नदी के गर्भ में ‘पीला सोना’ यानि बालू। नदी के चारों ओर बालू के रूप में पसरी सुनहरी चादर। चादर पर कब्जे के लिए स्थानीय बालू माफिया में चलने वाली वर्चस्व की लड़ाई। खूनी गुटबाजी। खुद को सुपर साबित करने की होड़। जी हां, ये पटना से सटे पालीगंज के लिए आम बात है। जहां आए दिन बात-बात पर दो गुट हथियार लेकर आमने-सामने होते हैं। उसके बाद किसी की गोद सुनी होती है। किसी का सुहाग उजड़ता है। बाकी रह जाती है बालू की भूख। जो कभी दोनों गुटों को शांत नहीं रहने देती।
बालू के अवैध खनन की अंतहीन कहानी
बालू के अवैध खनन के खेल में आधिपत्य की जंग प्रमुख होती है। एक तरफ सरकार की ओर से बालू के खनन और उठाव पर रोक है। माफिया ऐसा नहीं मानते। उनके लिए बालू पर कब्जा स्टेट्स सिंबल की तरह है। जिसके लिए दोनों गुट मरने-मारने पर उतारू हो जाते हैं। पालीगंज में ऐसे ही दो गुट हैं। श्रीराय और सिपाही राय गुट। बिहटा और मनेर में बिखरे अवैध सोने पर इन दोनों गुटों का कब्जा है। एक मुट्ठी बालू भी बिना इनकी इजाजत नहीं उठ पाता है।
वर्चस्व के संघर्ष में जाती है मजदूरों की जान
दोनों गुट बालू पर वर्चस्व कायम करने के लिए मजदूरों की जिंदगी से भी खेलते हैं। इन दोनों गुटों में आए दिन गोलीबारी की घटना आम बात है। इलाके में गोली की आवाज सुनने के बाद कोई बच्चा चौंकता नहीं है। लोग अपनी दिनचर्या में लगे रहते हैं। उनके लिए गोली चलना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। ये स्थिति तब है, जब पूरी सरकार इस इलाके के बगल में विराजती है। हाल के दिनों में मनेर के सुवरमरवा और बिहटा का अमनाबाद बालू घाट चर्चा के केंद्र में रहा। इन दोनों घाटों पर आए दिन गोलीबारी होती रहती है।
बालू में दबा दिये जाते हैं मजदूरों के शव
सिपाही गुट की ओर से हाल में वर्चस्व को लेकर गोलीबारी हुई थी। जिसमें कई लोग मरे थे। स्थानीय लोग नाम नहीं बताने की शर्त पर कहते हैं। गोलीबारी में लोग मरते हैं। उनके शवों को दोनों गुट गायब कर देता है। बालू में गाड़ देता है। ग्रामीण मानते हैं कि प्रशासन सिर्फ बालू की खुदाई करे, तो नरकंकाल के ढेर लग जाएंगे। गोलीबारी के बाद मरने वालों के शव को सावधानी से ठिकाने लगाया जाता है। स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगती। भनक लगने के बाद भी पुलिस का मुंह बंद कर दिया जाता है।
बिहटा में फाैजिया और सिपाही गैंग के बीच चलीं 1000 राउंड गाेलियां, 5 की माैत
बिहटा के अमनाबाद दियारा में साेन से अवैध बालू खनन में वर्चस्व काे लेकर माफिया शंकर सिंह उर्फ फाैजिया और उमाशंकर सिंह उर्फ सिपाही गुट के बीच एक हजार से अधिक राउंड गाेलियां चलीं। बुधवार रात 10 बजे से गुरुवार की सुबह करीब 9:30 तक राइफल, पिस्टल, बंदूक और अन्य अवैध हथियाराें से चली गाेलियों से पांच लाेगाें की माैत हाे गई, जबकि आधा दर्जन घायल हाे गए।
मरने वालाें में फाैजिया गुट के बालू माफिया मनेर के गोरैया स्थान के शत्रुघ्न राय व मुकेश कुमार, ब्यापुर का नाव मालिक लालदेव राय, भोजपुर के चांदी थाना के रामपुर गांव का बिमलेश उर्फ विक्की कुमार सिंह और बिहिया के बिनगांव के दो मजदूर हैं। चाैंकाने वाली बात यह है कि अमनाबाद बिहटा थाने से करीब 10 किमी और मनेर थाने से 7 किमी दूर है, पर पुलिस काे गाेलीबारी की भनक तक नहीं लगी।
गुरुवार काे मीडिया में जब खबर चलने लगी तब पटना से लेकर स्थानीय पुलिस हरकत में आई। इतनी बड़ी घटना के बाद भी एसएसपी डाॅ. मानवजीत सिंह ढिल्लाे और सिटी एसपी वेस्ट घटनास्थल पर नहीं गए। घटनास्थल पर आधा दर्जन से ऊपर जगहों पर खून के धब्बे थे। करीब 500 खाेखे पड़े हुए थे।
एक-एक अस्पताल में घायलों और मृतकाें केे शव को खोजती रही पुलिस
पुलिस काे सूचना दे दी गई पर नहीं पहुंची
ग्रामीणाें ने कहा कि जैसे ही गाेली चलनी हुई, वैसे ही स्थानीय पुलिस काे सूचना दी गई। लेकिन पुलिस नहीं पहुंची। गुरुवार काे जब पुलिस की टीम माैके पर पहुंची ताे उन्हें इस बात की जानकारी तक नहीं मिली कि कितने लाेगाें की माैत हुई है और कितने घायल हुए हैं। पुलिस मृतकाें और घायलाें की खाेजबीन करने में जुट गई। पुलिस पीएमसीएच, एनएमसीएच से लेकर सभी सरकारी अस्पतालाें के साथ बिहटा, मनेर व आसपास के निजी अस्पतालाें में भी गई पर कहीं काेई घायल या मृतक का शव नहीं मिला।
एसएसपी बोले-एक की ही हुई मौत
एसएसपी डाॅ. मानवजीत सिंह ढिल्लाे ने बताया कि दाे पक्षाें में गाेलीबारी हुई है। इसमें आरा के मजदूर विमलेश कुमार की माैत हाे गई। माैके से 50 खाेखा बरामद किया गया है। इलाके में 2 पुलिस अधिकारी और 30 जवानाें की तैनाती कर दी गई है। पीएमसीएच, एनएमसीएच के अलावा बिहटा, मनेर और आसपास के अस्पतालाें में छानबीन करने पर कहीं भी घायल व मृतक नहीं मिले।







