चीन की राजधानी पेइचिंग में कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के 20 वें बहुचर्चित अधिवेशन के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग का दिया हुआ लंबा भाषण पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। विभिन्न कोणों से इसके निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। शी ने चीनी सेना की लड़ाकू तैयारियों को और बढ़ाने पर जोर दिया‚ इसका अर्थ यह निकाला जा रहा है कि उनके इस कार्यकाल में चीन विस्तारवाद की ओर तेजी से बढ़ेगा। घरेलू मोर्चे पर उन्होंने कोविड–१९ को लेकर जिस तरह जीरो कोविड़ नीति की घोषणा की है‚ विचारकों के अनुसार इसके परिणाम स्वयं चीन के लिए लाभदायक नहीं होंगे। कोविड़ के दौरान चीन की अर्थव्यवस्था को गंभीर क्षति पहुंची है‚ लेकिन यह चीन का आंतरिक मामला है‚ इससे वह कैसे निपटेगा यह उसे ही देखना है। शी जिस तरह पिछले १० साल से देश की शासन व्यवस्था का संचालन कर रहे हैं‚ आगे भी इसी तरह जारी रखेंगे। अर्थव्यवस्था पर सरकार का नियंत्रण ढीला नहीं होगा। उन्होंने एक प्रमुख बात ताइवान को लेकर कही है कि उसे सैनिक कार्रवाई के साथ जबरन चीन का हिस्सा बनाने का विकल्प खुला है। वह ताइवान के इस मुद्दे को विरासत में मिला हुआ मुद्दा मानते हैं और इसे अपने तरीके से हल करना चाहते हैं। अगर ऐसा होता है तो एशिया का यह भू भाग भयावह सामरिक परिस्थितियों से घिर जाएगा और इसका दुष्प्रभाव दशकों तक जारी रह सकता है। ताइवान संबंधी उनके वक्तव्य ने पूरी दुनिया के कान खड़े कर दिए हैं। भारत के संबंध में गलवान घाटी में हुए सैनिक झड़़प का वीडियो जारी कर के शी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत के प्रति चीन के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है और ना ही आएगा। चीन जिस तरह से सीमा पर दखलअंदाजी कर रहा है वह जारी रहेगा। कुल मिलाकर भारत के लिए यह चिंताजनक स्थिति है। इसका मुकाबला करने के लिए भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को और अधिक आत्मनिर्भर और मजबूत बनाना होगा। मजबूती के लिए उसे समाज में सामाजिक समरसता बढ़ाने के लिए सतत प्रयास करने होंगे। सीमा पर अपनी सैन्य चौकसी बढ़ानी होगी और सबसे बड़ी बात यह है कि उसे चीन की काट के तौर पर उन सभी देशों से बेहतर संबंध बनाने होंगे जो चीन को लेकर आशंकित हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच वैश्विक संकट पर पीएम मोदी ने बुलाई अहम बैठक,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार शाम को प्रमुख मंत्रालयों के सचिवों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता करेंगे. बताया जा रहा...




