भारत में महंगाई पर लगाम लगाने के लिए सख्त मौद्रिक नीति अपनाई गई है‚ उसकी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने सराहना की है। आईएमएफ के मौद्रिक एवं पूंजी बाजार विभाग के उपखंड़ प्रमुख गार्सिया पास्क्वाल ने कहा है‚ ‘मई से ही तय सीमा से ऊँचे स्तर पर बनी हुई मुद्रास्फीति से निपटने को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मौद्रिक नीति को सख्त करके उचित ही किया है। जहां तक मुझे ध्यान है‚ आरबीआई ने दरों में १.९० फीसद की वृद्धि की है‚ और हमारा मानना है कि मुद्रास्फीति को निश्चित स्तर तक लाने के लिए और सख्ती करनी होगी।’ आईएमएफ और विश्व बैंक की वार्षिक बैठक में उन्होंने यह बात कही। दरअसल‚ मौद्रिक नीति और विकास दर बढ़ाने की चुनौती के बरक्स मौद्रिक नीति का मसला महत्वपूर्ण बन पड़़ा है। वाशिंगटन में हो रही आईएमएफ और विश्व बैंक बैठक में भाग लेने पहंुचीं भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के कथन से भी इसकी ताहीद होती है। उन्होंने कहा कि भारत वृद्धि की रफ्तार बनाए रखने के लिए प्रयत्नशील है‚ हालांकि महंगाई की चिंता बड़़ी है। खुदरा मुद्रास्फीति सितम्बर में बढ़कर ७.४१ फीसद के स्तर पर पहंुच गई। लगातार ९वां महीना है जब महंगाई रिजर्व बैंक के दो से छह फीसद के संतोषजनक स्तर से ऊपर बनी हुई है। महंगाई को आयातित करार दिया गया लेकिन यह कह देने भर से बात नहीं बनेगी। खाद्य और ऊर्जा वस्तुओं का दबाव बराबर दामों पर बना हुआ है। इस बीच‚ अर्थव्यवस्था के ७ फीसद की रफ्तार से बढ़ने के अनुमान जताए जा चुके हैं। उत्पादन में तेजी‚ मांग में ‘मजबूती’ और कृषि और रसायन उत्पादों के निर्यात की अच्छी संभावनाओं के आधार पर आर्थिक वृद्धि दर में बढ़ोतरी की बात कही जा रही है। लेकिन आने वाले महीनों में कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं‚ ऐसे में महंगाई का पहलू सरकार को दबाव में लाए हुए है। इसीलिए वित्त मंत्री ने स्पष्ट कहा है कि महंगाई का दंश कम से कम करने और वृद्धिकी रफ्तार को कायम रखने के लिए तमाम जरूरी उपाय किए जा रहे हैं‚ जिनकी झलक आगामी बजट में भी मिल सकती है। बहरहाल‚ इतना साफ है कि सरकार महंगाईसे निपटने के साथही आर्थिक वृद्धिकी रफ्तार को बरकरार रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
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