यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लेकर सियासी बवाल मचा हुआ है. संभावना जताई जा रही है कि 20 जुलाई से शुरू होने जा रहे संसद के मानसून सत्र में यूसीसी बिल पेश किया जा सकता है. इस बीच आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने यूसीसी को लेकर कहा, ”यूसीसी घोषित करेगा कि कोई काफिर नहीं है सब बिलीवर हैं. इस कानून के लागू होने के बाद कोई भी काफिर नहीं कहलाएगा.”
आरएसएस नेता ने कहा कि यूसीसी कानून के लागू होने के बाद कोई भी अछूत नहीं कहलाएगा. इंद्रेश कुमार ने कहा, ”इस कानून का मतलब है, हम एक वतन, एक नागरिक हैं. यह कानून औरतों के ऊपर होने वाली जुल्मों को खत्म करता है. इस कानून से किसी भी धर्म और जाति में औरतों पर जुल्म नहीं हो सकेगा.”
मुस्लिमों को भड़काना बंद करें- इंद्रेश कुमार
इंद्रेश कुमार ने कहा कि मौलवी-मौलाना, मुसलमानों को भड़काना बंद करें. मुसलमान उनके भड़कावे में नहीं आएंगे. उन्होंने यूसीसी कानून की वकालत करते हुए इसे महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने वाला बताया. आरएसएस नेता ने कहा कि यूसीसी कानून सभी धर्मों की महिलाओं पर होने वाले अत्याचार को खत्म कर देगा.
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेता इंद्रेश कुमार ने यूसीसी के फायदे हुए गिनाते कहा कि इसके लागू होने से जातीय छुआछूत और भेदभाद खत्म हो जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने लोगों से कानून का विरोध करने वालों की बातों में नहीं आने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि इस कानून का समर्थन अधिक है और विरोध कम है। समान नागरिक संहिता का मतलब है, मजहबी दंगों से मुक्ती । इसका मतलब है मजहब से मजहब की बुराई ना करना। इसका मतलब है दूसरे मजहब की इज्जत करना। इसका मतलब है मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर करना। इस कानून का मतलब है कि मजहब ही सिखाता है आपस में प्यार करना। इस कानून का मतलब है कि जातीय छुआछूत समाप्ति। इसका मतलब है कि हम एक वतन, एक जन, एक नागरिक है। यह छुआछूत से मुक्ती रास्ता है। इंद्रेश कुमार ने कहा, ‘इसी के साथ-साथ जो दुखी है, पीड़ित है, कमजोर है, निर्बल है उसकी मदद के रास्ते खुलते हैं। यह कानून है, जो महिलाओं पर होने वाले जुल्मों को खत्म करता है। किसी भी धर्म और जाति में औरतों पर कोई जुल्म नहीं हो सकेगा।”
इंद्रेश कुमार ने कहा कि यूसीसी के तहत सभी को अपने-अपने धर्मों पर चलने की आजादी होगी। अंतिम संस्कार और शादी को लेकर भी पूरी आजादी रहेगी। उन्होंने कहा, “किसी को दफनाना है वो दफना सकेगा। जिसको बहाना है वो वहा सकेगा। इसके लिए कोई प्रतिबंध नहीं। इसी तरह जिसको अपने बच्चे का शादी निकाह करना है, जिसको गुरुद्वारे में शादी करनी है वो वहां कर सकेगा। जिसको कोर्ट में शादी करनी है वो कोर्ट में शादी कर सकेगा। इसलिए सबको अपने अपने ढंग से पूरी आजादी दी गई।”
उन्होंने कहा कि ऐसे ही तीज-त्योहार मनाने के लिए आजादी रहेगी। जिसको नमाज अदा करनी है वो नमाज अदा कर सकेगा। चाहे एक समय करे, चाहे 5 समय करे। जिसको प्रार्थनाएं करनी हैं को वो अलग-अलग प्रकार के मंदिर हैं, राधा स्वामी हैं कि निरंकारी हैं। ब्रह्मकुमारीज हैं कि कबीरपंथी हैं और गुरुद्वारे जाता है कि जैन स्थानन, जैन मंदिर जाता है या किसी और स्थान जाता है। तो अपने-अपने ढंग से जिस भी ईष्ट को मानता है, इबादत करता है, समान नागरिक घोषिक करेगा कि कोई काफिर नहीं है सभी बिलीवर हैं। इसलिए किसी को भी काफिर कहने का अधिकार नहीं। सभी के बिलीफ अपनी-अपनी तरह के हैं।
इंद्रेश कुमार ने आगे कहा कि यह कानून सुख और दुख में एकता पैदा करेगा। कोई यूनियन बनानी है तो एक कानून चाहिए। कोई दुर्घटना हो गई है तो मुआवजा मिल रहा है तो एक कानून चाहिए इसलिए यह कानून एकता, मोहब्बत, भाईचारे का पैगाम और रास्ता है। इसके साथ ही उन्होंने यूसीसी का विरोध करने वालों को लेकर कहा कि जो ये कहते हैं कि मुसलमान को खतरा है वो झूठ बोलते हैं, जबकि खुद अल्लाह ने ख़ुदा ने, रब ने यह पैगाम । दिया है, तू जिस बतन का होगा उस बलन के कायदे कानून के अनुसार जी यही तेरा इमान है और यही ईमान तुझे जन्नत की ओर ले जाएगा इसलिए मालिक ने पैगाम भेजा। वतन की मोहब्बत इफाजत, कुर्बानी ये ईमान का रास्ता है, जो जन्नती है।
इस दौरान, उन्होंने गोबा के कॉमन यूनिफॉर्म सिविल कोड का जिक्र करते हुए कहा कि आज तक 75 सालों में कानून की वजह से वहां कोई दिक्कत नहीं आई है। किसी मुसलमान या ईसाई या हिंदू ने शिकायत नहीं की है। उन्होंने आगे कहा, “इस देश के अंदर कहीं पर और लोकमान्य तिलक, बाला साहेब अंबेडकर, बापू गांधी, भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस ने भी एक कानून की वकालत की थी। सुप्रीम कोर्ट, संविधान ने भी एक कानून की वकालत की। लेकिन हमेशा एक मजहब और जाति में बांटकर एक कानून की धज्जियां उड़ाने की कोशिश की गई। अगर हो जाते तो शाहबानो को भी जस्टिस मिल जाता, जिसे 75 और 80% पैसे मुआवजा मिलना था, वो भी ना देकर नारी पर जुल्म का इतिहास रचा तो इसलिए मजहबों के अंदर जो महिलाओं का अपमान है उससे बचेंगे और कुरुतियां दूर होंगी। सभी धर्म आपस में मिल जुलकर फलेंगे फूलेंगे। सभी जातियां भी मिल-जुलकर रहेंगी, कोई अछूत नहीं कहलाएगा, कोई काफिर नहीं रह पाएगा।”
इंद्रेश कुमार ने आगे अपील करते हुए कहा कि जो नेता, पार्टियां या मौलाना, इमाम, मौलवी भड़का रहे हैं मुसलमानों को विशेष रूप से वे भड़काना बंद करें और मुलमान उनके भड़कावे में नहीं आएं, बल्कि उनसे पूछें कि जो संस्थाएं इतनी बढ़ बढ़ कर बातें कर रही हैं, बताओ उन्होंने हिंदुस्तान के हित में कौन सा काम किया है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि जो ये सब कर रहे हैं उन्होंने गरीबों और पीड़ितों के लिए कितने शिक्षा संस्थान या बेरोजगारों के लिए कुछ किया है। जो कुछ कमियां आ गई हैं मुसलमानों में, उनसे मुक्त करने के लिए मुसलमान एक संजीदा हिंदुस्तानी नागरिक बनें तो क्या किया। आज तलाक से पीडित इतनी औरते हैं और उनकी और बच्चों की बेहतर जिंदगी के लिए उन्होंने क्या किया है।
पीएम मोदी ने किया जिक्र और छिड़ गया सियासी घमासान
बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम के दौरान यूनिफॉर्म सिविल कोड का जिक्र किया था. पीएम मोदी ने यूसीसी की वकालत करते हुए कहा कि इसका डर दिखा कर वोटबैंक की राजनीति की जाती है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कह रहा है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड लाओ.
उत्तराखंड में जल्द लागू होगा यूसीसी- सीएम धामी
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार (4 जुलाई) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद कहा कि उनकी सरकार समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर काम कर रही है और जल्द ही इसे लागू किया जाएगा. हालांकि उन्होंने यूसीसी पर प्रधानमंत्री के साथ कोई चर्चा किए जाने से इनकार किया.






