हमेशा देखने में आता है कि सोशल मीडि़या के बड़े़ खिलाड़़ी ज्यादा लापरवाही से पेश आते हैं। कई बार तो उनकी लापरवाही अक्षम्य सी लगती है। ताजा मसला व्हाट्सएप का है जिसके दुनिया भर में करीब 2 अरब सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। विश्व की विशालतम कंपनी में शुमार व्हाट्सएप ने भारत के संदर्भ में एक बड़़ी लापरवाही की है। कंपनी ने नये साल के जश्न में एक लाइव–स्ट्रीमिंग लिंक साझा किया‚ जिसमें भारत के नक्शे में जम्मू और कश्मीर की गलत स्थिति दिखाई गई थी। दरअसल‚ ऐसा कृत्य लापरवाही से ज्यादा धृष्टता का है। यह स्थिति तब है जब केंद्रीय आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने हाल ही में देश में सभी सोशल मीडि़या प्लेटफार्म–व्हाट्सऐप‚ फेसबुक‚ ट्विटर‚ इंस्टाग्राम आदि–के लिए कानून‚ नियमों और सुरक्षा के अनुपालन की बात की थी। तो हमें मान लेना चाहिए कि सोशल मीडि़या प्लेटफार्म्स भारत के प्रति दकियानूसी या दोयम दर्जे की सोच रखते हैं। ऐसा कहने के पीछे ठोस तर्क हैं। भारत की संप्रभुता से खिलवाड़़ करने का दूरअसल‚ यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी ट्विटर ने अपने नक्शे में लद्दाख कोे चीन का हिस्सा बताया था। विकीपीडि़या ने भी अपने नक्शे में जम्मू–कश्मीर को गलत तरीके से दर्शाया था। वीडि़यो कॉलिंग एप ‘जूम’ ने भी पिछले इसी तरह की धृष्टता की थी। जूम के संस्थापक और सीईओ एरिक युआन को अपने ट्विट के जरिए गलत संदेश भेजने के चलते भारत ने ड़ांट पिलाई थी। कहना होगा कि ‘गलतियों’ का यह एक सिलसिला सा है।
ये जितनी भी कंपनियां हैं‚ वो भारत में कारोबार करती हैं और ढेर सारा माल–असबाब अपनी तिजोरी में इकट्ठा करती हैं‚ मगर कारोबार हमेशा दो तरफा किए जाते हैं। इसमें उन बातों का खास ख्याल रखा जाता है कि जिस मुल्क में व्यापार किया जा रहा है‚ वहां की भावनाओं के खिलाफ जाना अपराध होता है। हर बार अपमान कर या भ्रम फैलाकर पतली गली से निकल जाना इनकी फितरत रही है। लिहाजा‚ इनकी मनमानी पर सख्ती की जरूरत है। अनर्थ करने के बाद माफी मांग लेने भर से इनके पाप नहीं धुल सकते। सरकार को इन्हें ‘सीधा’ करने के लिए अपनी उंगली ‘टेढ़ी’ करनी चाहिए। बार–बार की गलती; गलती नहीं होती है‚ इसे हमें समझना चाहिए।







