नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश नारायण सिंह के शामिल होने के बाद सियासी विवाद गहराता जा रहा है। हरिवंश नारायण सिंह जदयू कोटे से राज्यसभा सांसद हैं। उन्हें 2018 में पहली बार NDA की तरफ से राज्यसभा का उप सभापति बनाया। 2020 में उन्हें दोबारा राज्यसभा का उप सभापति बनाया गया। उप सभापति का पद संवैधानिक है। इससे हरिवंश नारायण सिंह उद्घाटन समारोह में पहुंचे। उन्होंने संसद भवन की तारीख की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले हरिवंश से ही भाषण शुरू करवाया था। अब जदयू ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है तो भाजपा बचाव कर रही है। भाजपा ने कहा कि यह अभी झांकी है। आगे देखिए बहुत कुछ बाकी है। भाजपा ने दावा किया है कि सिर्फ हरिवंश ही नहीं, कई जदयू के बड़े नेता संपर्क में हैं। समय आने पर वह भाजपा में शामिल होंगे।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता मनोज शर्मा ने कहा कि जदयू में जो लोग मुख्यधारा की राजनीति करना चाहते हैं, वह सभी भाजपा के संपर्क में हैं। हरिवंश जी पहले ऐसे नेता नहीं हैं, जो भाजपा की विचारधारा से प्रभावित हुए हों। इनसे पहले जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह भाजपा में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा ने जदयू से अपना नाता तोड़ लिया है। मोनाजिर हसन भी पार्टी से अपने आप को अलग करने लगे हैं। जदयू की लड़ाई जदयू के नेताओं से है। उनकी लड़ाई भाजपा और अन्य दलों से नहीं है।
भाजपा के दावे के बाद जदयू चिंता में है कि अपने बड़े नेताओं को कैसे बचाया जाए। पिछले दिनों राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी पदाधिकारियों की घोषणा की गई तो उसमें केसी त्यागी का नाम नहीं था। केसी त्यागी के बारे में चर्चा तेज थी कि वह जदयू को अलविदा कहेंगे। उससे पहले जेडीयू ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता और पार्टी का सलाहकार बना दिया। सामाजवादी आंदोलन से जुड़े केसी त्यागी जेडीयू और नीतीश कुमार के लिए अहम माने जाते हैं।
केसी त्यागी लोकसभा चुनाव 2024 के लिए दिल्ली की सियासत में माहौल बनाने और विपक्ष के नेताओं के साथ जेडीयू का तालमेल बनाने में मुख्य भूमिका निभा सकते हैं। इसीलिए उनकी वापसी कराई गई है।
जेडीयू उन तमाम नेताओं पर हमलावर है, जो जेडीयू में रहकर बीजेपी के संपर्क में है। जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार बारी-बारी से उन सभी नेताओं को कोस रहे हैं। हालांकि, विधिवत तरीके से अभी आरसीपी सिंह ही बीजेपी में शामिल हुए हैं। उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पार्टी बनाकर बीजेपी का साथ देना शुरू कर दिया है। वहीं बिना किसी पार्टी में रहे राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश नारायण सिंह बीजेपी के नक्शे कदम पर चल रहे हैं।
जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार कहते हैं एक कलम के सिपाही ने अपना जमीर बेच दिया है। जेपी की धरती सिताबदियारा में जन्मे हरिवंश नारायण सिंह को अब जेपी का नाम नहीं लेना चाहिए। पहले वह लोहिया, जेपी, महात्मा गांधी के नाम पर जेडीयू में प्रशिक्षण देते थे। लेकिन, पद की लालसा में उन्होंने सब कुछ बर्बाद कर लिया।







