ADVERTISEMENT
Wednesday, July 29, 2026
No Result
View All Result
  • Login
  • Register
No Result
View All Result
UB INDIA NEWS
No Result
View All Result

विदेश नीति कसौटी पर……..

UB India News by UB India News
August 7, 2022
in Lokshbha2024, ब्लॉग, राष्ट्रीय
0
विदेश नीति कसौटी पर……..
  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link

दुनिया के चौधरी’ अमेरिका को दो पक्षों की लड़ाई में दाल–भात में मूसलचंद कहें या विश्व शांति को खतरे में डालकर भी फायदा उठाने और स्वार्थ साधने का उसका लाइलाज मर्ज कहें‚ तो चीन की विस्तारवादी नीति दुनिया के लिए कुछ कम अंदेशे नहीं पैदा करती। भारत स्वयं इसका भुक्तभोगी है। १५ जून‚ २०२० को गलवान घाटी में भारतीय सेना से भीषण संघर्ष के बाद वार्ताओं के अनेक दौरों के बावजूद वह एलएसी के पास पक्के निर्माण करने से तो बाज नहीं ही आ रहा‚ सीमा पर अतिक्रमण कर नये गांव भी बसा ले रहा है। अपने कर्ज के बोझ तले दबे श्रीलंका में हंबनटोटा बंदरगाह का इस्तेमाल करके भी वह भारत की चुनातियां बढ़ा ही रहा है। ऐसे में अमेरिकी कांग्रेस की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी की बहुप्रचारित ताइवान–यात्रा निर्विघ्न सम्पन्न हो जाने के बाद उसके दूसरे यूक्रेन में बदल जान के अंदेशे से परेशान दुनिया ने भले ही थोड़ी राहत की सांस ली है‚ भारत की विदेश नीति एक बड़ी परीक्षा में उलझी हुई है।

जानकारों की मानें तो इस मामले में भारत ने सावधानी से पक्ष चुनकर उपयुक्त कदम नहीं उठाए तो उसको अंतरराष्ट्रीय राजनीति और राजनय में नई उलझनों का सामना करना पड़ सकता है। इस अर्थ में और कि जिस रूस को हम समय की कसौटी पर जांचे–परखे मित्र की संज्ञा देते हैं‚ उसने और पाकिस्तान ने‚ जिसे हम कुटिल पड़ोसी मानते आए हैं‚ चीन का साथ चुनने में तनिक भी देर नहीं लगाई है। उन्होंने दो टूक कह दिया है कि पेलोसी का ताइवान दौरा अमेरिका द्वारा चीन को चिढ़ाने की कोशिश है। उत्तर कोरिया ने भी इस मामले में चीन का ही साथ दिया है‚ और दुनिया फिर से दो गुटों में बंटती दिख रही है। पेलोसी की यात्रा को लेकर दुनिया के माथे पर बल थे तो उसका कारण ताइवान के दूसरा यूक्रेन बन जाने का अंदेशा ही था। यह अंदेशा कितना बड़ा था‚ इसे इस तथ्य से समझ सकते हैं कि यूक्रेन में तो मुकाबला बहुत विषम है‚ और रूस के मुकाबले यूक्रेन की कोई हैसियत ही नहीं है‚ लेकिन ताइवान में विवाद भड़कता तो उसके एक तरफ चीन होता और दूसरी तरफ अमेरिका! हम जानते हैं कि ये दोनों ही महाशक्तियां हैं‚ भिड़ जातीं तो तीसरा विश्व युद्ध भी शुरू हो सकता था। लेकिन अफसोस कि वह खतरा नहीं पैदा हुआ और चीन द्वारा ‘जो आग से खेलेंगे‚ खुद जलेंगे’ वाली अपनी धमकी पर अमल न करने से पेलोसी शांतिपूर्वक ताइवान जाकर लौट आइ तो भारत के युद्धोन्मादियों को जैसे दुनिया का राहत की सांस लेना अच्छा नहीं लग रहा। वे यह कहकर चीन का मजाक उड़़ाने पर उतर आए हैं कि वह कागजी शेर सिद्ध हुआ है। एक प्रेक्षक ने तो उसे चिढ़ाते हुए यहां तक लिख दिया है कि पहले तो वह ऐसे चिंघाड़ रहा था कि जैसे अमेरिकी वायुसेना के जिस विमान से पेलोसी ताइवान जा रही हैं‚ उसको खाड़ी में गिराकर ही मानेगा और पेलोसी का शव समुद्र की लहरों में ढूंढ़ना पड़ेगा। क्या अर्थ है इसकाॽ

RELATED POSTS

2029 के लोकसभा चुनाव में उतरेंगे Gen-Z?

इस्तीफे अक्सर राजनीतिक संदेश होते हैं, करियर का अंत नहीं………………

युद्धोन्मादियों को मजा तभी आता‚ जब कमजोर समझे जाने के डर से चीन कतई संयम न बरतता और ताइवान के अपना अभिन्न अंग होने की मान्यता के तहत पेलोसी के वहां जाने को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन मानते हुए आक्रामक होकर तीसरे विश्व युद्ध का मार्ग प्रशस्त करने लगता। पेलोसी की यात्रा के वक्त उसने जिस तरह ताइवान के चारों तरफ लड़ाकू विमान और जलपोत डटा दिए थे‚ साथ ही अमेरिका ने भी अपने हमलावर विमान‚ प्रक्षेपास्त्र और जलपोत आदि तैनात कर दिए थे‚ उससे गलती से भी किसी तरफ से किसी हथियार का इस्तेमाल हो जाता तो विनाश–लीला छिड़ जाती। ताइवान ने इसी विनाशलीला के अंदेशे में अपने सवा दो करोड़ लोगों को बमबारी से बचाने के भरसक इंतजाम भी किए थे। अब‚ स्वदेशी युद्धोन्मादियों के अविवेकी रवैये के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि कहीं भारतीय विदेश नीति भी उनसे प्रभावित होकर यह समझने से इनकार तो नहीं कर देगी कि ताइवान के मसले पर अमेरिका व चीन का ही नहीं दुनिया के ज्यादातर देशों का रवैया अपने राष्ट्रीय स्वार्थों से प्रेरित रहा है‚ और अमेरिका उसे लेकर चीन के खिलाफ बराबर खम ठोक रहा है तो इसका एक बड़ा कारण दोनों के बीच अरसे से चला आ रहा व्यापार और बाजार पर कब्जे का युद्ध है‚ जो कभी धीमा तो कभी बहुत तेज हो जाता है।

इस पर अमेरिका के निकट उसकी चौधराहट की सबसे बड़ी पूंजी है‚ जिसे वह किसी भी कीमत पर नहीं गंवाना चाहता। साफ कहें तो पिछले दिनों चीन ने हिंद–प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका व भारत समेत चार देशों के चैगुटे की जैसी निंदा की थी‚ उसके मद्देनजर आश्चर्य तब होना चाहिए था‚ जब तिलमिलाया हुआ अमेरिका पेलोसी की ताइवान यात्रा को लेकर नरम रु ख अपनाकर कदम पीछे हटा लेता। जब चीन ने अल–कायदा के सरगना अल–जवाहिरी की हत्या को लेकर भी अमेरिका की आलोचना से परहेज नहीं किया था और सैन्य टकराव की धमकी दे रहा था‚ तो अमेरिका पेलोसी के ताइवान यात्रा के निर्णय से पीछे हटता तो उसकी चौधराहट का जलवा कम होता ही होता। वह ऐसा क्योंकर होने देताॽ प्रसंगवश‚ दुनिया के केवल १३ देश ही महत्वपूर्ण फर्स्ट आइलैंड़ चेन में शुमार ताइवान को अलग व संप्रभु देश मानते हैं। अमेरिका के भी उसके साथ आधिकारिक राजनयिक संबंध नहीं ही हैं‚ लेकिन वह ताइवान रिलेशंस ऐक्ट के तहत उसे आत्मरक्षा के लिए हथियार बेचता है और कतई नहीं चाहता कि वह चीन के कब्जे में जाकर उसके आर्थिक‚ सामरिक व राजनयिक हितों के आड़े जाए क्योंकि इससे चीन पश्चिमी प्रशांत महासागर में अपना दबदबा फिर से बढ़ाकर उसकी चौधराहट के लिए खतरा बन सकता है। इसे यों भी समझ सकते हैं कि अमेरिका ताइवान पर वैसा ही दबदबा दिखाने के फेर में है‚ जैसा श्रीलंका पर चीन। दुर्भाग्य से भारत इन दोनों में से किसी के भी असर से अछूता नहीं रह सकता। इसलिए उसे अपनी विदेश नीति को फिर से परखने की जरूरत है। यह देखने की भी कि न अमेरिका उसका सगा हो सकता है‚ न चीन। समझने की भी कि पिछले कुछ सालों में गुटनिरपेक्षता के सिद्धांत से विचलित होकर‚ पुराने मित्र देशों की नाराजगी की कीमत पर सैन्य और सामरिक शक्तियों के आगे झुकने से उसने क्या–क्या नुकसान झेले हैं‚ और आगे क्या–क्या झेलने पड़ सकते हैं।

  • Facebook
  • X
  • WhatsApp
  • Telegram
  • Email
  • Print
  • Copy Link
UB India News

UB India News

Related Posts

2029 के लोकसभा चुनाव में उतरेंगे Gen-Z?

2029 के लोकसभा चुनाव में उतरेंगे Gen-Z?

by UB India News
July 27, 2026
0

नीट पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर युवा पीढ़ी यानी जेन-जी के प्रदर्शन के बाद पूरे देश...

पेपर लीक पर बढ़ते बवाल के आगे झुकी सरकार, धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा………………….

इस्तीफे अक्सर राजनीतिक संदेश होते हैं, करियर का अंत नहीं………………

by UB India News
July 27, 2026
0

कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के आंदोलन के बाद अंतत: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना...

आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज, सीजेपी प्रवक्ता का दावा- दीपके को हिरासत में लिया

क्या पेपरलीक केवल कानून-व्यवस्था से कहीं अधिक नीतिगत विफलता का परिणाम है ……………….

by UB India News
July 27, 2026
0

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री का कार्यभार संभाल लिया। अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की। इससे...

जेपी मूवमेंट से कितना अलग CJP प्रदर्शन?

जेपी मूवमेंट से कितना अलग CJP प्रदर्शन?

by UB India News
July 25, 2026
0

दिल्ली के जंतर-मंतर पर करीब महीने भर से चल रहा काक्रोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन अब राष्ट्रव्यापी विस्तार ले...

विपक्षी सांसदों का भाजपा में अप्रत्याशित दलबदल क्यों ………………..

विपक्षी सांसदों का भाजपा में अप्रत्याशित दलबदल क्यों ………………..

by UB India News
July 23, 2026
0

पिछले एक महीने में राष्ट्रीय राजनीति तथा संसद का समीकरण जिस तरह से बदला है उसकी कल्पना किसी को नहीं...

Next Post
सारण में अब तक 13 लोगों की मौत, पांच का आइसीयू में इलाज, परिजनों का दावा- शराब पीने से गयी है जान

सारण में अब तक 13 लोगों की मौत, पांच का आइसीयू में इलाज, परिजनों का दावा- शराब पीने से गयी है जान

लव और हॉरर का मिश्रण “हवा ए इश्क” की शूटिंग पूरी ,जल्द होगी दर्शकों के बीच

लव और हॉरर का मिश्रण "हवा ए इश्क" की शूटिंग पूरी ,जल्द होगी दर्शकों के बीच

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • front
  • Home
Contect Us - ubindianews@gmail.com

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password? Sign Up

Create New Account!

Fill the forms below to register

All fields are required. Log In

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
No Result
View All Result
  • front
  • Home

© 2020 ubindianews.com - All Rights Reserved ||

Send this to a friend