बिहार की राजनीति लंबे समय से राजद के हरे और भाजपा के भगवा रंग के इर्द-गिर्द घूमती रही है। अब, बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे ने इसमें जन सुराज पार्टी के पीले रंग को जोड़ दिया है। दूसरों को चुनाव जिताने वाले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अपने चुनावी डेब्यू में पहली व्यक्तिगत जीत दर्ज की है। 2025 के राज्य चुनावों में एक भी सीट न मिलने के महज आठ महीने बाद मिली यह सफलता जन सुराज के लिए बेहद अहम है। यह जीत न केवल किशोर के राजनीतिक वजूद को बचाती है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि क्या बिहार में अब तीसरी राजनीतिक ताकत के लिए जगह बन चुकी है?
पटना के बांकीपुर उपचुनाव में जनसुराज के प्रशांत किशोर ने बड़ी जीत दर्ज की है। यह जीत इसलिए भी बड़ी है, क्योंकि उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के गढ़ में उन्हीं के उम्मीदवार नीरज सिन्हा को 19,324 वोटों से हरा दिया।
अंतिम परिणाम में जन सुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर को 64,151 वोट मिले, जबकि बीजेपी के नीरज कुमार सिन्हा 44,827 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे। प्रशांत किशोर ने 19,324 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. वहीं आरजेडी उम्मीदवार रेखा गुप्ता 14,273 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहीं और अपनी जमानत भी नहीं बचा सकीं.
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस एनडीए के पास बिहार में 201 विधायकों का समर्थन, लोकसभा में 30 सांसदों की ताकत, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का प्रभाव था, उसी सीट पर बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा आखिर हार कैसे गए?
एक नहीं नीरज सिन्हा के हार के कई कारण
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, बीजेपी की हार के पीछे कई कारण रहे. पहला, पार्टी उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा की स्थानीय पहचान अपेक्षाकृत सीमित रही. टिकट बदलने को लेकर भी कार्यकर्ताओं में शुरुआती असमंजस देखने को मिला. दूसरा, प्रशांत किशोर ने बेरोजगारी, पेपर लीक और बिहार से पलायन जैसे मुद्दों को लगातार चुनाव के केंद्र में रखा, जिसका असर खासकर युवा और शिक्षित मतदाताओं पर दिखाई दिया. इसके अलावा, बीजेपी के पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक में भी इस बार सेंध लगी. प्रशांत किशोर को ब्राह्मण और शिक्षित वर्ग के एक हिस्से का समर्थन मिलने की चर्चा पूरे चुनाव के दौरान होती रही. वहीं आरजेडी के कमजोर चुनाव प्रचार का फायदा भी जन सुराज को मिला, जिससे बीजेपी विरोधी वोटों का बड़ा हिस्सा प्रशांत किशोर के पक्ष में जाता दिखा.
BJP के नीरज कुमार सिन्हा की हार के 5 बड़े कारण
1. प्रशांत किशोर का मजबूत चेहरा और चुनावी रणनीति
देश के चर्चित चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर ने बूथ स्तर पर मजबूत नेटवर्क, डेटा आधारित रणनीति और लगातार जनसंपर्क के दम पर चुनाव को अपने पक्ष में मोड़ दिया. जन सुराज के कार्यकर्ताओं ने भी जमीनी स्तर पर सक्रियता दिखाई.
2. सवर्ण वोट बैंक में सेंध
बांकीपुर बीजेपी का पारंपरिक सवर्ण बहुल इलाका माना जाता है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ब्राह्मण समाज से आने वाले प्रशांत किशोर को सवर्ण मतदाताओं, खासकर ब्राह्मण वोटों का एक हिस्सा मिला. वहीं राजपूत और भूमिहार वोटरों ने भी प्रशांत किशोर की ओर झुकाव दिखाया. इसके अलावा मुस्लिम वोटरों भी इस बार आरजेडी के तरफ पूरी तरह से नहीं गए, जिसका नुकसान नीरज सिन्हा को हुआ.
3. युवा मतदाताओं का झुकाव
बेरोजगारी, पेपर लीक, पलायन और रोजगार जैसे मुद्दों को प्रशांत किशोर ने लगातार उठाया. इन मुद्दों का असर युवा और शिक्षित मतदाताओं पर दिखा, जिससे जन सुराज को फायदा मिला.
4. उम्मीदवार चयन और स्थानीय पहचान
बीजेपी ने पहले उम्मीदवार बदला और बाद में नीरज कुमार सिन्हा को टिकट दिया. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनकी स्थानीय पहचान और जनाधार अपेक्षाकृत सीमित रहा, जिसका असर चुनावी प्रदर्शन पर पड़ा.
5. एंटी-इनकंबेंसी और बदलाव की चाह
करीब तीन दशक से बांकीपुर सीट बीजेपी के पास रही. लंबे समय तक एक ही दल के प्रतिनिधित्व के बाद मतदाताओं के एक वर्ग में बदलाव की इच्छा दिखाई दी. इसी भावना का लाभ प्रशांत किशोर को मिला और वे इसे अपने पक्ष में वोट में बदलने में सफल रहे.
बड़ा संदेश दे गया बांकीपुर
बांकीपुर का यह नतीजा सिर्फ एक उपचुनाव का परिणाम नहीं माना जा रहा है. इसे आगामी बिहार के आने वाले चुनावों में एनडीए के लिए चेतावनी और जन सुराज के लिए बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है. बीजेपी के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह अपने पारंपरिक गढ़ में मिली इस हार के कारणों की समीक्षा कर आगामी चुनावों के लिए नई रणनीति तैयार करे.
UN की नौकरी से विधानसभा तक…
दूसरों को चुनाव जिताने वाले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अपने चुनावी डेब्यू में पहली व्यक्तिगत जीत दर्ज की है।
UN की नौकरी से विधानसभा तक PK
शुरुआती शिक्षा: 1977 में रोहतास में जन्मे किशोर ने बक्सर से पढ़ाई की और पटना साइंस कॉलेज से 12वीं पूरी की।
उच्च शिक्षा: प्रशांत किशोर ने लखनऊ विश्वविद्यालय से BBA और ASCI (हैदराबाद) से हेल्थकेयर मैनेजमेंट में मास्टर्स किया।
विदेश में पढ़ाई: फ्रांस में फ्रेंच भाषा का प्रशांत किशोर ने कोर्स किया।
प्रोफेशनल अनुभव: प्रशांत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) समर्थित सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम में आठ वर्षों तक काम किया।
सियासी करियर: राजनीतिक पार्टियों को जीत का टिप्स देते-देते खुद सियासत में आए और बांकीपुर के विधायक बने।
शीर्ष रणनीतिकार से ‘जन सुराज’ का सफर
2014 के लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी के सफल अभियान से प्रशांत किशोर को राष्ट्रीय पहचान मिली। उनकी संस्था ‘आई-पैक’ (I-PAC) ने नीतीश कुमार, ममता बनर्जी और पंजाब, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के दलों के साथ काम किया। 2015 में बिहार महागठबंधन को जिताने के बाद वे थोड़े समय के लिए जदयू में रहे। गांधीवादी विचारधारा के अनुयायी प्रशांत किशोर ने 2 साल की पदयात्रा के बाद 2 अक्टूबर 2024 को जन सुराज पार्टी बनाई।
‘मैं विधायक बनने नहीं, संदेश देने आया हूं’
बांकीपुर में मिली जीत के बाद प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किस बात की है। उन्होंने कहा, ‘मैं विधायक बनने या बांकीपुर को बेंगलुरु जैसा महानगर बनाने के लिए चुनाव नहीं लड़ा था। मैं भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को यह संदेश देना चाहता था कि वे रोजगार पैदा करें, शिक्षा दें और पलायन रोकें, वरना ऐसे ही नतीजों के लिए तैयार रहें।’
सादगी भरा जीवन जीते हैं प्रशांत किशोर
डॉ जाह्नवी दास से विवाहित और एक बेटे के पिता प्रशांत किशोर चुनाव अभियान के दौरान एक संन्यासी की तरह रहते हैं। वे टीवी पर समाचार बेहद कम देखते हैं और पिछले एक दशक से उन्होंने लैपटॉप का इस्तेमाल नहीं किया है। अपने जमीनी नेटवर्क से जुड़े रहने के लिए वे केवल अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं।
अपनी जीत के बाद पीके ने अपना एजेंडा भी साफ कर दिया। उन्होंने बीजेपी नेतृत्व से बिहार में मुख्यमंत्री बदलने की अपील की और कहा, “किसी पढ़े लिखे को सीएम बनाइए, अपराधी को मुख्यमंत्री बनाइएगा तो बिहार की तरक्की नहीं होगी।” जनता ने आपके 202 विधायक जिताए हैं किसी अपराधी, किसी गलत चाल-चरित्र चेहरे वाले व्यक्ति को बिहार का नेतृत्व मत दीजिए। अच्छे आदमी को बनाएं ताकि बिहार में भी शिक्षा, रोजगार हो। बिहार के बच्चों को बाहर मजदूरी करने ना जाना पड़े। ये संदेश बांकीपुर के लोगों ने दिया है…जिन्होंने वोट दिया है उनका धन्यवाद जिन्होंने वोट नहीं दिया है उनको यही कहेंगे कि आपका विश्वास जीतने के लिए और मेहनत और प्रयास करेंगे। बिहार को अच्छा नेतृत्व मिलना चाहिए बिहार सुधरना चाहिए…”
बांकीपुरः PK को BJP-RJD के कुल वोटों से भी ज्यादा वोट
जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने बांकीपुर उपचुनाव में 64,151 वोट (49.23%) हासिल किए। भाजपा के नीरज कुमार को 44,827 वोट (34.40%) मिले। दोनों के बीच जीत का अंतर 19,324 वोट रहा।
राजद की रेखा कुमारी 14,273 वोट (10.95%) के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। भाजपा और राजद को मिलाकर कुल 59,100 वोट मिले, जो अकेले प्रशांत किशोर के वोटों से 5,051 कम हैं। यह उनकी मजबूत बढ़त को दर्शाता है।
चुनाव में कुल 1,30,313 वोट पड़े। इनमें लगभग हर दूसरा वोट प्रशांत किशोर के पक्ष में गया। NOTA को 646 वोट (0.50%) मिले।
वहीं, शीर्ष तीन उम्मीदवारों के बाद कोई भी प्रत्याशी 1,000 वोट तक नहीं पहुंच सका। चौथे स्थान पर रहे मनोरंजन कुमार श्रीवास्तव को 973 वोट (0.75%) मिले।