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चीन में हालात बेकाबू, पर भारत के लिए खतरा नहीं है कोविड

UB India News by UB India News
December 24, 2022
in स्वास्थ
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चीन में हालात बेकाबू, पर भारत के लिए खतरा नहीं है कोविड
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चीन में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच भारत में भी बेचैनी फैल रही है। सरकार भी हर स्तर पर कोरोना के संभावित खतरे से निपटने के लिए हर स्तर पर मोर्चाबंदी कर रही है। इसी बीच IIT कानपुर का कहना है कि कोरोना से भारत के लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि भारत की 98 प्रतिशत आबादी कोरोना के खिलाफ प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता ​हासिल कर चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार IIT कानपुर के प्रोफेसर मणींद्र अग्रवाल ने कहा कि हो सकता है कि कुछ लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो और हल्की लहर आ जाए। इसके अलावा कोई बात नहीं होगी। क्रिसमस और न्यू ईयर की पार्टियां चलती रहनी चाहिए। चीन में संक्रमण के 500 मामलों पर सिर्फ एक मामला सामने आ रहा है।

बूस्टर शॉट या बचाव की जरूरत नहीं

प्रोफेसर अग्रवाल ने दावा किया कि भारत में चिंता की कोई बात नहीं है। फिलहाल न तो वैक्सीन के बूस्टर शॉट की जरूरत है और न ही नए साल की पार्टियों, शादियों पर रोक लगाने की। टीके केवल अल्पकालिक सुरक्षा देते हैं। भारत को इसकी जरूरत भी नहीं है।

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चीन में सिर्फ 20 फीसदी तक रोग प्रतिरोधक क्षमता

प्रोफेसर अग्रवाल ने अपने गणितीय मॉडल के आधार पर दावा किया कि अक्टूबर के अंत तक चीन में सिर्फ 5 फीसदी आबादी में प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता थी। नवंबर में यह बढ़कर 20 फीसदी हो गया। नवंबर के बाद से चीन में संक्रमण तेजी से बढ़ा। चीनी सरकार संक्रमण के 500 से ज्यादा मामलों में केवल एक मामले की रिपोर्ट कर रही है। इस वजह से चीन से प्रतिदिन आने वाले नए मामलों की संख्या काफी कम है।

पहले से ही तय था वायरस का फैलाव’

प्रोफेसर के मुताबिक अभी भी चीन की 30 फीसदी आबादी इस वायरस की पहुंच से दूर है। इसका मतलब यह है कि आगे खतरा कम नहीं है। बल्कि मतलब आगे खतरा और बढ़ने वाला है। ओमिक्रॉन का वेरिएंट पूरी आबादी में फैल जाएगा। नए मामले और बढ़ेंगे। यह तब तक जारी रहेगा जब तक 90 फीसदी आबादी संक्रमित नहीं हो जाती। सीरो-सर्वे के जरिए कोविड के प्रसार को समझा जा सकता है। चीन का ऐसा कोई सर्वे उपलब्ध नहीं है। ओमिक्रॉन परिवार के वायरस टीके से प्राप्त प्रतिरक्षा को अलग करते हैं। ऐसे में चीन सरकार के जीरो कोविड नीति से हटने के बाद वायरस का फैलाव पहले से ही तय था।

हर देश में ग्रोथ की अलग-अलग वजह

प्रोफेसर अग्रवाल ने कहा कि दुनिया के जिन देशों ने नेचुरल इम्युनिटी हासिल कर ली है, उन्हें कोई खतरा नहीं है। ब्राजील में मामलों में वृद्धि ओमिक्रॉन के एक नए, अधिक विषाणुजनित म्यूटेंट के प्रसार के कारण है। इसके अलावा आबादी का एक हिस्सा प्रतिरक्षा खो देता है। दक्षिण कोरिया में 25 फीसदी, जापान में 40 फीसदी और अमेरिका में 20 फीसदी आबादी प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता हासिल नहीं कर पाई है।

चीन में कोरोना के प्रकोप को देखते हुए भारत पर भी महामारी का खतरा मंडराने लगा है, लेकिन घबराने की कोई बात नहीं है। हालात को देखते हुए हर स्तर पर अत्यधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। गुरुवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने संसद को बताया कि आने वाले त्योहारों और नए साल के जश्न को देखते हुए राज्य सरकारों से कहा गया है कि वे सतर्कता बरतें और लोगों में कोरोना को लेकर जागरूकता फैलाएं।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य सरकारों को निर्देश दिया गया है कि वे लोगों को कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन करने के लिए कहें – इसमें मास्क का इस्तेमाल, हाथों को धोने और शारीरिक दूरी का पालन करने जैसे उपाय शामिल हैं। मंत्री ने कहा कि भारत में हर दिन औसतन 153 नए मामले सामने आ रहे हैं, जबकि दुनिया भर में रोजाना 5.87 लाख मामले देखने के मिल रहे हैं। हालांकि उन्होंने आगाह किया कि कोरोना वायरस के वेरियंट के  लगातार बदलते रहने से विश्व भर में स्वास्थ्य के लिए कुछ ऐसे खतरे पैदा हो रहे हैं जिनके ज़द में दुनिया के लगभग हर देश आ सकते हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य सरकारों को सलाह दी गई है कि संक्रमण के मामलों की संख्या न बढे, इसके लिए वे सर्विलान्स पर ध्यान दें और नियंत्रण एवं रोकथाम के उपाय करें। मंत्री ने  कहा कि राज्य यह सुनिश्चित करें कि पर्याप्त संख्या में लोगों को कोविड-19 के टीके लग जाएं। उन्होंने कहा कि कई देशों में कोविड  के मामलों में वृद्धि को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर विदेश से आने वाले यात्रियों में से 2 प्रतिशत लोगों की रैंडम सैम्पलिंग की प्रक्रिया शुरू हो गयी है।

भारत में अब तक पाए गए नए BF.7 वैरिएंट के 4 मामलों में से 2 गुजरात में और एक ओडिशा में हैं। ये सभी मरीज अस्पताल में भर्ती हुए बिना ही ठीक हो गए हैं। सभी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने की सलाह दी जा रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी तरह की लापरवाही से महामारी का प्रकोप फैल सकता है। फिलहाल भारत में कोरोना के सिर्फ 3,408 ऐक्टिव मामले हैं। यह संख्या भले ही भयावह न हो, लेकिन केंद्र ने साफ कर दिया है कि महामारी के फिर से सिर उठाने का खतरा अभी टला नहीं है।

कोरोना महामारी चीन, अमेरिका, जापान, फ्रांस, ब्राजील, साउथ कोरिया और जर्मनी में तेजी से फैल रही है। दुनिया भर में इस समय कोरोना के 2.43 करोड़ सक्रिय मामले हैं। इनमें से भारत में केवल 3,408 ऐक्टिव केसेज हैं, लेकिन हमें लापरवाह नहीं हो जाना चाहिए। BF.7 एक नया वेरिएंट है जो कि BF.5 का सब-वेरिएंट है, लेकिन BF. 7 वैरिएंट में वायरस की ट्रांसमिशन रेट बहुत ज्यादा है यानी ये तेजी से फैलता है। इसका इनक्यूबेशन पीरियड भी काफी कम है जिससे मरीजों की संख्या में दोगुनी और चौगुनी की बढ़ोत्तरी बहुत तेजी से होती है। चिंता की बात यह है कि यह वैरिएंट पहले ही अमेरिका, ब्रिटेन, बेल्जियम, जर्मनी, फ्रांस और डेनमार्क पहुंच चुका है।

मैं एक बार फिर कह रहा हूं कि अतिरिक्त सावधानी समय की मांग है। सर्दियों में, भारत में ज्यादातर लोग सर्दी, खांसी और बुखार से पीड़ित होते हैं, और चूंकि ये कोविड के शुरुआती लक्षण माने जाते हैं, इसलिए तुरंत RT-PCR टेस्ट करवा लेना चाहिए। वायरस का जल्द पता लगने से इलाज में आसानी होती है। एम्स के पूर्व निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है, लेकिन एहतियात जरूरी है, खासकर बुजुर्ग लोगों में। उन्होंने कहा कि भारत की स्थिति चीन से बहुत अलग है, और ‘अंडर-प्रिपेयर्ड’ होने के बजाय ‘ओवर-प्रिपेयर्ड’ रहना बेहतर है।

हमें एक्सपर्ट्स की बात ध्यान से सुननी चाहिए। आमतौर पर लोग कोविड के प्रति लापरवाह हो गए हैं और काफी लोगों ने भीड़-भाड़ वाली जगहों पर भी मास्क पहनना बंद कर दिया है। सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, और जिन्हें सर्दी, खांसी और बुखार जैसी बीमारियां हैं, वे कोविड टेस्ट नहीं करवा रहे हैं। ये सभी गलतियां हमें महंगी पड़ सकती हैं। भारत में इस समय 3,408 ऐक्टिव केसेज हैं, जिनमें से 82 प्रतिशत मामले महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल में हैं।

ज्यादातर लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि चीन में कोरोना अचानक हजारों लोगों की मौत का कारण कैसे बन गया?

एक्सपर्ट इसके दो बड़े कारण बता रहे हैं: पहला, चीन ने ‘ज़ीरो कोविड’ पॉलिसी का पालन किया। अगर कोई भी कोरोना से संक्रमित पाया जाता उसे आइसोलेट करके नजरबंद कर दिया जाता। इसका नतीजा यह हुआ कि लोगों में ‘हर्ड इम्युनिटी’ विकसित नहीं हो पाई, और वायरस के वैरिएंट्स से ज्यादातर आबादी अछूती रही। अब जब नया वैरिएंट आया, तो संक्रमण का विस्फोट हो गया।

दूसरी वजह यह रही कि चीन ने दूसरे देशों से आगे रहने के चक्कर में सिनोवैक वैक्सीन बनाने का दावा कर दिया। चीन के लोगों को सिर्फ चीन में बनी इस वैक्सीन को लगाने का आदेश दिया और दूसरे देशों की वैक्सीन पर पाबंदी लगा दी। लेकिन चीन की वैक्सीन बेअसर रही और अब इसका नतीजा सबके सामने है। हांगकांग में एक मेडिकल एक्सपर्ट ने कहा, ‘सभी लोग जानते थे कि चीनी टीका ज्यादा असरदार नहीं है। चीन में लोग चीनी टीके से पैदा हुई मामूली इम्युनिटी के भरोसे चल रहे थे।’

जब अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देश कोरोना की दूसरी लहर से बेहाल थे, तो चीन रोज अपने मरीजों की कम संख्या दिखाकर यह दावा करता था कि उसकी ‘जीरो कोविड’ पॉलिसी सफल और असरदार है। लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि चीन की कॉमर्शियल कैपिटल शंघाई, इंडस्ट्रियल सिटी चोंगचिंग और मैन्यूफैक्चरिंग हब झेजियांग में एसिम्टोमैटिक और हल्के-फुल्के लक्षणों वाले कोरोना पॉजिटिव मरीजों को भी काम पर आने का फरमान जारी किया गया है। चीन में पहले जरा-सा शक होने पर भी RT-PCR टेस्ट होता था, लेकिन उसके बाद नई कोविड पॉलिसी में RT-PCR टेस्ट ही नहीं हो रहा था।

इसका नतीजा अब सबके सामने हैं। एक जाने-माने एक्सपर्ट ने कहा है कि चीन की कम से कम 60 फीसदी आबादी यानी 80 करोड़ लोग अगले कुछ महीनों में इस वायरस से संक्रमित हो सकते हैं। एक अन्य एक्सपर्ट ने दावा किया कि इस महामारी से मरने वालों की संख्या 10 लाख तक का आंकड़ा छू सकती है।

अस्पतालों और मुर्दाघरों में लाशों का अंबार लगा हुआ है। एक वीडियो में कम से कम 100 लाशें दिख रही हैं। लेकिन, चीनी सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 3 दिनों में कोविड से केवल 7 लोगों की मौत हुई, 2 की मौत सोमवार को और 5 की मौत मंगलवार को। चीन के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रिवेंशन ने कहा है कि आने वाले दिनों में मौजूदा लहर और तेज होगी।

चीन के कुछ अस्पतालों में मरीजों की लाशें रखने की भी जगह नहीं है, और नए मरीज लगातार आ रहे हैं। ऐसे में कुछ अस्पतालों में लाशों के बीच मरीजों का इलाज हो रहा है। एक वीडियो में नजर आ रहा है कि अस्पताल के बेड पर मरीज हैं, और जमीन पर लाशें हैं। बीजिंग, शंघाई, तियेनजिन, क्वांगतुंग, वुहान, शिलिन के अस्पताल मरीजों से भरे हुए हैं और नए रोगियों के लिए कोई बेड ही नहीं है। दवाओं और डॉक्टरों की भी भारी कमी है। स्टेडियम और शॉपिंग मॉल को अब अस्थाई अस्पतालों में तब्दील किया जा रहा है। हल्के लक्षण वाले मरीजों को क्लीनिक से दवा देकर घर भेज दिया जा रहा है। क्लीनिक्स के बाहर लंबी-लंबी लाइनें लगी हैं।

महामारी की इतनी बड़ी लहर के बावजूद चीन की सरकार आंकड़ों को छिपा रही है। चीन कितना झूठ बताता है, कितना छुपाता है, इसका एक उदाहरण आपको देता हूं। दुनिया में इस वक्त कोरोना के करीब 2.43 करोड़ ऐक्टिव केस हैं। इनमें से अमेरिका में करीब 18 लाख, दक्षिण कोरिया और फ्रांस में करीब 11.5 लाख, जर्मनी में 5.5 लाख सक्रिय मामले हैं, लेकिन चीन में जहां अस्पताल मरीजों से भरे पड़े हैं, वहां की सरकार का दावा है कि उनके देश में कोरोना के सिर्फ 37 हजार मरीज हैं। जाहिर है कि चीन की सरकार आंकड़े छिपा रही है। हकीकत सोशल मीडिया के जरिए दुनिया के सामने आ रही है।

चीन ने यह तो माना कि कोरोना तेजी से फैला है, पर चीन की सरकार यह नहीं बताती कि कितने लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। चीन की सरकार यह भी नहीं बता रही कि कितने लोग इस महामारी से संक्रमित हैं, किन इलाकों में खतरा ज्यादा है या यह कौन-सा वेरिएंट है? लेकिन अमेरिका के एक्सपर्ट्स का कहना है कि उनके पास इस बात की जानकारी है कि चीन में कोरोना तेजी से फैला है, और वायरस से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है। एक्सपर्ट्स ने यह भी कहा कि कोरोना अगर चीन में म्यूटेट होकर और ज्यादा घातक हो गया तो यह पूरी दुनिया के लिए खतरा बन सकता है।

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