ADVERTISEMENT
Saturday, August 1, 2026
No Result
View All Result
  • Login
  • Register
No Result
View All Result
UB INDIA NEWS
No Result
View All Result

हर्ष फायरिंग पर अब धारा 302 जरूरी ……..

UB India News by UB India News
June 7, 2023
in Lokshbha2024, अपराध, पटना, समाज
0
हर्ष फायरिंग पर  अब धारा 302 जरूरी ……..
  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link

बिहार और यूपी में हर्ष फायरिंग स्टेटस सिंबल बनता जा रहा है। शादी-जश्न में हथियार चलाने का शौक लोगों के लिए काल बनता जा रहा है लेकिन लोग हर्ष फायरिंग करने से बाज नहीं आ रहे हैं।

बिहार के जमुई जिले के मिरचा गांव में 29 मई की रात सोनम की शादी होने वाली थी. सोनम एक मुखिया की बेटी थी, मुखिया पिता ने बेटी की शादी के लिए तमाम तरह की तैयारियां की थी. दुल्हन के लिबास में सोनम अपने सबसे खूबसूरत दिन के सपने देख रही थी, लेकिन नशे में धुत एक व्यक्ति ने गोली चलाई. गोली सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे बीए प्रथम वर्ष के छात्र को लगी और मौके पर ही उसकी मौत हो गई. गोली सोनम को भी लगी और उसकी भी मौत हो गई.

RELATED POSTS

बांकीपुर उपचुनाव : कम मतदान, कौन परेशान………………..

बांकीपुर उपचुनाव परिणाम आखिर साबित क्या करेगा ?

वहीं कल रात ही आरा के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बारा-बसंतपुर गांव में मंगलवार की देर रात दरवाजे पर बरात लगने के दौरान हर्ष फायरिंग की गई। फायरिंग में छर्रा लगने से कैमरामैन समेत तीन लोग घायल हो गए। फायरिंग में बक्सर जिला के ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र के एकड़ार गांव निवासी लाल मोहर यादव के 27 साल का बेटा मुकेश कुमार यादव, बालक यादव के 42 साल का बेटा राजेंद्र यादव और मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बारा गांव निवासी लखन राय के 55 साल का बेटे वीर राय को छर्रा लग गया है।

विडंबना यह है कि सोनम अकेले बिहार में हर्ष फायरिंग का शिकार नहीं हुई. राज्य भर में शादी समारोहों में जश्न के दौरान गोलीबारी से इस साल अब तक बच्चों और महिलाओं सहित कम से कम 25 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हुए हैं.

यूपी-बिहार में शादी समारोहों के दौरान हर्ष फायरिंग के बढ़ते चलन के बीच लोगों के मरने का सिलसिला जारी है. ऐसी ही एक घटना शुक्रवार देर रात भोजपुर जिले के संदेश थाना क्षेत्र के चेता टोला गांव में हुई. यहां पर एक शादी समारोह में डांस देखने के दौरान हर्ष फायरिंग में 27 वर्षीय युवक को गोली लग गई. हादसे के बाद आनन-फानन में घायल को मौके से सदर अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टर ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. शव का पोस्टमार्टम सदर अस्पताल में कराया गया.

मृतक दिनेश कुमार को फायरिंग के दौरान सीने में गोली लगी थी. यहां शादी समारोह में आए लोगों ने फायरिंग के आरोपी युवक को पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई कर दी. घटना की सूचना मिलते ही संदेश थानाध्यक्ष अवधेश कुमार मौके पर पहुंचे और चंडी थाना क्षेत्र के रामपुर गांव निवासी आरोपी बबलू को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने मौके से एक कियोस्क भी बरामद किया है.

4 जून शुक्रवार को यूपी के मझगवां थाना क्षेत्र के नौरंगा गांव से भी हर्ष फायरिंग की घटना सामने आई. कुआं पूजन के दौरान हुई हर्ष फायरिंग में युवक और 6 वर्षीय पुत्र घायल हो गया. दोनों को निजी अस्पताल से मेडिकल कॉलेज झांसी रेफर कर दिया गया.

हर्ष फायरिंग में लगे धारा 302
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की एक अदालत ने आदेश दिया कि हर्ष फायरिंग के हर मामले की जांच की जाए, भले ही पुलिस में मामला दर्ज किया गया हो या नहीं. न्यायमूर्ति एसके सक्सेना ने चेतावनी देते हुए कहा, “इस प्रवृत्ति को बढ़ाने पर रोक लगाई जानी चाहिए. न्यायमूर्ति एसके सक्सेना ने कहा था कि आज भी कुछ परिवार अपने यहां होने वाली शादियों में बिना हथियार के जश्न मनाते हैं.

दूसरी तरफ भीड़ का बेकाबू होकर हथियारों का इस्तेमाल करने की घटनाओं ने बिहार पुलिस पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. अभी तक बिहार पुलिस ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है. इससे भी बुरी बात यह है कि ये घटनाएं पटना हाई कोर्ट के उस आदेश के बावजूद हुई हैं, जिसमें जश्न के दौरान गोलीबारी को रोकने को कहा गया था.

पिछले साल 23 जून को पटना हाई कोर्ट ने ये बताया था कि बिहार के 38 जिलों में से कम से कम 25 जिलों में हर्ष फायरिंग की वजह से मौत या घायल होने के मामले सामने आए. राज्य सरकार ने हाई कोर्ट में ऐसे 66 मामलों की एक लिस्ट भी पेश की.

शस्त्र (संशोधन) अधिनियम 2019 इस तरह की गोलीबारी पर रोक लगाता है

शस्त्र (संशोधन) अधिनियम 2019 के मुताबिक इस तरह की किसी भी गोलीबारी पर रोक लगाई गई है. कानून सार्वजनिक समारोहों, धार्मिक स्थलों, शादियों या किसी भी फंक्शन में गोला-बारूद या आग्नेयास्त्रों के इस्तेमाल को पूरी तरह रोकता है. इस कानून के तहत ऐसा करने वालों को दो साल तक की कैद या एक लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ता है.

फिर इस प्रथा पर रोक क्यों नहीं ?

प्रथा पर रोक लगाने के बाद भी हर्ष फायरिंग की घटनाओं का जारी रहना स्थानीय पुलिस पर सीधा सवाल करता है. स्थानीय पुलिस की लापरवाही की वजह से शादियों में बंदूक और गोलियां चलाई जाती है. पुलिस इस मामले पर उदासीनता का रवैया अपनाती है. शादियों में लोग गोली चला कर अपना रुतबा दिखाना चाहते हैं.

बंदूक रखना शक्ति का प्रतीक माना जाता है. खासतौर से छोटे शहरों में जहां पर भारी पितृसत्तात्मक सोच हावी है, ऐसी सभी जगहों पर बड़ी जाति के लोग (पुरुष) खुलेआम गन लेकर घूमते हैं.

मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक बंदूक रखने की इच्छा पुरुषों में आत्मविश्वास की कमी से उपजी है. बंदूक रखकर पुरुष सशक्त महसूस करते हैं .उन्हें लगता है कि चीजें उनके अधिकार या नियंत्रण में हैं.

बिहार पुलिस शादियों में गोलीबारियों को लेकर बेहद ही लापरवाही दिखाती है. डीजीपी राजविंदर सिंह भट्टी के नेतृत्व में इस दिशा में कोशिश भी की जा चुकी है, लेकिन इसके नतीजे निराश करने वाले ही मिले हैं. लोग लाइसेंसी गन का कानून होते हुए भी बिना लाइसेंस के गन रखते हैं, और धड़ल्ले से इस्तेमाल भी करते हैं.

बंदूकों के लिए लाइसेंस प्राप्त करना कितना आसान है?

भारत सरकार की आधिकारिक पुलिस वेबसाइट के मुताबिक हथियार लाइसेंस लेने के लिए वेबसाइट पर मौजूद एक आवेदन (फॉर्म ए) को भरना पड़ता है. इसे पांच रुपये की अदालत शुल्क मुहर के साथ जिला पुलिस कार्यालय में जमा करना होता है. फॉर्म के साथ राशन कार्ड की एक प्रति, आयकर रिटर्न के 3 साल के विवरण और दो चरित्र प्रमाण पत्र भी जमा करना होता है.

देश में स्पष्ट रूप से कड़े बंदूक स्वामित्व कानून हैं. सरकार तीन धाराओं के तहत लाइसेंस जारी करती है: फसल संरक्षण, आत्मरक्षा और खेल. हाल ही में पेश किए गए नए नियमों के अनुसार बंदूक खरीदते समय मालिक को बंदूक-प्रशिक्षण भी दिखाना पड़ता है. पूरी पूरी प्रक्रिया में कानूनी रूप से हफ्तों यहां तक कि महीने का वक्त लग जाता है. इसलिए कई लोगों ने अवैध रूप से बंदूक रख लेते हैं.

2014 में भारत के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने के मुताबिक गोली लगने से 3,655 मौतें हुई थीं. इनमें से केवल 14 प्रतिशत मौतों के लिए लाइसेंसी बंदूकों को जिम्मेदार ठहराया गया था. एनसीआरबी के अनुसार, 2015 में 85 प्रतिशत बंदूक बिना लाइसेंस के थे, जिससे अपराध किया गया.

तो क्या बंदूकें आसानी से बाजार में मिल जाती हैं?

2015 में इकोनॉमिक टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 12 जिलों में 25,000 से ज्यादा बंदूकें मिली थी. ये सभी अवैध रूप से जब्त की गई बंदूकें थी. रिपोर्ट के मुताबिक ‘दिल्ली के बाहरी इलाके में स्थित गाजियाबाद में गोली लगने से 2,716 मौतें ,जबकि मेरठ में 2,415 मौत के साथ दूसरे स्थान पर था. 2015 में छपी रिपोर्ट के मुताबिक अवैध विनिर्माण इकाइयों के मामले में एटा में सबसे ज्यादा 18, गाजियाबाद में 17 और शामली में 16 इकाइयों का भंडाफोड़ किया गया.

जश्न, आतिशबाजी और अब गोलीबारी…

देश की राजधानी दिल्ली में एक न्यायाधीश ने साल 2015 में अपने दोस्त की शादी के दौरान राइफल से गोली चलाने वाले एक व्यक्ति को 25 महीने जेल की सजा सुनाते हुए कहा, ‘बारात के दौरान बंदूकों और पिस्तौल से गोलीबारी करना एक तरह का फैशन बन गया है. न्यायाधीश मनोज जैन ने कहा, ‘अब समय आ गया है कि सरकार हथियार लाइसेंस देने की प्रक्रिया को कड़ा करे. सरकार इन लाइसेंस का दुरुपयोग न करने को लेकर भी एक मजबूत तंत्र विकसित करे’

जश्न मनाने के दौरान गोलीबारी एक तरह से मर्दानगी और स्टेटस का प्रदर्शन है. आतिशबाजी भी का एक विकल्प है, और यह उत्तर भारत तक ही सीमित नहीं है. यह अफगानिस्तान और मध्य पूर्व, बाल्कन और अन्य जगहों के कुछ हिस्सों में भी आम है. आमतौर पर बंदूकें हवा में दागी जाती हैं. हवा में चलाई गई गोलियां किसी को भी लग जाती है.

 

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
UB India News

UB India News

Related Posts

बांकीपुर उपचुनाव : कम मतदान, कौन परेशान………………..

बांकीपुर उपचुनाव : कम मतदान, कौन परेशान………………..

by UB India News
August 1, 2026
0

बांकीपुर को भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है यही कारण है कि वर्ष 1995 से लगातार BJP...

बांकीपुर उपचुनाव में मुकाबला बेहद दिलचस्प……………

बांकीपुर उपचुनाव परिणाम आखिर साबित क्या करेगा ?

by UB India News
August 1, 2026
0

बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी को 100 दिन से कुछ अधिक दिन हो गए हैं। बांकीपुर उपचुनाव...

राजद का बांकीपुर उपचुनाव नतीजों से पहले बड़ा दावा………….

राजद का बांकीपुर उपचुनाव नतीजों से पहले बड़ा दावा………….

by UB India News
August 1, 2026
0

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव और भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को...

उपेंद्र कुशवाहा की सियासी रणनीति कामयाब रही………………..

उपेंद्र कुशवाहा की सियासी रणनीति कामयाब रही………………..

by UB India News
August 1, 2026
0

उपेंद्र कुशवाहा का 'ऑपरेशन बेटा' सफल रहा।दिल्ली से पटना तक मंत्री बेटे दीपक के लिए उपेंद्र कुशवाहा ने ऐसी सियासी...

MLC देवेश कुमार ने कैसे दिया इस्तीफा ……………

MLC देवेश कुमार ने कैसे दिया इस्तीफा ……………

by UB India News
August 1, 2026
0

RLM (राष्ट्रीय लोक मोर्चा) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश बिहार सरकार में पंचायती राज विभाग के मंत्री...

Next Post
आज 23 फरवरी सन् 2023 का पंचांग

आज 7 जून का पंचांग

विपक्षी दलों की बैठक की नई तारीख का ऐलान , पटना में 23 जून को होगी विपक्षी दलों की बैठक

विपक्षी दलों की बैठक की नई तारीख का ऐलान , पटना में 23 जून को होगी विपक्षी दलों की बैठक

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • front
  • Home
Contect Us - ubindianews@gmail.com

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • front
  • Home

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Send this to a friend