भारत कभी शिक्षा के मामले में विश्व में अव्वल स्थान रखता था‚ लेकिन गुलामी के दौरान देश की शिक्षा व्यवस्था चरमराई। आजादी के बाद भी शिक्षा को एकाकी बनाकर रखा गया। प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी का नेतृत्व मिलते ही शिक्षा को समयानुकूल और सर्वसुलभ बनाया गया। इस क्षेत्र में क्रांतिकारी और ऐतिहासिक परिवर्तन लाकर देश के छात्रों और युवाओं को उन्होंने न सिर्फ नई राह दिखाई‚ बल्कि उनके उनके आगे बढ़ने के लिए हर तरह की परवाह भी की है। ॥ उन्होंने अपने अनुभवों और देश की आवश्यकताओं को देखते हुए ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति २०२०’ के तहत शिक्षा में गुणात्मक सुधार शुरू किया‚ जिसका सकारात्मक परिणाम आने लगे हैं। उन्होंने शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ डिग्री हासिल करना नहीं रखा‚ बल्कि ऐसी शिक्षा की व्यवस्था की‚ जो छात्रों को स्वाबलंबी और बहुआयामी बना रही है। शिक्षा एवं कौशल विकास को जोड़ा। मोदीजी की दूरदृष्टि और दृढ़ इच्छाशक्ति से नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों‚ प्रोफेसरों‚ नीति निर्माताओं ने कड़ी मेहनत की। ‘आजादी का अमृत काल’ में यह शिक्षा नीति देश को आगे ले जाने‚ ऊंचाई प्राप्त कराने और आत्मनिर्भर भारत बनाने में मूल तत्व की तरह काम करेगी। राष्ट्र निर्माण के ‘महायज्ञ’ में इस शिक्षा नीति का अहम योगदान है।’ महामारी के दौरान जब पूरी व्यवस्था प्रभावित हुई थी तब प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व के कारण छात्रों के लिए ऑनलाइन शिक्षण के माध्यम से कड़ी को टूटने नहीं दी गई। देश में छात्रों और युवाओं को पहले अपने सपनों को साकार करने के लिए कई जटिल प्रक्रियाओं से गुजरना होता था‚ लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इसे सरल और सुलभ बनाते हुए युवा पीढ़ी को अपने सपने पूरे करने के लिए उचित वातावरण दिया‚ तो अब उनके आगे बढ़ने की कोई सीमा नहीं होगी। इसी का परिणाम है कि आज भारत का युवा अपनी शर्तों पर‚ अपनी व्यवस्था व दुनिया बनाना चाहता है। नई शिक्षा नीति देश के युवाओं को आश्वस्त करती है कि देश पूरी तरह से उनके और उनके हौसलों के साथ हैं। यह शिक्षा व्यवस्था छात्रों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करेगा और एआई आधारित अर्थव्यवस्था के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा। इसी तरह पूरे देश की डिजिटल और तकनीकी रूपरेखा उपलब्ध कराने में राष्ट्रीय डिजिटल शिक्षण संरचना और राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। नई शिक्षा नीति में जो खुलापन है‚ उससे छात्र दबावमुक्त होकर अपना भविष्य बना रहे हैं। एक से ज्यादा एंट्री और एग्जिट जैसे विकल्प छात्रों को एक कक्षा और एक पाठ्यक्रम में रहने के बंधन से आजाद करेंगे। इसी तरह आधुनिक तकनीक आधारित क्रेडिट सिस्टम का एकेडमिक बैंक एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आएगा। इससे छात्रों में अपने स्ट्रीम और विषयों का चुनाव करने को लेकर आत्मविश्वास आएगा। ‘सफल’ (लनिग लेवल के विश्लेषण के लिए स्ट्रक्चर्ड असेसमेंट) परीक्षा का डर दूर कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में चलाए जा रहे कार्यक्रमों में भारत का भाग्य बदलने की क्षमता है। माध्यम के रूप में स्थानीय भाषाओं के महत्व पर जोर देकर आज इंजीनियरिंग और मेडिकल की शिक्षा भारतीय भाषाओं में मिल रही है। इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम का ११ भाषाओं में अनुवाद करने के लिए टूल विकसित किया गया है। शिक्षा के माध्यम के रूप में मातृभाषा पर जोर देने से गरीब‚ ग्रामीण और आदिवासी पृष्ठभूमि के छात्रों में आत्मविश्वास पैदा हुआ है। यहां तक कि प्राथमिक शिक्षा में भी मातृभाषा को बढ़ावा दिया जा रहा है। ॥ भारतीय सांकेतिक भाषा को पहली बार भाषा विषय का दर्जा दिया गया है। इससे भारतीय सांकेतिक भाषा को बढ़ावा मिलेगा और दिव्यांगजनों को मदद मिलेगी। अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट के माध्यम से छात्रों को उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने और उससे बाहर निकलने के कई सारे विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही इंजीनियरिंग की पढ़ाई को पहले साल क्षेत्रीय भाषाओं में कराए जाने और उच्च शिक्षा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का करने का ऐतिहासिक काम हुआ है। विद्या प्रवेश के तहत बच्चों के लिए तीन महीने का प्ले स्कूल आधारित शैक्षणिक मॉड्यूल बनाया गया है। इसी तरह उच्च शिक्षा के क्षेत्र में वर्ष २०१४ से पहले देश में १३ आईआईएम और सिर्फ सात एम्स थे। २०१४ के बाद इससे दोगुने यानी १५ एम्स देश में या तो स्थापित हो चुके हैं या फिर निर्माण की प्रक्रिया में हैं। आजादी के इतने वषाç के बाद भी साल २०१४ से पहले तक देश में १६ आईआईटी और नौ आईआईआईटी थे। मोदी जी के नेतृत्व में हर साल एक नया भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और १६ नये भारतीय सूचना और प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) की स्थापना की गई है।
प्रधान के इस्तीफे पर वर्ल्ड मीडिया…….
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए...






