कर्नाटक के मामले में ये कहना मुश्किल है कि एग्ज़िट पोल कितने सही साबित होंगे. जब किसी चुनाव में कांटे की टक्कर होती है, तो, किसी के लिए भी अंदाज़ा लगाना मुश्किल होता है. 2018 में भी कर्नाटक में कांटे की टक्कर थी, किसी को बहुमत नहीं मिला था और सारे ओपिनियन पोल ग़लत साबित हुए थे. इस बार भी ऐसा हो, तो हैरानी नहीं होनी चाहिए. हालांकि, इस बार के चुनाव में कुछ बातें नई हैं. एक तो पहले जेडी(एस) बड़ा फैक्टर होती थी, मुकाबले त्रिकोणीय होते थे, इस बार वो इतना बड़ा फैक्टर नहीं है. इस बार ज़्यादातर सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस की टक्कर है.पिछली बार के मुक़ाबले, कांग्रेस में इस बार बदलाव दिखाई दिया. इस चुनाव में कांग्रेस ने अपने नेताओं की आपसी लड़ाई को ठीक से मैनेज किया. लेकिन, बीजेपी इस बार अपने नेताओं को मैनेज नहीं कर पाई.. उसकी लड़ाई खुलकर सामने आई.. दूसरी बात, कांग्रेस का नज़रिया पहले ही दिन से साफ था कि स्थानीय मुद्दों पर चुनाव लड़ना है. कांग्रेस में, शुरुआती दौर में कोई भ्रम नहीं था. लेकिन, बाद के दौर में बीजेपी ने बाज़ी पलटी. जैसे ही कांग्रेस ने PFI और बजरंग दल को एक ही तराजू में तोलने की ग़लती की, चुनाव में बजरंग बली की एंट्री हुई और कांग्रेस बुरी तरह कनफ्यूज़ हुई. चुनाव का मुख्य मुद्दा बदल गया.
कांग्रेस की दूसरी बड़ी समस्य़ा ये है कि उसके पास न तो नरेंद्र मोदी जैसा कैंपेनर है, न उनके जैसा करिश्मा. जब मोदी चुनाव प्रचार में उतरते हैं, तो रैली करें या रोड शो, वह हवा बदल देते हैं. मोदी ने इस चुनाव में भी जी-तोड़ मेहनत की, लेकिन कांग्रेस के मुख्य कैंपेनर राहुल गांधी, अनिच्छुक नज़र आए. इसीलिए कोई नहीं कह सकता कि ऊंट किस करवट बैठेगा. 13 मई का इंतजार करें .शनिवार को सुबह 6 बजे से आप इंडिया टीवी पर कर्नाटक चुनाव के शुरुआती रूझान और नतीजे देख सकते हैं. इंडिया टीवी के सभी रिपोर्टर ग्राउंड से आप तक रिपोर्ट पहुंचाएंगे. जाने-माने एक्सपर्ट हमारे साथ होंगे. 224 सीटों के पल-पल का हाल आप तक पहुंचे, इसके लिए हमने विशेष इंतजाम किये हैं. 13 मई नतीजे का दिन है.







