मोरबी में मच्छु नदी पर घटित झूला पुल हादसे ने राज्य में शासन–प्रशासन को चाहे थोड़़ा कम झकझोरा हो‚ देशवासियों और न्यायपालिका को इस हादसे ने खूब झकझोरा है। क्या हुआ जो १४१ लोगों की जान लेने वाले हादसे के लिए रखरखाव का ठेका लेने वाली कंपनी‚ इसके इंजीनियरों व स्थानीय शासन के बड़े़ अफसरों के नाम एफआईआर में नहीं लिखे गए और टिकट काटने वाले बाबुओं और गार्ड़ों सहित केवल नौ लोगों को ही जिम्मेदार ठहराते हुुए गिरफ्तार किया गया। सर्वोच्च न्यायालय ने तो सच का साथ देते हुए केंद्र और राज्य सरकार की आंखें खोलने का काम किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने मोरबी पुल हादसे को बड़़ी त्रासदी करार देते हुए गुजरात उच्च न्यायालय से इस मामले में जांच और पुनर्वास तथा पीडि़़तों को सम्मानजनक मुआवजा दिलाने समेत अन्य पहलुओं की समय–समय पर निगरानी करने को कहा है। प्रधान न्यायाधीश की पीठ ने उन दलीलों को भी खारिज कर दिया जिनमें भविष्य में मोरबी जैसे हादसे फिर नहीं हों‚ इसके लिए एक जांच आयोग गठित किए जाने की मांग की गई थी। पीठ का अवलोकन था कि आयोग अनेक बार मामले को केवल ठंड़े बस्ते में ड़ालने का काम भर करता है। इसीलिए कई बार‚ न्यायाधीशों के लिए कार्यवाही को संभालना सही होता है। शीर्ष अदालत ने इसे खुद किया होता‚ लेकिन अब उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश इसे देख रहे हैं। मोरबी का हादसा बड़़ी त्रासदी है और ठेका दिए जाने‚ जिस कंपनी को अनुबंध दिया गया है उसके बारे में जानकारी‚ दोषियों की जिम्मेदारी तय करने आदि को देखने के लिए साप्ताहिक निगरानी जरूरी होगी। उच्च न्यायालय ने जिम्मेदारी संभाल ली है‚ अन्यथा सर्वोच्च न्यायालय नोटिस जारी करता। सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को अपनी अर्जी के साथ उच्च न्यायालय में जाने और स्वतंत्र जांच तथा अपने परिजनों को खोने वाले लोगों को सम्माजनक मुआवजा दिलाने का अनुरोध करने की अनुमति दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट से संतुष्ट न होने पर याचिकाकर्ता उसके पास बाद में आ सकते हैं। मोरबी हादसे के कई पहलुओं पर राज्य तथा नगरपालिका के अधिकारियों के समय–समय पर जवाब की जरूरत होगी। इसलिए फिलवक्त हादसे की सुनवाई हाई कोर्ट में ही होना सही है। हां‚ सर्वोच्च न्यायालय के मामले का संज्ञान लेने से इतना तो तय हो गया है कि मोरबी के पीडि़़तों को न्याय तो मिलकर ही रहेगा।
19 साल बाद कोलकाता लौटने पर भावुक हुईं तस्लीमा नसरीन, बोलीं- यह घर वापसी
बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन शुक्रवार को 19 साल बाद कोलकाता पहुंचीं। कोलकाता पहुंचने पर तस्लीमा नसरीन बेहद खुश दिखाई दीं।...







