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खुद को दुनिया का ठेकेदार समझना बंद करें पश्चिमी देश……….

UB India News by UB India News
April 5, 2023
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खुद को दुनिया का ठेकेदार समझना बंद करें पश्चिमी देश……….
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पश्चिमी देशों को लगता है दुनिया उनके चारों तरफ घूमती है। अपने ‘फर्स्ट वर्ल्ड’ और भारत जैसे देशों के लिए ‘थर्ड वर्ल्‍ड’ जैसे टर्म यूज करने वालों में पता नहीं किस बात का दंभ भरा है। यहां कुछ होता है तो फट से पश्चिमी देशों का बयान आ जाता है कि ‘हम हालात पर नजर बनाए हुए हैं।’ अरे क्‍यों भाई? हमारा मसला है, हम सुलझा लेंगे। आप अपना देखिए न! देश में मानवता के लिए कोई संकट तो आ नहीं गया है तो बाकी दुनिया से मदद की जरूरत पड़े। मुख्य विपक्षी दल के बड़े नेता को सजा क्या हुई, अमेरिका और जर्मनी कूद पड़े। कांग्रेस को लगा कि राहुल गांधी को विदेश से सपोर्ट मिल रहा है तो उन्होंने लपक लिया। भूल गए कि दूसरे मुल्कों को अपने देश के मामलों में दखल देने का क्या नतीजा होता है। अफगानिस्तान, इराक, सीरिया, पाकिस्तान, श्रीलंका… उदाहरण भरे पड़े हैं। राहुल के मसले पर किसी दूसरे देश का बयान बचकाना है। ऐसा करके राहुल का पक्ष नहीं मजबूत किया जा रहा, बल्कि उन्हें अपने ही देश में विलन बनाकर पेश करने का मौका बीजेपी को मिल गया है।

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राहुल पर विदेश से क्‍या प्रतिक्रिया आई?
पिछले दिनों एक प्रेस ब्रीफिंग में जर्मनी के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘हमने भारत में राहुल गांधी के खिलाफ फैसले का संज्ञान लिया है। राहुल फैसले को चुनौती दे सकते हैं। तब साफ होगा कि क्या यह फैसला टिक पाएगा, क्या निलंबन का कोई आधार है? जर्मनी को उम्मीद है कि न्यायिक स्वतंत्रता के मानक राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई पर लागू होंगे।’ इससे पहले, अमेरिका ने कहा था कि वह राहुल गांधी के अदालती मामले पर नजर रख रहा है। विदेश विभाग के उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘कानून के शासन और न्यायिक स्वतंत्रता का सम्मान किसी भी लोकतंत्र की आधारशिला है। हम भारतीय अदालतों में गांधी के मामले को देख रहे हैं। हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सहित लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता पर भारत सरकार के साथ संपर्क में हैं। अपने भारतीय सहयोगियों के साथ हमारी बातचीत में हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सहित लोकतांत्रिक सिद्धांतों और मानवाधिकारों के संरक्षण के महत्व को रेखांकित करना जारी रखेंगे।’

खुद को दुनिया का ठेकेदार समझना बंद करें पश्चिमी देश
अमेरिका और जर्मनी का कहना कि वे मामले पर नजर बनाए हुए हैं, का कोई मतलब समझ में नहीं आता। हर देश बाकी देशों पर नजर रखता है। इसी वास्ते राजदूत, डिप्लोमेटिक मिशन और सम्‍मेलन-सेमिनार वगैरह आयोजित किए जाते हैं। ‘सॉफ्ट पावर’ के जरिए ‘सुपरपावर’ की सीढ़ियां चढ़ी जाती हैं। ऐसे में किसी देश का यह कहना कि वजह ‘नजर’ रखे है, बचकाना बयान लगता है। इस लिहाज से तो हमारा विदेश मंत्रालय भी बयान दे सकता है कि अमेरिका में पूर्व राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के साथ क्‍या हो रहा है, उसपर भारत की नजर है! तब अमेरिकी सरकार को कैसा लगेगा? अमेरिका और जर्मनी को इतनी ही चिंता है तो पहले ऐसे मामलों में जब सजा हुई, तब क्‍यों नहीं बोले।

पश्चिमी देशों को खुद को सुपीरियर समझना छोड़ना होगा। चंद ताकतवर देश पूरी दुनिया के ठेकेदार नहीं हो सकते। ऊपर से यह कोई ‘नजर रखने’ वाली बात है? राहुल गांधी जो भी हों, कानून से ऊपर तो नहीं हैं। एक कोर्ट ने उन्हें सुनवाई के बाद सजा सुनाई है। नियमानुसार संसद की सदस्यता चली गई। राहुल के बाद अपील का विकल्‍प है लेकिन अब तक उन्होंने ऐसा नहीं किया। उल्‍टे कांग्रेस पार्टी ने सत्ताधारी बीजेपी पर बदले की राजनीति का आरोप लगाते हुए आंदोलन शुरू कर दिया है। राहुल खुद को विक्टिम दिखा रहे हैं और उनकी पार्टी के नेताओं को लगा कि विदेश से समर्थन मिला तो पक्ष मजबूत होगा, अफसोस ऐसा हुआ नहीं।

विदेशी बयानों से बीजेपी को मिला मौका
इन बयानों के बाद कांग्रेस-बीजेपी ने एक दूसरे पर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस ने जर्मनी को उसके बयान के लिए शुक्रिया कहा तो बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस भारत के अंदरूनी मामलों में दखल देने के लिए विदेशी शक्तियों को आमंत्रित कर रही है। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने जर्मनी के विदेश मंत्रालय का आभार जताते हुए ट्वीट किया, राहुल गांधी को परेशान करके भारत में लोकतंत्र से समझौता किया जा रहा है। इसका संज्ञान लेने के लिए जर्मनी का शुक्रिया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा, भारत के अंदरूनी मामलों में दखल के लिए विदेशी शक्तियों को आमंत्रित करने की खातिर राहुल गांधी का आभार। याद रखें, भारतीय न्यायपालिका विदेशी दखल से प्रभावित नहीं हो सकती। भारत अब और विदेशी दखल को सहन नहीं करेगा।

अमेरिका और जर्मनी से लोकतंत्र के सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं। वे न तो भारतीय जनमानस को समझते हैं, न यहां की सियासत को। सिर्फ इसलिए कि राहुल गांधी विपक्ष के प्रमुख नेता हैं और इतने बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं, दूसरे देशों को भारत के मामलों में टांग अड़ाने की कहां से जरूरत आ गई? राहुल को स्‍पेशल स्‍टेटस तो नहीं मिल सकता। वे कानून से ऊपर नहीं हैं। इसलिए बेहतर होगा कि अमेरिका हो या जर्मनी या कोई और देश, अपना घर संभाले। भारत अपने अंदरूनी मसले खुद सुलझा लेगा।

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