प्रीति से कंगना तक– नाडिया के बाद से‚ तमाम बॉलीवुड अभिनेत्रियों ने एजेंट की भूमिका की है। नाडिया द्वारा प्रारंभ किया गया एजेंट भूमिकाओं का सिलसिला धीमे धीमे ही सही‚ चल निकला है। कई बॉलीवुड अभिनेत्रियां रॉ एजेंट या दूसरी एजेंसी के एजेंट की भूमिका कर चुकी है। फिल्म द हीरो लव स्टोरी ऑफ अ स्पाई में प्रीति जिंटा रॉ एजेंट के लिए पाकिस्तान के आतंकियों के बीच एजेंट का काम करती है। फिल्म एक था टाइगर में कैटरीना कैफ और एजेंट विनोद में करीना कपूर खान ने आईएसआई की भूमिका की थी तो कहानी की दुर्गा विद्या बालन भी एजेंट की भूमिका कर रही थी। फिल्म डी डे में हुमा कुरैशी रॉ की एजेंट बनी थी। वह दुबई के मिशन में दूसरे लोगों के साथ दाऊद इब्राहीम को पकड़ कर लाती है। फिल्म फोर्स २ में पुलिस अधिकारी जॉन अब्राहम के साथ सोनाक्षी सिन्हा रॉ एजेंट बन कर खतरनाक मिशन पर जाती है। फिल्म नाम शबाना में तापसी पन्नू मुस्लिम लड़की की भूमिका कर रही थी‚ जिसे एजेंट के रूप में भेजा जाता है। आलिया भट्ट‚ राजी में जो चरित्र कर रही थी‚ वह रॉ के लिए पाकिस्तान मे गुप्त सूचनाएं प्राप्त करने के लिए पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी से शादी भी कर लेती है। २०२१ में सीधे ओटीटी पर रिलीज फिल्म बेल बॉटम में रॉ एजेंट अक्षय कुमार के साथ वाणी कपूर ने महिला रॉ एजेंट की भूमिका की थी। इसी साल पर्दर्शित साल की सबसे बड़ी फ्लॉप फिल्मों में शामिल फिल्म धाकड़़ में अभिनेत्री कंगना रानौत ने रॉ एजेंट अग्नि की भूमिका की थी।
पहली एजेंट नाडिया – भारत में पहली बार रॉ यानि रिसर्च एंड एनालिसिस विंग की स्थापना २१ सितम्बर १९६८ को हुई थी इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि होमी वाडिया निर्देशित और फीयरलेस नाडिया द्वारा अभिनीत फिल्म खिलाड़ी (१९६८) पहली महिला रॉ एजेंट फिल्म थी। पर एक्शन फिल्मों में अंतिम एक्शन फिल्म खिलाड़ी में एजेंट की भूमिका की थी‚ जो चीन में अपने मिशन में जाती है। उस समय नाडिया की उम्र ५८ साल की थी और इस फिल्म के बाद‚ नाडिया ने अभिनय को अलविदा कह दी थी। इस प्रकार से नाडिया ही हिंदी फिल्मों की पहली एजेंट साबित होती है।
एक्शन करने की चाह– हिंदी फिल्मों में नायिका को ग्लैमर के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह अपने नायक का दिल बहलाने के प्रयास में मनोरंजन भी कर जाती है। उनसे किसी एक्शन की आशा या अपेक्षा नहीं की जाती। इसके बावजूद बॉलीवुड की अभिनेत्रियां कभी डाकू कभी बलात्कार की शिकार महिला के रूप में बन्दूक उठा लेती है। ऐसी बन्दूक वाली अभिनेत्रियों की फिल्में सफल भी होती है। इसके बावजूद बॉलीवुड इन्हें रॉ एजेंट बना कर बंदूकें थमा नहीं देता। वास्तव में बॉलीवुड फिल्म अभिनेत्रियां एक्शन फिल्में स्वाद बदलने के लिए करती है। उन्हें ऐसी भूमिकाओं में विशेष लगाव नहीं होता। चूंकि‚ नायक से रोमांस करते करते ऊब गई है इसलिए एक्शन करना चाहती है। बात करते करते कोड नेम तिरंगा की रॉ एजेंट दुर्गा परिणीति चोपड़ा कहती है‚ मैं रोमांस करते करते ऊब गई थी इसलिए एक्शन फिल्म करना चाहती थी। रिभु (निर्देशक रिभु दासगुप्ता) ने मुझसे एजेंट बनने के लिए कहा‚ मैंने स्वीकार कर लिया। यानि बॉलीवुड की अधिकतर नाजुक बदन हसीनाओं की नाजुक कलियां बंदूक का भार सहन करने की क्षमता नहीं है।
आसान नहीं रॉ से रॉ बनना– हॉलीवुड की एंजेलिना जोली बनना बॉलीवुड फिल्म अभिनेत्रियों के लिए आसान नहीं एंजेलिना जोली ने मिस्टर एंड मिसेज स्मिथ और वांटेड में अपनी भूमिकाओं को सजीव करने के लिए केवल एक्शन कोरियोग्राफर की बात ही नहीं मानी‚ बल्कि अपने शारीरिक गठन को भी भूमिका के अनुरूप ढाला है। फिल्म कोड नेम तिरंगा के लिए परिणीति चोपड़ा और धाकड़ के लिए कंगना रानौत ने कोरियोग्राफर का अनुसरण तो किया पर अपने शारीरिक गठन पर भी ध्यान देना न तो उनके बस की बात थी‚ न ही उनमे अपनी भूमिकाओं के लिए इतना समर्पण था। केवल नाडिया ही अपने एक्शन के लिए पूरी तरह से तैयार हुआ करती थी इसलिए खिलाड़ी की एजेंट के रूप में भी रॉ नहीं थी बॉलीवुड की रॉ एजेंट अभी रॉ यानि कच्ची है।
कोड नेम तिरंगा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में परिणीति चोपड़ा ने साफ किया कि वह स्पाई यानि जासूस नहीं बनी है‚ बल्कि वह रॉ एजेंट हैं। दरअसल‚ बॉलीवुड को स्पाई और एजेंट में फर्क नहीं मालूम वह एजेंट फिल्म को भी स्पाई फिल्म मान लेते हैं। तभी तो वह स्पाई और एजेंट फिल्म के जोनर को गडबड होने देते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि बॉलीवुड ने कोड नेम तिरंगा से पहले भी एजेंट फिल्में बनाई है‚ कई अभिनेता अंडरकवर एजेंट की भूमिका कर चुके हैं। स्वयं परिणीति चोपड़ा भी रु पहले परदे की पहली रॉ एजेंट नहीं उनसे पहले भी कई फिल्म अभिनेत्रियां रॉ एजेंट बन कर परदे पर एक्शन करने की कोशिश कर चुकी हैं॥।





