केंद्र सरकार के अग्निपथ योजना के विरोध में सड़कों पर उतरे आंदोलनकारियों ने रेलवे की संपत्ति और ट्रेनों को खासकर निशाना बनाया था. लखीसराय में जिस विक्रमशिला एक्सप्रेस व जनसेवा एक्सप्रेस में आग लगा दी गयी थी अब उस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. इस पूरे षडयंत्र के पीछे नक्सलियों का हाथ बताया जा रहा है. वहीं कई सफेदपोश इसमें शामिल रहे जिनसे नक्सलियों का काम आसान हुआ. गिरफ्तार नक्सली मनश्याम दास ने पुलिस के सामने इसका खुलासा किया है.
क्सलियों के थिंक टैंक ने जलवाइ ट्रेनें
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लखीसराय स्टेशन पर ट्रेन को जलाने में नक्सलियों के थिंक टैंक ने काम किया है. इस घटना में आधा दर्जन से अधिक लोगों को नामजद करने की बात सामने आ रही है. वहीं इस पूरी घटना में एक प्रोफेसर का नाम भी सामने आ रहा है. जिन्होंने कुछ लोगों के साथ मिलकर व्हाट्सएप ग्रुप बनाया और हिंसा भड़कायी.
हार्डकोर नक्सली का खुलासा
बता दें कि लखीसराय पुलिस ने हार्डकोर नक्सली मनश्याम दास उर्फ राहुल को गिरफ्तार किया है. वह बिहार-झारखंड के कुख्यात और नामी नक्सलियों के लिए कूरियर का काम करता था. शुक्रवार की शाम लखीसराय के एसपी ने प्रेस कांफ्रेंस किया और कार्रवाई के बारे में बताया. चार राज्यों के मोस्ट वांटेड नक्सली ने गिरफ्तारी के बाद कई राज उगले.
प्रोफेसर के नाम भी चिट्ठी मिली
मनश्याम के पास से पुलिस ने प्रोफेसर और हार्डकोर नक्सली प्रवेश दा के नाम से लिखी 4 चिट्ठियां भी बरामद की है. बता दें कि अग्निपथ योजना के विरोध में बिहार के कई जिलों में जमकर उत्पात मचाया गया था. इसी दौरान लखीसराय स्टेशन पर विक्रमशिला एक्सप्रेस को आग के हवाले कर दिया गया था. पूरी ट्रेन ही फूंक दी गयी थी.
बिहार में योगी मॉडल देखने को मिला है. अब सासाराम में उत्तर प्रदेश की तर्ज पर अपराधियों और उपद्रवियों के पोस्टर सार्वजनिक जगह पर लगाए लगे हैं. सासाराम में नगर थाने की पुलिस ने कई उपद्रवियों की तस्वीरें विभिन्न चौक चौराहों पर लगाई हैं. बता दें कि 17 जून को अग्निपथ योजना के खिलाफ नगर में जमकर हंगामा हुआ था. जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की गई थी. इस मामले में कई उपद्रवी गिरफ्तार किए गए थे. लेकिन वीडियो फुटेज के आधार पर जिन उपद्रवियों की पहचान की गई थी, उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी. ऐसे उपद्रवियों की गिरफ्तारी के लिए रोहतास पुलिस ने सासाराम के विभिन्न चौक चौराहों पर पोस्टर लगाए हैं.
डीएसपी संतोष कुमार राय के मुताबिक, वैसे अपराधी या उपद्रवी जिनकी तलाश है, जो पकड़ से बाहर हैं, उनके पोस्टर सार्वजनिक रूप से लगाए जा रहे हैं. सासाराम नगर के विभिन्न चौक-चौराहों पर कई उपद्रवियों के पोस्टर लगाए गए हैं. उपद्रव के दौरान सीसीटीवी फुटेज और अन्य वीडियो फुटेज के माध्यम से जो तस्वीरें एकत्र की गई हैं, उन्हें ही सार्वजनिक किया गया है ताकि उनकी गिरफ्तारी हो सके.
यूपी में भी लगे थे पोस्टर
बता दें कि उत्तर प्रदेश में भी अपराधियों और उपद्रवियों के पोस्टर सार्वजनिक जगहों पर लगाए गए थे, ताकि पहचान कर गिरफ्तारी की जा सके. कुछ इसी तरह सासाराम में भी रोहतास पुलिस ने सार्वजनिक रूप से पोस्टर लगाकर उपद्रवियों की पहचान की कोशिश की है. पुलिस की इस कोशिश की चारों तरफ चर्चा हो रही है. सासाराम के करगहर मोड़, पोस्ट ऑफिस चौराहा और धर्मशाला चौक पर भी यह पोस्टर लगाया गया है. इस पोस्टर में सासाराम के नगर थाना का नंबर भी जारी किया गया है ताकि कोई भी व्यक्ति इन उपद्रवियों की जानकारी पुलिस को दे सके.
यूपी के रास्ते बिहार पुलिस
अब तक उत्तरप्रदेश पुलिस सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के पोस्टर लगाती थी। अब बिहार पुलिस उसी की तर्ज पर काम कर रही है। यह बिहार में पहली बार होगा, जब उपद्रव करने वालों के पोस्टर गिरफ्तारी के लिए लगाए गए हैं।

स्टेशन लेकर टॉल प्लाजा तक की गई थी तोड़-फोड़ आगजनी
ज्ञात हो कि रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम में अग्निपथ योजना के विरोध में गत 17 जून प्रदर्शनकारियों ने रेलवे स्टेशन, पोस्ट ऑफिस चौक से ले शिवसागर स्थित टॉल प्लाजा तक जमकर तोड़ण्फोड़ एवं आगजनी की गई थी। फारलेन पर स्थित भाजपा कार्यालय में भी तोड़ण्फोड़ की गई थी। टॉल प्लाजा पूरी तरह से जला दिया गया था, तो स्टेशन पर इंजन में आग लगाई गई थी। अब पुलिस द्वारा 17 जून के ही घटनाक्रम का फोटो लगे पोस्टर सार्वजनिक रूप से लगाए गए है। जिसकी चर्चा अब पूरे राज्य में हो रही है।







