बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को राजनीतिक नेतृत्व सौंपने का इशारा बेहद चर्चा का विषय है‚ वहीं सुदूर दक्षिण के तमिलनाडु़ में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा अपने विधायक बेटे को मंत्री परिषद में शामिल करना सत्तारूढ़ ड़ीएमके के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है। इन दोनों घटनक्रम ने वंशवाद के शिथिल मुद्दे को फिर से छेड़़ दिया है। दरअसल‚ वंशवाद मुद्दा होते हुए भी कभी बहुत प्रभावी नहीं रहा। दो–तीन दलों को छोड़़कर सभी दल परिवारों की जागीर बन चुके हैं‚ जहां आखिरी फैसला परिवार का मुखिया ही करता है। उदाहरण के लिए ड़ीएमके को ही लें‚ जहां एक ही परिवार के सात सदस्य सक्रिय राजनीति में हैं। वंशवाद की राजनीतिक कुरीति के बारे में यह धारणा थी कि यह सिर्फ उत्तर भारत में ज्यादा है। लेकिन दक्षिण के राज्यों में भी नेता अपने परिवार के लोगों को खूब आगे बढ़ा रहे हैं। उदाहरण के लिए तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) को एक परिवार का दल माने जाने लगा है‚ जहां एक ही परिवार के पांच सदस्य बड़े़ पदों पर आसीन हैं। वहीं आंध्र में तेलुगू देशम अध्यक्ष चंद्रबावू अपने बेटे लोकेश को उत्तराधिकारी घोषित कर चुके हैं। वाईएसआर कांग्रेस के जगन अपने पिता की विरासत आगे बढ़ा ही रहे हैं। कर्नाटक में भी कमोबेश यही हालत है‚ जहां जनता दल (सेक्युलर) को पूर्व प्रधानमंत्री एचड़ी देवेगौड़़ा का परिवार चला रहा है। उनके छोटे बेटे कुमारास्वामी राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं; कुमारास्वामी के बेटे मंत्री और पत्नी भी विधायक रह चुके हैं। वर्तमान मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के पिता भी मुख्यमंत्री रह चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येद्दुरप्पा के बेटे सांसद हैं। इन परिवारवादी दलों का एक ही बचाव रहता है। जनता ने हमें चुनकर भेजा है। भारत को आजादी सिर्फ अंग्रजों से नहीं मिली थी‚ बल्कि सैकड़ों राजा–रजवाड़़ों से भी आजादी मिली थी। वो सिर्फ प्रतीकात्मक रह गए थे। जो थोड़़ी बहुत सुविधाएं प्रिवी पर्स के माध्यम से उन्हें मिलती थी उसे भी खत्म कर दिया गया। कुल मिलाकर आज देश पर ‘लोकतांत्रिक रजवाड़़ों’ की छाप दिखती है। और यह अब दक्षिण में भी दिख रहा है। महाराष्ट्र में शरद पवार और बाला साहेब ठाकरे का परिवार पहले से ही पहली पंक्ति में है। जिस तर्ज पर हमारी राजनीति जातीय समीकरणों की गुलाम हो चुकी है‚ उससे वंशवाद से मुक्ति फिलहाल को आसान नहीं दिखती। हां‚ कुछ नये दलों के उदय में उम्मीद की किरण जरूर दिखती है।
स्वदेशी युद्धपोत महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े में हुआ शामिल ,क्यों खास आईएनएस महेंद्रगिरि ……
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े में छठे प्रोजेक्ट 17ए स्वदेशी स्टील्थ...







