पत्रकारिता से पोलिटिक्स में आए हरिवंश नारायण सिंह (हरिवंश) राजनीति के अखाड़े में दूसरे नेताओं की तरह कभी पहलवानी करते नहीं दिखे। जेडीयू के टिकट पर राज्यसभा का दूसरी बार सदस्य बनने के बाद गिने-चुने ही मौके आए हैं, जब हरिवंश की चर्चा देश भर में हुई है। उनकी पार्टी जेडीयू एनडीए में रहे या एनडीए से बाहर रहे, उनकी सियासी सेहत पर कभी कोई फर्क नहीं पड़ा। एक बार फिर वे चर्चा के केंद्र में हैं। चर्चा की वजह लंबे समय बाद उनकी जेडीयू नेता और बिहार के सीएम नीतीश कुमार से मुलाकात को लेकर हो रही है। सोमवार की शाम उन्होंने नीतीश कुमार से अकेले में मुलाकात की थी। बातचीत का दौर करीब डेढ़-पौने दो घंटे तक चला। क्या बातचीत हुई, इस पर आधिकारिक तौर पर न नीतीश कुमार ने कोई बयान दिया है और न हरिवंश ही कुछ बता रहे। सिर्फ अनुमान के आधार पर तरह-तरह की अटकलों का बाजार गर्म है।
कृषि बिल को लेकर चर्चा में आए थे हरिवंश
राज्यसभा में जब कृषि बिल पेश किया गया था तो उसे पारित कराने में विपक्षी दलों ने हरिवंश की भूमिका पर सवाल उठाए थे। तब राज्यसभा के उपसभापति के रूप में वे सदन का संचालन कर रहे थे। उन पर विपक्ष ने आरोप लगाया कि बिल बर बहस के दौरान बोलने का मौका नहीं दिया गया। बिल राज्यसभा से पारित तो हो गया, लेकिन लंबे समय तक चले किसान आंदोलन के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि कानून को निरस्त कर दिया। हरिवंश की भूमिका को लेकर विपक्षी दलों के सदस्य धरने पर बैठ गए थे। हरिवंश उन्हें मनाने के लिए अगली सुबह चाय लेकर विपक्षी नेताओं के पास पहुंचे थे।
संसद भवन के उद्घाटन पर चर्चा का केंद्र बने
संसद के नये भवन के उद्घाटन समारोह का विपक्षी दलों ने बायकाट किया। बायकाट करने वालों में उनकी पार्टी जेडीयू भी थी। इसके बावजूद हरिवंश कार्यक्रम में न सिर्फ शरीक हुए, बल्कि राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति के लिखित भाषण को उन्होंने ही पढ़ कर सुनाया। इस पर जेडीयू के राज्यस्तरीय नेताओं ने उनकी खूब लानत-मलामत की थी। एक प्रवक्ता नीरज कुमार ने उनकी नैतिकता पर ही सवाल उठा दिये थे। हरिवंश की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। आश्चर्यजनक ढंग से उन्हें दूसरी बार राज्यसभा भेजने वाले सीएम नीतीश कुमार ने भी अपनी ओर से कोई टिप्पणी नहीं की।
जेडीयू और आरजेडी मिलन के वक्त भी थी चर्चा
एनडीए छोड़ कर दूसरी बार नीतीश कुमार ने जब आरजेडी से हाथ मिलाया, तब भी हरिवंश की चर्चा हुई थी। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि 2017 में जेडीयू महागठबंधन से अलग नहीं होता। तीन लोगों के दबाव में नीतीश कुमार को महागठबंधन से अलग होने का फैसला लेना पड़ा। पत्रकारों की महफिल में ललन सिंह ने उन तीन लोगों के नाम भी गिनाए। उनमें पहला नाम हरिवंश, दूसरा नाम पत्रकार से राष्ट्रपति के सलाहकार बने अजय कुमार सिंह और तीसरा नाम नीतीश कुमार के अत्यंत विश्वासपात्र मंत्री संजय झा का था। ललन सिंह के मुताबिक इन्हीं तीनों की सलाह पर जेडीयू ने महागठबंधन से रिश्ता तोड़ा था।
एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गए हैं हरिवंश
नीतीश कुमार पिछले कुछ दिनों से अपने सांसदों-विधायकों से मिलते रहे हैं। सबसे मुलाकात हो गई थी, लेकिन हरिवंश नहीं आ पाए थे। सोमवार शाम वे पटना पहुंचे और नीतीश से मिलने गए। मीडिया को जब इसकी भनक लगी तो अटकलों का बाजार गर्म हो गया। हाल के दिनों में दो घटनाक्रम ऐसे हुए हैं, जिन्हें लेकर अटकलबाजी स्वाभाविक है। महाराष्ट्र में जिस गोपनीयता से एनसीपी को तोड़ने में बीजेपी ने अपना राजनीतिक कौशल दिखाया है, उसे लेकर जेडीयू में टूट की आशंका लोग पहले से ही जता रहे थे। इसी बीच नीतीश राजभवन अचानक एक दिन चले गए और वहां संयोग से बीजेपी के राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी भी पहुंच गए। बात-मुलाकात हुई। मोदी के मुताबिक अर्सा बाद दोनों मिले थे, इसलिए एक दूसरे के बारे में ही बातचीत सीमित रही। कोई राजनीतिक बात नहीं हुई। इसी बीच सोमवार की शाम नीतीश से मिलने हरिवंश पहुंच गए।
नीतीश के फिर एनडीए में लौटने की अटकलें
सारे घटनाक्रमों को देखते हुए बिहार की सियासत में यह चर्चा गर्म है कि नीतीश कुमार फिर से एनडीए में जाने को बेताब है। सुशील मोदी से राजभवन में उनकी मुलाकात संयोगवश नहीं, बल्कि प्रयोजनवश थी। एनडीए में लौटने की नीतीश संभावनाएं तलाश रहे हैं। चूंकि उन्होंने खुद एनडीए छोड़ा है और नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्षी एकता का अभियान चलाते रहे हैं, इसलिए सीधे मुंह बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व से तो वे बात कर नहीं सकते। इसलिए अपने विश्वसनीय लोगों के जरिए वे एनडीए में एंट्री का जुगाड़ भिड़ा रहे हैं। हरिवंश ने जेडीयू के एनडीए से अलग होने के बाद उपसभापति का पद नहीं छोड़ा था। इस पर सवाल भी उठे थे, लेकिन नीतीश ने अपनी ओर से कोई टीका-टिप्पणी नहीं की थी। जेडीयू के बहिष्कार के बाद हरिवंश जब संसद भवन के उद्घाटन समारोह में शरीक हुए, तब भी जेडीयू के दूसरे नेता भले बड़बड़ाते रहे, लेकिन नीतीश खामोश रहे। माना जाता है कि हरिवंश और नरेंद्र मोदी के बीच काफी अच्छे रिश्ते हैं। संभव है कि नीतीश ने उनसे एनडीए में एंट्री का जुगाड़ भिड़ाने को कहा हो।
तेजस्वी पर चार्जशीट भी हो सकती है वजह
रेलवे में नौकरी के बदले जमीन मामले में सीबीआई ने अब तेजस्वी यादव के खिलाफ भी चार्जशीट दाखिल कर दी है। पिछली बार तेजस्वी पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप ही जेडीयू के महागठबंधन से अलग होने का कारण बने थे। संभव है कि नीतीश ने इस मुद्दे पर हरिवंश को मशविरा के लिए बुलाया हो। बहरहाल, आने वाले दिनों में स्थिति अपने आप स्पष्ट हो जाएगी।
चिराग ने किया जेडीयू में टूट का दावा
नीतीश कुमार के बीजेपी के साथ जाने की अटकलों के बीच एक और नई अटकलों का बाजार गर्म हो गया है. जेडीयू में टूट और इसके आरजेडी में विलय का भी दावा किया जा रहा है. लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास पासवान) के नेता चिराग पासवान ने कहा, जेडीयू के नेताओं में असंतोष की भावना है और जेडीयू में टूट बहुत जल्द होगी. बीजेपी सांसद और नीतीश के साथ डिप्टी सीएम रहे सुशील मोदी ने तो जेडीयू के आरजेडी में विलय की भविष्यवाणी कर दी.
बयानों के वार शुरू हुए तो जेडीयू ने भी पलटवार किया. जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा, कोई मर्जर की बात नहीं है. जनता दल यूनाइटेड का अस्तित्व था, अस्तित्व है और रहेगा. फिलहाल, अभी ये बयानबाजी ही है और इन दावों में कितना दम है, इसका पता आने वाले दिनों में चल जाएगा.
चार्जशीट दाखिल होने के बाद सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (JDU) उसके सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। इस बीच बिहार बीजेपी नेता अजय आलोक ने नीतीश कुमार को लेकर बड़ा दावा किया है। बीजेपी नेता ने कहा कि नीतीश कुमार 10-15 दिन के अंदर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे।
बीजेपी नेता अजय आलोक ने कहा कि जब केस होगा तो चार्जशीट दाखिल क्यों नहीं होगी। कुछ दिन पहले तक तेजस्वी यादव छाती पीट-पीटकर कहते थे कि अगर केस है तो चार्जशीट फाइल क्यों नहीं कर रहे हैं। अब जब चार्जशीट दाखिल हो गई है तो पीएम मोदी और बीजेपी याद आ रही है कि बीजेपी ने फंसवा दिया। उन्होंने कहा कि ‘नीतीश कुमार अगले 10-15 दिनों में बिहार के सीएम पद से इस्तीफा दे देंगे। 13 तारीख को जब उन्हें कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा तो सीबीआई उनकी रिमांड मांगेगी। और अगर उन्हें उनकी कस्टडी मिल गई तो बिहार में हो गया…।’
इस दौरान अजय आलोक नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि, ‘नीतीश कुमार अब भ्रष्टाचार के संरक्षक बन गए हैं। वह अब ट्रिपल C क्राइम, करप्शन और कम्युनलिजम के झूले पर सवार हैं। जि वह अपराधियों के साथ हैं। उनके मंत्रिमंडल में ऊपर से नीचे तक अपराधी भरे हैं। लालू यादव ने मुख्यमंत्री की जीवनी पर लिखी पुस्तक का उद्घाटन किया। ये दोनों भ्रष्टाचार का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।’ बीजेपी नेता ने आगे कहा, ‘नीतीश कुमार का एक घंटे के लिए भी बिहार का मुख्यमंत्री रहना बिहार को एक महीने पीछे ले जाने जैसा है। वह 10-15 दिनों के भीतर इस्तीफा दे देंगे।’