महाराष्ट्र के अहमदनगर में 4 जून को कुछ मुस्लिम युवकों ने उर्स के मेले में जुलूस के दौरान औरंगजेब के पोस्टर लहराते हुए डांस किया. इसके बाद कोल्हापुर में कुछ उपद्रवी युवकों ने अपने सोशल मीडिया स्टेटस में औरंगजेब की तस्वीर लगाई. हिंदू संगठनों को बात खल गई. कोल्हापुर बंद का आह्वान किया गया और बंद दुकानों पर पथराव किए गए. दो समुदाओं के बीच इस टकराव के बीच पुलिस को लाठी चार्ज करना पड़ा. 36 लोगों की गिरफ्तारियां हुईं. ऐसे में सूबे में राजनीती होना स्वभाविक है . इसमें बीजेपी से देवेंद्र फडणवीस और महाविकास आघाड़ी की ओर से शरद पवार के बयान आए उसके बाद अब इसमें एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी भी कूद पड़े है .
औरंगजेब को लेकर शुरू हुए बवाल के बाद महाराष्ट्र के कोल्हापुर में माहौल फिलहाल शांत है, लेकिन इस पर राजनीति बेकाबू हो गई है. इस मामले को लेकर पॉलिटिक्स शुरू हो चुकी है और एक दूसरे पर जमकर आरोप लगाए जा रहे हैं. महाअघाड़ी को बवाल के पीछे ध्रुवीकरण की सियासी साजिश नजर आ रही है, तो बीजेपी उन्हें आईना दिखा रही है. वहीं ओवैसी ने भी इस मामले को लेकर महाराष्ट्र की शिंदे सरकार पर जमकर हमला बोला है. इस मामले में पुलिस भी जांच में जुटी है और किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए तैयार है.
औरंगजेब को लेकर विवाद
दरअसल मामला 4 जून को शुरू हुआ, जब औरंगजेब की फोटो हाथों में लिए युवकों का वीडियो वायरल हुआ. जिसमें वो औरंगजेब की तारीफ करते दिख रहे हैं. इसके कुछ फोटो भी सामने आए. सोशल मीडिया पर तेजी से फोटो वायरल होने के बाद हिंदू संगठनों ने इसका विरोध शुरू किया और बंद बुलाया गया. इस दौरान हिंसा और खूब हंगामा हुआ. लोगों ने सड़कों पर जमकर उपद्रव किया और आगजनी भी हुई.
कोल्हापुर हिंसा को लेकर सियासत
अब कोल्हापुर पुलिस जांच में जुटी है कि शिवाजी की धरती पर औरंगजेब का नाम लेकर माहौल किसने बिगाड़ा. इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो रही है. हालांकि कोल्हापुर में नफरत के जो शोले सुलग रहे थे,वो अब शांत हैं. तनाव के बीच हालात काबू में हैं, लेकिन सियासत रुकने का नाम नहीं ले रही है. बयानों का पहला तीर संजय राउत ने छोड़ा, उद्धव गुट के नेता ने कह दिया कि जिन लोगों को बजरंग बली का सहारा नहीं मिला, वो लोग अब औरंगजेब के सहारे महाराष्ट्र के चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं.
हिंसा के पैटर्न पर भी सवाल
ताजा बवाल पर सियासी दलों के तेवर तल्ख हैं, क्योंकि उनका आरोप है कि इस तरह के हिंसा वाली टेंपलेट पर वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश हो रही है और ये एक पैटर्न सा बन गया है. 24 मार्च को भी कोल्हापुर में हिंसा हुई थी, इसके बाद 29 मार्च को संभाजीनगर, 30 मार्च को मुंबई, 3 अप्रैल को जलगांव, 13 मई को अकोला, 15 मई को अहमदनगर और अब फिर से 7 जून को कोल्हापुर में हिंसा हुई. कहीं रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान बवाल हुआ तो कहीं मंदिर में दूसरे धर्म के लोगों के घुसने पर हिंसा हुई. इसीलिए सवाल उठ रहा है कि ये हिंसा संयोग है या फिर प्रयोग?
कोल्हापुर हिंसा के बाद पुलिस ने सख्त पहरा लगा दिया है. पुलिस का कहना है कि अभी हालात शांत हैं. SRPF की चार कंपनी, 1000 पुलिस कांस्टेबल और 150 अधिकारी हिंसा वाली जगहों पर मौजूद हैं. किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के निर्देश दिए गए हैं.
महाराष्ट्र सरकार की तरफ से आया जवाब
इन सभी आरोपों के बीच बीजेपी का काउंटर अटैक सामने आया. महाराष्ट्र सरकार के मंत्री ने राउत और पवार की बातों का जवाब दिया और कांग्रेस को भी पुरानी घटनाओं की याद दिला दी. महाराष्ट्र सरकार के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा, “औरंगजेब के समर्थकों के लिए आशा की किरण संजय राउत हैं. कांग्रेस के राज में दंगे हुए, कांग्रेस के कार्यकाल में इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जान बचा नहीं पाए. तब इंटेलिजेंस फेलियर नहीं हुआ था?”
गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अचानक महाराष्ट्र के कुछ जिलों में औरंग्या (औरंगजेब) की इतनी औलादें कहां से आ गईं. इसकी तलाश शुरू है. छत्रपति शिवाजी महाराज के महाराष्ट्र में औरंगजेब का महिमामंडन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. शरद पवार ने जवाब में कहा कि पोस्टर अहमदनगर में लगाए गए तो पुणे-कोल्हापुर में बवाल क्यों? दो-चार लोगों ने कुछ गलत किया तो इतना भूचाल क्यों? सरकार का काम धार्मिक सौहार्द को बनाए रखना होता है. यहां सरकार ही धार्मिक तनाव बढ़ाने की कोशिशों में लगी है.
शोर में पता ही नहीं चल पा रहा माहौल कौन जहरीला बना रहा?
जवाब में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि शरद पवार सीमा से बाहर जा रहे हैं. एनसीपी की ओर से साजिश रच कर दंगों को हवा दी जा रही है. जब शरद पवार सत्ता से बाहर होते हैं, तभी दंगे क्यों भड़कते हैं? इस पर ठाकरे गुट के संजय राउत ने शरद पवार से सुर मिलाते हुए कह दिया कि कोल्हापुर में 60 फीसदी उपद्रवी बाहर से आए थे. वे बीजेपी की ओर से भेजे गए थे.
पिछला इतिहास बताता है कि दंगे कभी विपक्ष नहीं भड़काता है. बिहार से उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र से दिल्ली तक दंगे किसने भड़काए बताने की जरूरत नहीं. इस पर बीजेपी के प्रवीण दरेकर ने कहा कि संजय राउत गुप्तचार हैं क्या? अगर उन्हें इतना ही मालूम है कि दंगे भड़काने वाले कौन हैं तो पुलिस पूछताछ उनसे भी की जानी जरूरी है.
NCP-BJP की लड़ाई में कूद पड़ी कांग्रेस, जवाब भी आया स्ट्रेट
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले भी क्यों पीछे रहते. वो यह कह कर कूदे कि कानून व्यवस्था शिंदे-फडणवीस सरकार से नहीं संभल रही. इस्तीफा दो. बीजेपी के धनंजय महाडिक ने कोल्हापुर के कांग्रेस नेता सतेज पाटील के 30 मई का बयान याद दिला दिया, जिसमें उन्होंने कोल्हापुर में सांप्रदायिक तनाव भड़कने की आशंका जताई थी. इस आधार पर बीजेपी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसी ने दंगे की साजिश रची है.
AIMIM दंगे भड़काने के लिए BJP को बता रही जिम्मेदार
इस लड़ाई में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) से सांसद इम्तियाज जलील भी कूद पड़े. उन्होंने अहमदनगर और कोल्हापुर के ताजा उपद्रव के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहरा दिया और कहा कि पिछले 75 सालों में कोई औरंगजेब की तस्वीर नहीं पहचानता था, अचानक औरंगजेब इतना चर्चा में कैसे आ गया? यह बीजेपी का प्रायोजित कार्यक्रम है. कर्नाटक की हार के बाद बीजेपी सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के रास्ते सत्ता पाने की कोशिश में लग गई है.
निलेश राणे ने पवार को ‘औरंगजेब का पुनर्जन्म’ बताया
इन सबके बीच बीजेपी नेता निलेश राणे का एक ट्वीट चर्चा में आया. अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा कि जब चुनाव करीब आता है तभी शरद पवार को मुसलमानों की याद क्यों आती है? उनमें औरंगजेब का पुनर्जन्म दिखता है. वे इतने में ही नहीं रुके उन्होंने बयान दिया कि पवार कब हिंदुओं के लिए नहीं बोले. पवार की पॉलिटिकल ऑटोबायोग्राफी का जिक्र आया, जिसमें उन्होंने 1993 के मुंबई बम ब्लास्ट के वक्त 11 ब्लास्ट की बजाए 12 ब्लास्ट होने की बात रेडियो और टीवी में कही थी.
वे ब्लास्ट हिंदू मोहल्लों में हुए थे, लेकिन शरद पवार ने उन्हें मुस्लिम मोहल्लों में होने की बात कही थी, जो झूठ थी. वे खुद अपनी आत्मकथा में लिखते हैं कि जब श्रीकृष्ण आयोग ने उनसे इसकी वजह पूछी तो उन्होंने कहा कि ऐसा करने से उन्हें यह विश्वास था कि दंगों की रोकथाम में आसानी होगी.
इसी दौरान अब वंचित बहुजन आघाड़ी ने नागपुर दंगे को लेकर SIT की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग कर दी है. उनका कहना है कि यह रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने से सच बाहर आ जाएगा कि राज्य में दंगे कौन करवा रहा है? महाराष्ट्र में माहौल कौन बिगाड़ रहा है?







