कुकी संगठन का दावा- BJP उम्मीदवार को चुनाव जिताया था
ऑल मणिपुर बार एसोसिएशन ने एचएमओ अमित शाह से केएनओ और यूकेएलएफ के बयान के बारे में जवाब मांगा है जिसमें दावा किया गया था कि उन्होंने चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के बदले में बीजेपी के साथ सौदा किया था। इसलिए कुकी अब भारत सरकार को ब्लैकमेल कर रहे हैं।
दरअसल कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कुकी संगठन के अध्यक्ष ने दावा किया है कि उनके संगठन ने राम माधव और हिमंत बिस्वा सरमा के साथ एक समझौते के अनुसार 2017 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा उम्मीदवारों को जीतने में मदद की थी।
बेलगाम हो चुकी मणिपुर हिंसा के कारण लगभग 50 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं। कई गांव वीरान हैं। सूत्रों के अनुसार लगभग 20 से ज्यादा गांवों में दूसरे गुटों ने कब्जा कर लिया है। जहां मैतेई समुदाय का दबदबा है उन्होंने कुकी गांवों पर कब्जा कर लिया, जहां पर कुकी समुदाय का दबदबा है उन्होंने मैतेई गांवों पर कब्जा कर लिया। सभी घर भी कब्जे में ले लिए हैं।
कब्जा कायम रखने के लिए दोनों ही गुट लगभग 200 से ज्यादा बंकरों से निगरानी भी कर रहे हैं। इन बंकरों में अत्याधुनिक हथियारों से लैस लड़ाके नियमित चौकसी करते हैं।
बिष्णुपुर के ग्वंताबी, चेयरेल मंग्जिंग, फोउगक्चाओ इखाई अवांग लेकाई के पश्चिमी हिस्से और लेइगांग में कई जगह पर मैतेई लोगों के बंकर हैं। चूराचांदपुर जिले के कंग्वाई, मोल्होई, सोंग्दो, मोंग्या, चवुंग्फाई और फोल्जांग में कुकी लोगों के बंकर हैं। रविवार रात कुछ कुकी लोगों ने बिष्णुपुर के नपत और तंग्जेंग गांव पर कब्जा कर लिया।
दरअसल, सरकार ने फरवरी में चूराचांदपुर और नोने के जनजाति बहुल गांवों की जमीन को संरक्षित वन की श्रेणी में डाल दिया था। इसे लेकर हिंसा भी हुई थी। मणिपुर का क्षेत्रफल 22327 वर्ग किमी है। लगभग 32 लाख की आबादी वाले मणिपुर में 55% मैतेई और 35% कुकी-नगा हैं।
मैतेई के पास 10% और कुकी-नगा के पास 90% जमीनों का कब्जा है। राज्य सरकार कानून बदल कर कुकी-नगा कब्जे वाली जमीनों को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित कर रही है। उससे कुकी-नगा में जमीनें छिनने का खौफ है।
गांव के बंकरों में सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल
मैतेई और कुकी संगठनों राज्य के कुछ हिस्सों में मोबाइल टावरों को नुकसान पहुंचाने के मामले भी सामने आए हैं। बंकरों में कई हथियारबंद लड़ाके सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल करते हैं। इसी के जरिए अपने गुटों के साथ संपर्क में रहते हैं। मोबाइल नेटबंदी के कारण हिंसक गुटों के लिए सैटेलाइट फोन से संपर्क करने में आसानी भी रहती है। सूत्रों के अनुसार मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में हाल में बनाए गए कुछ बंकरों तक सुरक्षा एजेंसियों की पहुंच तक भी नहीं है।
मणिपुर हिंसा से जुड़े अपडेट्स…
- इंफाल वेस्ट जिले के एमएच लेइमाखोंग में सोमवार को फायरिंग में सेना का एक जवान घायल हो गया। भीड़ ने खमेन्लोक में एक चर्च, इंफाल और बिष्णुपुर में 100 से ज्यादा घरों को जला दिया।
- यरीपोक में रेडीमेड कपड़ाें से भरे एक ट्रक को फूंक डाला। इंफाल में डबल लेयर सिक्योरिटी लगाई गई है। इंफाल के बाहरी इलाकों में सीआरपीएफ और भीतरी इलाकों में पुलिस को तैनात है।
- मणिपुर के 30 विधायक, मंत्री और सांसद सोमवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से मिले। कुछ कुकी लोगों ने इंफाल के सेक्माई-फायेंग में गोलियां चलाईं। नेशनल हाईवे-2 पांचवें दिन भी बंद रहा।
36 घंटों में 249 चर्च नष्ट किए गए- आर्क बिशप
द पिलर की एक रिपोर्ट के अनुसार 3 मई से शुरू हुई हिंसा के बीच लगभग 249 चर्चों को नष्ट कर दिया गया है। इम्फाल के आर्कबिशप डोमिनिक लुमोन ने 15 जून को अपने साथी कैथोलिक बिशप को 11 पन्नों का लेटर लिखा था। जिसमें उन्होंने बताया कि राज्य में हो रही हिंसा एक धार्मिक संघर्ष है। हिंसा शुरू होने के 36 घंटों के अंदर ही 249 चर्चाें को नष्ट कर दिया गया था।
उन्होंने यह भी बताया कि इंटरनेट बैन और रिपोर्टिंग बैन के बीच मौजूदा स्थिति का आकलन करना मुश्किल है।