केंद्र सरकार संसद में पिछले एक सप्ताह से ज्यादा वक्त से जारी हंगामे को खत्म करने की पहल में जुट गई है. संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने आज लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात की और उनसे सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से संचालित करने में मदद मांगी. हालांकि, सूत्रों ने बताया कि राहुल ने रिजिजू से स्पष्ट कहा कि सदन में गृह मंत्री के बयान के बिना कार्यवाही नहीं चलेगी. सूत्रों का कहना है कि सरकार 15 अगस्त के बाद संसद का विशेष सत्र बुला सकती है।
परिसीमन बिल पर मांगा सहयोग
कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी से मुलाकात में रिजिजू ने परिसीमन और महिला आरक्षण संविधान संशोधन विधेयक पर कांग्रेस का सहयोग मांगा था. हालांकि, राहुल ने साफ किया कि चंदा चोरी और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के बारे में गृह मंत्री अमित शाह के बयान के बिना सदन की कार्यवाही नहीं चलेगी. इसके बाद रिजिजू स्पीकर से मिले और फिर अमित शाह को जानकारी दी.
करीब 50 मिनट तक चली बैठक
रिजिजू और राहुल गांधी के बीच करीब 50 मिनट तक बैठक चली. बैठक के दौरान प्रियंका गांधी भी मौजद रहीं. इस दौरान संसद में गतिरोध को खत्म करने को लेकर भी चर्चा हुई. राहुल गांधी के कमरे में चली बैठक. गौरतलब है कि पिछले एक सप्ताह से ज्यादा वक्त से संसद का मॉनसून सत्र नहीं चल पा रहा है. नीट पेपर लीक पर लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा जरूर हुई लेकिन उसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही प्रभावित हुई है. सरकार ने कुछ जरूरी विधेयक विपक्ष के शोर शराबे के बीच में ही पास करवा लिया. ऐसे में राहुल और रिजिजू की ये मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है.
सरकार के पास क्या विकल्प?
ऐसे में सरकार के पास दो विकल्प हैं. विपक्ष को साथ में लेते हुए या तो सत्र के अंतिम हफ्ते में परिसीमन बिल पेश करे या फिर मॉनसून सत्र को पंद्रह अगस्त के ब्रेक के बाद आगे बढ़ाए. इससे पहले सरकार विस्तारित बजट सत्र के दौरान इस संविधान संशोधन विधेयक को पेश किया था लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण पास नहीं करा पाई थी. इस संविधान संशोधन विधेयक में लोकसभा और विधानसभा की सीटों में 50% इजाफे और अगले लोकसभा चुनाव से 33% महिला आरक्षण का प्रावधान है.
डीएमके सरकार का कर सकती है समर्थन
अप्रैल में विपक्ष परिसीमन बिल का यह कह कर विरोध किया था कि इससे दक्षिण और छोटे राज्यों की भागीदारी घटेगी. हालांकि सरकार ने भरोसा दिलाया था कि सभी राज्यों में सीटों की संख्या मौजूदा अनुपात में ही बढ़ेगी. लेकिन बात नहीं बन पाई. अब पांच महीनों के बाद सियासी समीकरण काफी बदल गए हैं. डीएमके विपक्षी इंडिया गठबंधन से दूर जा चुकी है, टीएमसी के बीस लोकसभा सांसद और उद्धव ठाकरे की शिवसेना के छह लोकसभा सांसद एनडीए में शामिल हो चुके हैं. इस तरफ सरकार दोनों सदनों में अब दो तिहाई बहुमत से ज्यादा दूर नहीं है. संख्या जुटाने के लिए सरकार इस पर परिसीमन बिल में सीटों में पचास फीसदी बढ़ोतरी का लिखित प्रावधान कर सकती है. सूत्रों के मुताबिक ऐसे में डीएमके इस बिल का समर्थन कर सकती है. मॉनसून सत्र के आखिरी हफ्ते में परिसीमन बिल के अलावा एनजीओ पर नकेल कसने वाले एफसीआरए बिल पर भी नजरें टिकी हुई हैं.
राजनीतिक दलों से संपर्क साध रही सरकार
सूत्रों के मुताबिक 16 से 18 अगस्त तक विशेष सत्र में सरकार की कोशिश होगी कि वह परिसीमन बिल पर चर्चा कर उसे पारित करा सके। वहीं इस संबंध में सरकार विभिन्न राजनीतिक दलों से संपर्क साध रही है ताकि इस बिल पर व्यापक सहमति बनाई जा सके।
सूत्रों के मुताबिक संसद में गतिरोध तोड़ने के लिए जहां संसदीय मंत्री किरेन रीजीजू को राहुल और प्रियंका गांधी से बात करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है तो वहीं अन्य विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर संवाद स्थापित करने की केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी, पीयूष गोयल,अर्जुनराम मेघवाल और एस मुरुगन को दी गई है । ये नेता अलग-अलग विपक्षी दलों के नेताओं से बातचीत करेंगे।
FCRA संशोधन बिल अगले सप्ताह पेश करने की तैयारी
इसके साथ ही, सरकार अगले सप्ताह Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 (एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026) को भी संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है। यह विधेयक विदेशी अंशदान से जुड़े मौजूदा कानून में संशोधन का प्रस्ताव लेकर आएगा। हालांकि, विशेष सत्र की तारीख और एजेंडा को लेकर सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस संबंध में औपचारिक फैसला लिया जा सकता है।
बता दें कि कांग्रेस का रुख पहले से ही स्पष्ट है कि वह परिसीमन बिल का विरोध करेगी। संसद के मानसून सत्र से पहले हुई कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में ही पार्टी ने तय किया था कि अगर सरकार परिसीमन बिल लाती है तो इसका पार्टी की ओर से विरोध किया जाएगा।
क्या है परिसीमन बिल?
सरकार ने लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत रिजर्वेशन देने के लिए एक अहम कदम उठाया है। इसके तहत सांसदों और विधायकों की संख्या बढ़ाने के लिए परिसीमन से जुड़े प्रावधानों वाला बिल सरकार एक बार फिर संसद में लाना चाहती है। बता दें कि इस बिल से संविधान संशोधन के बाद लोकसभा में सदस्यों की संख्या 543 से बढ़कर 850 हो जाएगी। इनमें से 815 सीटें राज्यों के लिए रहेंगी जबकि 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। इस बिल को पास कराने के लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है।







