जिस बात का ड़र था‚ वैसा ही कुछ हुआ। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शनिवार को वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ रहने की आशंका के बीच वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने प्राधिकारियों को ग्रेडे़ड़ रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी–ग्रेप) का दूसरा चरण लागू करने को कहा है। ऐसा पहली बार हुआ है कि बेहद खराब हवा के पूर्वानुमान के आधार पर ग्रेप को लागू किया गया। सीधे तौर पर कहें तो आने वाले दिनों में दिल्ली–एनसीआर में हवा के बेहद प्रदूषित रहने की आशंका है। ड़ीजल जनरेटर का अंधाधुंध उपयोग‚ पराली जलाने और निर्माण कार्यों में सावधानी न बरतने की वजह से प्रदूषण का स्तर आम दिनों की अपेक्षा ज्यादा रहता है। हालांकि विरोधाभास यह भी है कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष पराली जलाने की घटनाएं ५४ फीसद कम हुई हैं। फिर भी प्रदूषण का स्तर ढाई गुना ज्यादा आंका गया है। प्रदूषणरोधी एजेंसियों के साथ–साथ आम जनता को भी यह बात समझनी होगी कि खराब या प्रदूषित हवा का हमारी सेहत पर कितना खतरनाक प्रभाव पड़़ता है। तमाम उपायों और सख्ती के बावजूद शुद्ध हवा आमजन को नसीब नहीं है। किसानों के साथ दिक्कत यह है कि रबी फसल की बुआई करने की जल्दबाजी में वो पराली के गलने का इंतजार नहीं करते बल्कि उसे जला ड़ालते हैं। नतीजतन‚ हवा जहरीली हो जाती है। सवाल यह भी उठता है कि क्या यह बात बार–बार किसानों और जनता को बतानी पड़े़गी कि पराली जलाने या वाहनों का अंधाधुंध इस्तेमाल करने का खमियाजा हमें ही भुगतना पड़़ता हैॽ सवाल यह भी पैदा होता है कि पराली जलाने के लिए पिछले वर्ष दिल्ली सरकार ने जो दवा किसानों को देने का दावा किया था‚ वह तो झूठा साबित हुआ है। यहां तक कि पराली हटाने के लिए जो उपकरण उपयोग में लाने और किसानों को सब्सिड़ी दर पर देने की बात कही गई थी‚ वह भी खोखली साबित हुई। दिल्ली और आसपास के शहरों को कब स्वच्छ हवा मिलेगीॽ चिंता की बात यह है कि अभी दिवाली में चार दिन बाकी है‚ जबकि बुधवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक २२८ थी। यानी खतरा बरकरार है। देखना है‚ ग्रेप लागू किए जाने के बाद हवा कितनी शुद्ध होती है और जनता को कितनी राहत मिलती हैॽ
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच वैश्विक संकट पर पीएम मोदी ने बुलाई अहम बैठक,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार शाम को प्रमुख मंत्रालयों के सचिवों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता करेंगे. बताया जा रहा...




