विपक्षी दलों की 12 जून को पटना में होने वाली बैठक टल गई है। कारण राहुल गांधी का विदेश में रहना और मल्लिकार्जुन खरगे का उस दिन का इंगेजमेंट बताया गया है। अब अगली बैठक कब और कहां होगी, इसका ऐलान बाद में किया जाएगा। अभी तक इसकी आधिकारिक घोषणा तो नहीं हुई है, लेकिन भरोसेमंद सूत्र ने इसकी पुष्टि कर दी है।
बिहार की राजधानी पटना में 12 जून 2023 को होने वाली विपक्षी दलों की बैठक टल गई है. हालांकि, किसी भी प्रकार का बयान देने से जेडीयू खासकर बच रही है. जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा कि मीटिंग कैंसिल नहीं हुआ है बल्कि आगे बढ़ाई गई है. मीटिंग टलने के के पीछे ये जानकारी निकलकर सामने आ रही है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी 12 जून 2023 को होनेवाली बैठक में उपस्थित नहीं हो पाने को बताया जा रहा है. ऐसे में मुख्य विपक्षी दल यानि कांग्रेस से राय मशविरा करके इस बैठक को टाला गया है. अब ये बैठक 23 जून 2023 को होगी.
विपक्षी एकता को पहला झटका
सितंबर 2022 से ही विपक्षी एकता का हल्ला है। बीजेपी विपक्ष के इस एकता मिशन से थोड़ी हैरान-परेशान जरूर है, पर चिंतित नहीं। दांव-पेंच में भी बीजेपी किसी से पीछे नहीं। विपक्षी एकजुटता के संयोजन में बिहार के सीएम नीतीश कुमार पिछले आठ महीने से ही लगे हुए हैं। विपक्षी एकता के लिए वैसे दल ही अधिक उतावले दिखते रहे हैं, जिनके नेता केंद्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। बिहार में लालू यादव के बेटे-बेटियां और पत्नी के साथ आरजेडी के कई नेताओं पर सीबीआई-ईडी जैसी एजेंसियों की कड़ी नजर है। बंगाल में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के साथ-साथ उनकी पार्टी टीएमसी के कई नेता ईडी-सीबीआई की जांच के दायरे में हैं। दिल्ली में आम आदमी पार्टी के दो मंत्री जेल में हैं। झारखंड में हेमंत सोरेन से ईडी की पूछताछ कर चुका है।
बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर बिहार के सीएम नीतीश कुमार काफी पहले से सक्रिय हो चुके हैं. वह विपक्षी दलों को एकजुट करने का प्रयास लगातार कर रहे हैं. सीएम नीतीश कुमार अबतक कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (आप),और वाम दलों के अलावा कई क्षेत्रीय क्षत्रपों से बातचीत की पहल की है. नीतीश ने राहुल और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की सीएम एवं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी तथा एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार समेत तमाम विपक्षी दलों के साथ अलग-अलग बैठकें कर चुके हैं.
TMC को बुलाए जाने से कांग्रेस नाराज!
बेशक राहुल गांधी के लिए विपक्षी दलों की बैठक को टाला जा रहा है लेकिन कांग्रेस इस बात से नाराज है कि इसमें टीएमसी को क्यों बुलाया गया है? पश्चिम बंगाल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने एक कदम आगे बढ़ते हुए दावा किया कि 12 जून की बैठक का जो भी परिणाम हो, कांग्रेस पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का विरोध जारी रखेगी. उन्होंने कहा, पश्चिम बंगाल में हमारा आंदोलन भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ है और यह जारी रहेगा. तृणमूल कांग्रेस वास्तव में विपक्षी गठबंधन में दरार पैदा करने के लिए भाजपा का मोहरा है.
TMC पर कैसे करें विश्वास?
माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य सुजान चक्रवर्ती ने कहा कि हालांकि भाजपा के खिलाफ सभी विपक्षी ताकतों को एकजुट करने की यह एक अच्छी पहल है, लेकिन सवाल यह है कि क्या तृणमूल कांग्रेस पर विश्वास किया जा सकता है. उन्होंने कहा, तृणमूल कांग्रेस ने अप्रत्यक्ष रूप से भारत के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों में भाजपा की मदद की. संकट के समय में, तृणमूल कांग्रेस ने हमेशा प्रधानमंत्री मोदी को गुप्त रूप से समर्थन दिया है. माकपा के राज्यसभा सदस्य और कलकत्ता हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बिकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि एक महागठबंधन की जरूरत है और केवल उन राजनीतिक ताकतों को इसमें शामिल किया जाना चाहिए जो भाजपा का विरोध करे.
उन्होंने कहा, बीजेपी हमेशा विपक्षी मोर्चे को भीतर से खत्म करने की कोशिश करेगी. ऐसे में तृणमूल कांग्रेस को शामिल करना एक अच्छा कदम नहीं होगा. बल्कि, पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चा और कांग्रेस के बीच आपसी समझ के मॉडल का राष्ट्रीय स्तर पर पालन किया जाना चाहिए.
19 मई को बैठक होने वाली थी
पहले यह बैठक 19 मई को होने वाली थी। लेकिन, कर्नाटक विधानसभा चुनाव और वहां कांग्रेस की सरकार बनने के बाद शपथ ग्रहण समारोह को लेकर विपक्षी एकता की बैठक को टाल दिया गया था। इसके बाद मई के अंतिम सप्ताह में इस बैठक को करना था वह भी बैठक नहीं हो पायी। फिर नहीं तारीख 12 जून को दी गई। इस तारीख को लेकर सभी दलों ने सहमति भी जताई।
ममता बनर्जी ने वीडियो जारी करते हुए पटना में आने और बैठक में शामिल होने का बयान भी दिया। ममता बनर्जी ने कहा कि पटना में होने वाली विपक्ष की एकता की बैठक से हिंदी बेल्ट में बेहतर असर होगा। लेकिन ऐन मौके पर एक सप्ताह पहले इस बैठक को फिर से टाल दिया गया है। अब यह बैठक 23 जून को आयोजित की जाएगी।
पटना में होने वाली थी बैठक
बैठक की जगह को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। यह बैठक अब तक पटना में होने की बात कही जा रही थी। लेकिन, जो सूत्र बता रहे हैं उसमें 1-2 और जगह पर विचार किया जा रहा है। संभवत यह पटना में बैठक नहीं होकर किसी दूसरे राज्य में बैठक होगी। सूत्र बता रहे हैं कि सभी पार्टियों राय ली जा रही है यदि सभी पटना पर सहमत हो गए तो 23 तारीख की बैठक पटना में होगी नहीं तो इस बैठक को शिमला शिफ्ट किया जा सकता है।







