनावों में कर्नाटक में भी ऐसे ही लोगों से मुलाकात की थी और भारत जोड़ो यात्रा के दौरान लगातार ऐसे लोगों से मिलते रहे थे। इसलिए कमाने-खाने वालों से मिलने के फॉर्मूले पर पार्टी लोकसभा के चुनावों के नजरिए से बड़ी फील्डिंग सजा रही है।