बिहार में उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ ही चार दिवसीय लोक आस्था के महापर्व छठ का समापन हो गया। उगते सूर्य की उपासना के बाद छठ व्रतियों ने पारण कर 36 घंटे का निर्जला उपवास तोड़ा। राजधानी पटना समेत राज्य के हर जिले में छठ पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में पवित्र उत्साह देखने को मिला। राज्य के सभी जिलों में छठ घाट पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
अपने-अपने घरों में दिया अर्घ्य
राजधानी पटना में गंगा घाटों के अलावा शहर के कई तालाबों में लोगों ने अर्घ्य दिया। इसके साथ ही अपने घर की छतों पर लोगों ने छठी मईया की अराधना की। उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। घाटों पर छठी मईया के गीत गूंजते रहे। श्रद्धालुओं और महिला छठ व्रतियों ने एक दूसरे को सिंदूर लगाकर उनके सदा सुहागन होने की कामना की।
घाटों पर रही सुरक्षा व्यवस्था
राजधानी पटना के अलावा पूरे बिहार भर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन मुस्तैद रहा। घाट पर जाने वाले लोगों के घरों की सुरक्षा पुलिस ने गश्त लगाकर की। इसके अलावा घाट पर वाच टावर के जरिए पुलिस ने निगरानी रखी। बिहार के सभी जिलों से छठ के शांतिपूर्वक संपन्न होने की खबर आई है। मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, पूर्णिया और दरभंगा के अलावा सभी जिलों में छठ शांतिपूर्वक और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
सोशल मीडिया पर छठ महापर्व की धूम
छठ पूजा के दौरान घाटों पर मोबाइल से सेल्फी और रील बनाने वालों की संख्या भी ज्यादा रही। सोशल मीडिया पर छठ की तस्वीर और रील से लोगों के पोस्ट भरे हुए हैं। बिहार से बाहर रहने वाले लोगों ने भी सोशल मीडिया पर तस्वीर डाली है। औरंगाबाद के सूर्य नगरी देव स्थित पवित्र सूर्यकुन्ड में लाखों व्रतियों ने उदयीमान सुर्य को दुसरा अर्ध्य अर्पित किया। छोटे से इस कुन्ड के चारों तरफ श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। हर कोई इस फिराक में था कि वह जल्द से जल्द कुन्ड तक पहुंचे।
घर में भी हुई पूजा
आपको बता दें कि देव में छठ पूजा का अनुष्ठान करने का एक अलग ही महत्व है। ऐसी मान्यता है कि भगवान सूर्य यहां साक्षात विद्यमान हैं। जो कोई भी सच्चे मन से यहां आ कर छठी मईया की पूजा करता है। भगवान उसकी मनोकामना अवश्य पूरी करते हैं। अपना अर्घ्य अर्पण कर छठ व्रती पोखरे से दंडवत करते हुये सूर्य मंदिर पहुंचते हैं। जहां तीनों रूपों में विराजमान भगवान भास्कर के दर्शन करते हैं। वहीं बेगूसराय में उगते सूर्य की पूजा अर्चना के साथ महापर्व संपन्न हो गया। जिले में शहर से लेकर गांव तक गंगा घाट से लेकर घरों में बनाए कृत्रिम तालाब में छठ पूजा की।
छठ महापर्व संपन्न
चार दिवसीय छठ महापर्व के अंतिम दिन उगते भगवान भास्कर की पूजा अर्चना की गई। सुबह करीब 6 बजे सूर्य भगवान को अर्घ्य देकर पूजा-अर्चना शुरू की गई। बेगूसराय में 473 गंगा घाट ,नदी घाट और पोखरों को जिला प्रशासन ने छठ पूजा के लिए तैयार किया था। इसके अलावा शहर से लेकर गांव तक लोग अपने अपने घरों और छत पर भी कृत्रिम तालाब बनाकर भगवान भास्कर की पूजा अर्चना की। 36 घंटे के निर्जला व्रत के बाद आज उगते सूरज की पूजा अर्चना के बाद छठ व्रतियों ने फलाहार कर अपना निर्जला व्रत का उपवास खत्म किया।
छठ महापर्व (Chhath Puja 2022) का आज आखिरी दिन है. आज ही के दिन व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य देकर (Chhath Puja Surya Arghya Time) अपने व्रत का पारण करते हैं. इस व्रत में छठी मईया और सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है, सूर्य देव और छठी मईया की इस विशेष पूजा करने से उत्तम स्वास्थ्य, सुख समृद्धि और संतान को सुरक्षा प्राप्त होती है. कहा जाता है कि इन दिनों उगते सूर्य को अर्घ्य देने पर साधक को आत्मविश्वास, मान-सम्मान, संतान की आयु में भी वृद्धि होती है. तो चलिए जानते हैं छठ पूजा में सूर्योदय का मुहूर्त और सूर्य देव को प्रसन्न करने वाला एक खास श्लोक.
उगते सूर्य को अर्घ्य देने का विशेष मुहूर्त –
ऊषाकाल सूर्य मुहूर्त – सुबर 06.36 (31 अक्टूबर 2022)
चौथ दिन का मुहूर्त और योग
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04:53 – सुबह 05:44
अभिजित मुहूर्त – सुबह 11:48 – सुबह 12:33
त्रिपुष्कर योग – सुबह 05.48 – सुबह 06.36
सूर्य देव श्लोक
सहस्रकिरणोज्ज्वल। लोकदीप नमस्तेऽस्तु नमस्ते कोणवल्लभ।।
भास्कराय नमो नित्यं खखोल्काय नमो नमः।
विष्णवे कालचक्राय सोमायामिततेजसे।।
भावार्थः
हे देवदेवेश! आप सहस्र किरणों से प्रकाशमान हैं।
हे कोणवल्लभ! आप संसार के लिए दीपक हैं, आपको हमारा नमस्कार है। विष्णु, कालचक्र, अमित तेजस्वी, सोम आदि नामों से सुशोभित एवं अंतरिक्ष में स्थित होकर सम्पूर्ण विश्व को प्रकाशित करने वाले आप भगवानको हमारा नमस्कार है।




