शिक्षक भर्ती परीक्षा में डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग और भाजपा के अल्टीमेटम के बाद बिहार सरकार ने अपना रूख स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने कहा कि किसी भी हालत में डोमिसाइल नीति लागू नहीं होगी। बिहार सरकार ने संविधान के आर्टिकल 16 का हवाला देते हुए इसे कानूनी बाध्यता बताया। सोमवार की शाम मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने बताया कि 1994, 1999 और 2000 में जो परीक्षा हुई इसमें भी डोमिसाइल का प्रावधान नहीं था। यह नियमावली तो 1991 में ही बनी थी। उसमें भी यह प्रावधान नहीं था। इसलिए इस परीक्षा में भी डोमिसाइल नीति हटाई गई। साल 2012 में 1 लाख 68 हजार की नियुक्ति हुई है। इसमें 3 हजार से अधिक अभ्यर्थी बिहार के बाहर से आए हैं।
ऐसा कहता है संविधान का आर्टिकल 16
आमिर सुबहानी ने कहा कि डोमिसाइल नीति लागू करना विधि संगत भी नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान के आर्टिकल 16 में कहा गया है कि राज्य के अधीन किसी नियोजन या पद के संबंध में केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्म स्थान और निवासी या इनमें से किसी के आधार पर न तो कोई नागरिक अप्रात्र होगा और उससे कोई विभेद किया जाएगा।
आरक्षण के कारण बिहार निवासी को ही लाभ मिलेगा
मुख्य सचिव ने बताया कि उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में देश के हर राज्य के निवासी नौकरी करेंगे। इसी तरह बिहार में यहां के अलावा दूसरे राज्यों के निवासी भी शिक्षक बनने के पात्र हैं। अन्य राज्यों की परीक्षा में भी स्थानीय निवासी होने का शर्त नहीं है। इसके अलावा आरक्षण के आधार पर चयनित होने का लाभ तो बिहार के स्थानयी निवासी को ही मिलेगा। यह आरक्षण का नियम है। 50 प्रतिशत रिक्तियों पर तो आरक्षण के कारण बिहार निवासी को ही लाभ मिलेगा। वहीं, अपर मुख्य सचिव के के पाठक ने कहा है कि जिन-जिन राज्यों ने डोमिसाइल के प्रावधान किए हैं। हाई कोर्ट में गए। सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन, मुकदमा हार गए हैं। झारखंड सरकार सुप्रीम कोर्ट से हार गई है।







