इमानदारों की नई खेप आ गई है जी! पहले खुदरा रूप में एक–एक‚ दो–दो करके आते थे। जैसे शारदा–नारदा वाले आए कि कभी हेमंत विश्व सर्मा आ गए तो कभी शुवेंदु अधिकारी आ गए। पर अब तो थोक में पूरी खेप आने लगी है। इस बार आठ–दस भ्रष्टों को एक साथ ईमानदार बना दिया गया है। धोबी घाट का सा दृश्य उपस्थित हो रहा है कि जैसे पछीट–पछीट कर मैले–कुचैले कपडों को साफ किया जाता है‚ वैसे ही बेईमानों को पछीट–पछीट कर ईमानदार बनाया जा रहा है। वैसे जमाना वाशिंग मशीन का है।
खैर‚ एक साथ इतने लोगों को ईमानदार बनाना कुछ–कुछ वैसा ही है जैसे भजनलाल जी ने जनता पार्टी की सरकार को कांग्रेस की सरकार बना दिया था। फर्क यही है कि तब वह अजूबा सी घटना थी‚ अब आम बात है। इधर कर्नाटक तथा मध्य प्रदेश का इस अजूबे को आम बनाने में योगदान रहा है। पहले राज्यस्तर पर भ्रष्टों में भी भ्रष्ट को चिह्नित कर उसे ईमानदार बनाया जाता था। लेकिन अब फुटकर से काम नहीं चलेगा जनाब! वक्त कहां है भई! चुनाव सिर पर आ लिए हैं। सवाल बस यही है कि इतने लोगों को ईमानदार बनाकर करेंगे क्याॽ जब बेईमान और भ्रष्ट रहेंगे ही नहीं तो आप भ्रष्ट होने का आरोप किस पर लगाएंगे और भ्रष्टाचार के खिलाफ वोट कैसे मांगेंगे। पर खैर‚ अभी तो महाराष्ट्र का ही हिसाब हुआ है। अभी तो लालू जी बचे हुए हैं। वे इस प्रचार की धुरी बने रहेंगे। लेकिन अब अजित पवार के खिलाफ बोलते हुए आप चक्की पीसींग एंड पीसींग वाली कामेडी कैसे करेंगे। उस सत्तर हजार करोड के घोटाले का क्या होगा। क्या उसे बट्टे खाते डाल दिया जाएगा। वैसे भी अब शरद पवार तो कहने वाले हैं नहीं कि मैं जमानत लेता हूं‚ मैं चुकाउगा। आखिर‚ तो वह मेरा भतीजा है। लेकिन अजित पवार ने तो चाचा ही बदल लिया। अब भाई–भतीजावाद सिर्फ बॉलीवुड में रह गया है‚ और वहां भी उससे सबसे ज्यादा पीडित कंगना रनौट ही हैं। वरना राजनीति से तो जी भाई–भतीजावाद खत्म हो लिया समझो। देखो‚ खेल–खेल में भ्रष्टाचार मिटाने का क्या गजब तरीका मिला है। बताते हैं कि इस तरीके की ईजाद में सीबीआई–ईडी का बडा भारी योगदान है। अगर ये एजेंसियां न हों तो भ्रष्टाचार मिटाना अकेले मोदी जी के भी बस की बात नहीं।







