ओडिशा के बालासोर जिले में बहनागा बाजार स्टेशन पर हुई दुर्घटना पर सियासी वार के बीच सीबीआई ने जांच शुरू कर दी। इस जांच पर सवाल उठा रहीं बंगाल सीएम ममता बनर्जी आज फिर ओडिशा में हैं। वहीं, बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी का आरोप है कि हादसे के पीछे ममता की टीएमसी का हाथ है। इस तरह गर्म सियासत के बीच कांग्रेस भी सीबीआई जांच और रेलमंत्री का इस्तीफा न होने पर सवाल खड़े कर रही है। दूसरी तरफ रेलवे सेफ्टी कमिश्नर भी जांच में लगे हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी भी आज सुबह मौके पर थे। सीबीआई ने मामला अपने हाथ में लेने के बाद केस दर्ज कर लिया है । उसकी 10 सदस्यीय टीम भी सुबह बालासोर पहुंच चुकी थी। सूत्रों के अनुसार, वहां जीआरपी द्वारा दर्ज केस के कागजात के अलावा रेलवे से भी कई तरह के कागजात भी ले लिए गए है । दुर्घटना स्थल का गहराई से मुआयना और जरूरत के हिसाब से कई बार जांच की जाएगी। संबद्ध कर्मियों के बयान लेकर जांच की दिशा तय की जाएगी। आपराधिक साजिश के एंगल और संबद्ध संभावित सबूतों को खासकर गौर से परखा जाएगा।
रेलवे सेफ्टी कमिश्नर और टीम भी वहां कल से फिर जांच में लगे हैं। एक सहायक स्टेशन मास्टर से कई घंटे पूछताछ के अलावा सिग्नलिंग सिस्टम और कंट्रोल रूम के सभी कोणों पर पूछताछ की गई है। मुआयना किया है। कोरामंडल एक्सप्रेस के चालक ने बयान दिया है कि उसकी गाड़ी को लूप लाइन में जाने का सिग्नल मिला था। हालांकि, लूप लाइन पर पहले से एक ट्रेन खड़ी थी। चालक का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है।
रेलवे का ‘छेड़छाड़’ पर जोर, CBI पता करेगी सच!
रेलवे के टॉप अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि हादसा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम से ‘जानबूझकर छेड़छाड़’ किए जाने के चलते हुआ। रेलवे की शुरुआती जांच में पाया गया है की बहनागा बाजार स्टेशन के केबिन में इंटरलॉकिंग सिस्टम के ‘लॉजिक’ से ‘मैनुअल छेड़छाड’ की गई थी। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि CBI इस ‘फूलप्रूफ सिस्टम’ से ऐसी छेड़छाड़ की वजह का पता लगाने में मदद करेगी। गोपनीयता की शर्त पर शीर्ष रेलवे अधिकारी कह रहे हैं कि बालासोर में ट्रिपल ट्रेन क्रैश की शुरुआती जांच में छेड़छाड़ के साफ सबूत मिले हैं। इसीलिए CBI जैसी प्रफेशनल एजेंसी ने जांच की जरूरत महसूस हुई।
मेन लाइन पर हरा सिग्नल था। सिग्नल आमतौर पर तब हरा होता है, जब सिग्नल के हरे होने के लिए आवश्यक सभी पूर्व-शर्तें सही होती हैं। यदि कोई भी पूर्व-शर्तें पूरी नहीं होती हैं, तो तकनीकी रूप से सिग्नल कभी भी हरा नहीं हो सकता है : रिंकेश रॉय, खुर्दा रोड डिवीजन के डीआरएम
ममता बनर्जी का कार्यक्रम आज कटक और भुवनेश्वर के अस्पतालों में जाने का सुबह बताया जा रहा था। वह घायलों से मिलने के अलावा पता लगवाने की कोशिश में हैं कि बंगाल के कितने मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है? ममता का आरोप है कि सरकार मौत के आंकड़े छिपा रही है। ओडिशा में भी उनके बयान पर आज नजरें लगी हैं। ममता के आरोपों पर बीजेपी ने जवाब में सुवेंदु अधिकारी को उतार दिया है।
सीबीआई जांच पर ममता के सवाल के जवाब में बीजेपी की तरफ से काफी कुछ कहा जा रहा है। यह भी कि ममता ने 2010 में बंगाल में हुई रेल दुर्घटना पर सीबीआई जांच की मांग की थी। तब सीबीआई जांच हुई भी थी। जांच में नक्सली तत्वों का हाथ बताया गया था। उस तरह की कोई साजिश बालासोर मामले में भी तो हो सकती है?
सीबीआई जांच मात्र सुर्खियों में रहने की कोशिश: कांग्रेस
कांग्रेस ने बालासोर ट्रेन दुर्घटना की जांच CBI से कराने की सिफारिश को चर्चा में बने रहने का प्रयास बताया। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, ‘रेलवे सुरक्षा आयुक्त द्वारा बालासोर ट्रेन दुर्घटना पर अपनी रिपोर्ट सौंपे जाने से पहले ही सीबीआई जांच की घोषणा की गई है। यह कुछ और नहीं बल्कि चर्चा में बने रहने का प्रयास है।
पटना-इंदौर एक्सप्रेस ट्रेन दुर्घटना, जिसमें 150 लोग की मौत की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपने के सरकार के फैसले का हवाला देते हुए जयराम रमेश ने कहा, 20 नवंबर, 2016 को इंदौर-पटना एक्सप्रेस कानपुर के पास पटरी से उतरी। 150 से अधिक लोगों की जान चली गई। 23 जनवरी, 2017 को तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर इस दुर्घटना की एनआईए जांच की मांग की। 24 फरवरी, 2017 को प्रधान मंत्री (नरेंद्र मोदी) कानपुर में कहते हैं ट्रेन दुर्घटना एक साजिश है। 21 अक्टूबर, 2018 को, समाचार पत्रों की रिपोर्ट है कि एनआईए ट्रेन के पटरी से उतरने के मामले में कोई चार्जशीट दाखिल नहीं करेगी। आज तक एनआईए की अंतिम रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक खबर नहीं है।







