बीजेपी में प्रदेश अध्यक्ष अभी संजय जायसवाल हैं। इससे ठीक पहले नित्यानंद राय प्रदेश अध्यक्ष थे। दोंनों ओबीसी से आते हैं। कांग्रेस राष्ट्रीय पार्टी है और इसकी सबसे बड़ी राजनीतिक लड़ाई बीजेपी से ही है लेकिन कांग्रेस संगठन सोशल इंजनीयरिंग के नये फार्मूले पर है। कांग्रेस में विधायक दल के नेता अजीत शर्मा और नए प्रदेश अध्यक्ष एक जाति से हैं। दोनों सवर्ण हैं।
बड़ी बात यह है कि जिस आरजेडी से विधान सभा चुनाव 2020 से लेकर नीतीश-तेजस्वी की नई सरकार बनने से पहले तक कांग्रेस के संबंध बहुत तनातनी वाले रहे वहां लालू प्रसाद के करीबी माने जाने वाले को अध्यक्ष पद दे दिया गया। कांग्रेस के राज्य सभा सदस्य अखिलेश प्रसाद सिंह को कांग्रेस आलाकमान ने प्रदेश अध्यक्ष की बागडोर दे दी। बीजेपी ने इस पर कटाक्ष किया है। यह सवाल बिहार की राजनीति में खूब है कि लालू से करीब होने का फायदा तो नहीं मिला अखिलेश प्रसाद सिंह को !
अखिलेश सिंह, लालू के आदेशपाल बनकर रहेंगे कि अध्यक्ष ! – अरविंद सिंह, प्रदेश प्रवक्ता, बीजेपी
बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता अरविंद सिंह ने कहा कि अखिलेश सिंह को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बनने की बधाई। वे कांग्रेस के अध्यक्ष बने हैं कि लालू प्रसाद के आदेशपालक बने हैं यह भविष्य में तय होगा। वे राजद से कितना सीट ले पाएंगे, राजद से कितना लड़ पाएंगे और महागठबंधन से कितनी सीट ले कांग्रेस को कितना खड़ा कर पाएगें? देखना है कि वे कितना समझौता कर पाते हैं! लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव के आदेशपालक बनेंगे या उनके बराबर रहेंगे यह देखना है। उन्होंने कहा कि जिस कांग्रेस की अर्थी लालू प्रसाद ने सजा दी है। वे उसको कितना गिन पाते हैं देखना है। वे लालू के पिछलग्गू नहीं बनें। बल्कि कांग्रेस के अध्यक्ष बनें हैं।
कांग्रेस में पद देते समय जाति देखी ही नहीं जाती है- आसित नाथ तिवारी, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता आसित नाथ तिवारी ने कहा है कि जिसे जातीय समीकरण कहा जाता है उसमें काफी विभेद है। कांग्रेस समाज को बांट कर राजनीति नहीं करती है। समाज को लड़ाने-भिड़ाने की राजनीति बीजेपी की है।
कांग्रेस में यह सोचा ही नहीं जाता कि इस जाति को ये बना दिया तो उसको कैसे बना दिया। कहा कि कांग्रेस में आम सहमति जिस पर बन जाती है उन्हें यह देखे बिना पद दे दिया जाता है कि वह किस जाति के हैं। कांग्रेस में जाति-पाति होता ही नहीं है।







