अंतरंग दोस्तों की नजर में नीतीश नामक पुस्तक का विमोचन राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने किया। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जीवनी पर आधारित इस किताब को लेखक उदयकांत मिश्रा ने लिखा है। ज्ञान भवन में पुस्तक विमोचन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। मौके पर राजद सुप्रीमो ने प्रधानमंत्री और भाजपा पर जमकर हमला बोला। कहा कि चारों तरफ नरेंद्र मोदी डाका डाल रहे हैं।
श्री लालू ने कहा कि हमारे अभिन्न मित्र छोटे भाई नीतीश कुमार पर उदयकांत जी ने पुस्तक लिखी है और मुझे लोकार्पण करने का मौका दिया है। यह भी ऐसे समय में यह हो रहा जब हमारा देश टूट रहा है। देश बिखर रहा है लोकतंत्र पर हमला हो रहा है। नरेंद्र मोदी चारों तरफ डाका डाल रहे हैं। हाल ही में हमने देखा कि महाराष्ट्र में देश के बडे नेता शरद पवार बिहार में आए थे। हमलोगों ने उन्हें पटना बुलाया था। तब कहा था कि सभी लोगों को इक_ा होना चाहिए और नरेंद्र मोदी को बाहर कर देना चाहिए। राम और रहीम के बंदो के बीच बीजेपी ने नफरत की दिवार खडी की है। संविधान पर हमले हो रहे है। नरेंद्र मोदी से बडा भष्टाचारी कौन हो सकता है। नरेंद्र मोदी आरक्षण पर खतरा पैदा कर रहे हैं। एमएलए को खरीदना आम बात हो गयी है। महाराष्ट्र के बाद बिहार को तोडने की बात करने लगे। हमलोग एकजुट होकर देश के संविधान को मजबूत करेंगे। लालू ने कहा कि शरद पवार की पार्टी को तोडा गया।
लालू प्रसाद ने कहा कि नीतीश कुमार बिलकुल साधारण घर से निकले हुए नेता हैं। इनके पिता जी वैद्य थे। जननायक कर्पूरी ठाकुर की मृत्यु के बाद नेता विरोधी दल का पद खाली हो गया था। नीतीश कुमार ने मेरे पक्ष में खडा होकर मुझे नेता विरोधी दल बनाया। तब से हमलोग साथ–साथ काम कर रहे हैं‚ एकजुट है। लालू प्रसाद ने कहा कि चर्चा लोग कर रहा है कि बिहार में एमपी लोगों को तोड दिया जाएगा। बिहार को हिलने–डुलने तक नहीं देंगे बल्कि जो इस फिराक में हैं उनके सफाए की शुरुआत बिहार से ही होगी। बिहार में उडती चिडिया को हल्दी लगाया जाता है।
सीपीआईएम पोलित ब्यूरो सदस्य एवं पूर्व सांसद सुभाषिनी अली सहगल ने कहा कि इस जीवनी में तीन तरह के नीतीश कुमार की कहानी है। सबसे पहले गांव और कस्बे के मुन्ना‚ फिर छात्र जीवन में बने नेताजी और उसके बाद हर तरह के मंत्रीजी। इस जीवनी के माध्यम से हम समझ सकते हैं कि नीतीश शराबबंदी को लेकर इतने कटिबद्ध क्यों हुए‚ मंडल–कमंडल की विरोधाभासी राजनीति के भूलभुलैया में उनका टेढा–मेढा सफर और आज के खतरनाक दौर में उनका क्या महत्व है। साथ ही उनके व्यक्तित्व के दूसरे पहलुओं जैसे छात्र जीवन में उनके कमरे के नीचे की गरीब बस्ती में रातभर पिटती महिलाओं और बच्चों की चीखों का उन पर जो असर हुआ और पुस्तक प्रेमी नीतीश के गृह जनपद में पुस्तक जलाने वालों की चुनौती‚ ये सब उनकी अब तक की यात्रा के वह पडाव हैं जो बहुत प्रेरक हैं।
राजद प्रवक्ता मनोज झा ने कहा कि मैं राजकमल प्रकाशन के किसी भी लोकार्पण कार्यक्रम में जाता हूं तो उस किताब के माध्यम से अपनी बात कहने की कोशिश करता हूं। आपकी जीवनी अगर आपका कोई दोस्त लिखे तो वह पूरी ईमानदारी बरतता है। दोस्त जब आपके बारे में कुछ लिखते हैं तो मोती की तरह चीजों को चुनते हैं। किताब में आए जेपी आंदोलन के जिक्र पर उन्होंने कहा कि जेपी आंदोलन ने बहुत नायाब चीजें हमें दी हैं। अब वैसा आंदोलन खडा करने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि आगे भी कई और किताबें लिखी जाएंगी नीतीश जी पर‚ उनके सहयोगी लालू जी और बाकी लोगों पर भी। आप उन सबसे असहमत हो सकते हैं लेकिन उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकते।
मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि इस किताब के नायक और लेखक दोनों मेरे लिए आकर्षण के विषय हैं। लेखक से मेरे परिचय का कारण भी इस किताब के नायक ही रहे हैं। मुझे लगता है कि यह लेखक की नायक से अंतरंगता के कारण ही है कि इस किताब की भाषा इतनी धारदार है। इस किताब की खास बात यह है कि इसे पढते हुए ऐसा लगता है कि किताब के दृश्य हमारी आंखों के सामने घट रहे हैं। जो आदमी समय की कीमत जानता है वही समय की मदद से आगे बढता है। नीतीश जी के व्यक्तित्व की सबसे खास बात उनका समय प्रबंधन है। घडी को समय बताने में चूक हो सकती है लेकिन नीतीश जी के समय प्रबंधन में चूक नहीं होती।
अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के व्यक्तित्व की सबसे खास बात यही है कि वे बोलने से ज्यादा काम करने में विश्वास करते हैं। अगर आप अच्छा काम करते हैं तो दुनिया अपने आप आपको जान जाएगी। नीतीश कुमार के रूप में इस बात का उदाहरण हमारे सामने है। उनके काम करने का तरीका बडा सरल है वे कम से कम शब्दों में बडे प्रभावी निष्कर्ष और फैसले तक पहुंचते हैं। राजकमल प्रकाशन समूह के अध्यक्ष अशोक महेश्वरी ने कहा कि आज ऐसे नेता की जीवनी का लोकार्पण हो रहा है जो अपने बारे में कभी कुछ नहीं कहता। अब तक हम सब केवल नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन से परिचित थे। लेकिन इस जीवनी ने उनके व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन के कई ऐसे पहलू उजागर किए हैं जो पहले ज्यादातर लोगों को ज्ञात नहीं थे। यह जीवनी हम सबको प्रेरणा देती है कि अगर हम लगातार अपने रास्ते पर बने रहते हैं तो बडे से बडा मुकाम भी हासिल किया जा सकता है। लोकार्पण कार्यक्रम का संचालन जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान के निदेशक नरेन्द्र पाठक ने किया। राजकमल प्रकाशन की पटना शाखा के प्रबंधक वेद प्रकाश ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में बिहार विधान परिषद के सभापति देवेश चन्द्र ठाकुर‚ जल संसाधन मंत्री संजय झा सहित अनेक लोग शामिल थे।
सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर स्थित ज्ञान भवन में आयोजित लोकार्पण कार्यक्रम में पुस्तक के लेखक उदय कांत ने इस पुस्तक की बिक्री से मिलने वाली रॉयल्टी की राशि विकलांगों के कल्याण के लिए देने की घोषणा की।
मौके पर लेखक उदय कान्त ने कहा कि मैं एक आंदोलन में शामिल होने के लिए पटना आया था। यहां मेरी मुलाकात नीतीश कुमार से हुई। उन्होंने मुझे ऐसा सपना दिखाया कि अब यह दुनिया बदलने वाली है। कुछ हद तक उनकी बात सही भी साबित हुई। नीतीश ऐसे व्यक्ति हैं जिनको परत दर परत आप जैसे–जैसे जानते जाएंगे‚ उनके लिए मोहब्बत उतनी ही बढती जाएगी। उनकी जीवनी के रूप में आई यह किताब हमें बताती है कि कैसे एक बूंद समुद्र बन सकता है। आज नीतीश कुमार उम्र के जिस पडाव पर हैं उसी उम्र में जेपी ने देश को जगाया और एक तब्दीली लाई। मैं उम्मीद करता हूं कि नीतीश भी उसी तरह देश को जगाकर तब्दीली लाएंगे। उन्होंने कहा कि हम विकलांगों को ट्रेनिंग देना चाहते हैं कि प्राकृतिक आपदाओं के समय कैसे अपनी सुरक्षा खुद कर सकते हैं। इसके लिए हमें फंड की जरूरत है जिसमें इस किताब की पहली प्रति लेने वालों ने अपना योगदान दिया‚ इसके लिए हम उनके आभारी हैं। लालू प्रसाद यादव के हाथों दस हजार रुपये में जीवनी की पहली प्रति लेकर दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए समर्पित संस्थाओं को सहयोग देने के लिए कई समाजसेवी आगे आये। इनमें में प्रीति भटनागर ऊटी‚ क्षमानाथ गुडगांव‚ राजीवकांत भागलपुर‚ सुमित बजाज दिल्ली‚ कौशल किशोर मुंबई‚ डॉ जवाहर पटना और अनुपम कुमार के नाम शामिल हैं।







