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विश्व की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के प्रदर्शन से भारत बहुत ही ज्यादा बेहतर………..

UB India News by UB India News
June 10, 2022
in Lokshbha2024, कारोबार, खास खबर, ब्लॉग
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विश्व की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के प्रदर्शन से भारत बहुत ही ज्यादा बेहतर………..
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राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के अनुसार वित्त वर्ष 2021-22 की अंतिम तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) सालाना आधार पर 4.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा और वित्त वर्ष 2021 में जीडीपी वृद्धि दर 8.7 प्रतिशत रहा, जो पूर्व के अनुमानों के अनुरूप है और यह विश्व की अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के प्रदर्शन से बहुत ही ज्यादा बेहतर है।

बता दें कि महामारी की वजह से वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत पर सीमित रही थी।
एनएसओ ने अपने दूसरे अनुमान में वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 8.9 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान लगाया था, जबकि चीन में वित्त वर्ष 2022 के पहले तीन महीनों में 4.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर्ज की थी। इससे पहले वित्त वर्ष 2022 की तीसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 5.4 प्रतिशत रही थी, जबकि दूसरी तिमाही में 8.5 प्रतिशत और पहली तिमाही में 20.3 प्रतिशत रही थी। मार्च तिमाही में कृषि क्षेत्र में 4.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 0.2 प्रतिशत की कमी देखी गई है। देश में प्रति व्यक्ति आय अभी भी कोरोना से पहले के वित्त वर्ष 2019-20 के स्तर पर नहीं पहुंची है।
वित्त वर्ष 2021-22 में प्रति व्यक्ति आय 1,07,670 रु पये थी, जबकि वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान यह 1,08,247 रु पये थी। बावजूद इसके, पिछले साल के मुकाबले कृषि क्षेत्र में 3 प्रतिशत, माइनिंग में 11.5 प्रतिशत, मैन्युफैक्चरिंग में 9.9 प्रतिशत, बिजली, पानी आपूर्ति, गैस व अन्य सेवाओं में 7.5 प्रतिशत, कंस्ट्रक्शन में 11.5 प्रतिशत, ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट व कम्युनिकेशन में 11.1 प्रतिशत, वित्त, रियल एस्टेट व अन्य पेशवर सेवाओं में 4.2 प्रतिशत और रक्षा व लोक प्रशासन में 12.6 प्रतिशत की क्षेत्रवार वृद्धि दर्ज की गई है। उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2021-22 में वास्तविक जीडीपी का स्तर 147 लाख करोड़ रु पये रहा, जो महामारी के पहले वाले वित्त वर्ष 2019-20 के 145 लाख करोड़ रु पये से कुछ अधिक है। दो वर्षो में 1.5 प्रतिशत का सुधार बताता है कि महामारी के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था बहुत ही जल्द न सिर्फ रिकवरी करने में कामयाब रही, बल्कि दहाई अंक के जीडीपी आंकड़ा को छूने की दिशा में अग्रसर हो गई है। जीडीपी का ऐसा प्रदर्शन तब है, जब कारोबार और परिवहन क्षेत्र में अभी और भी सुधार होना बाकी है।

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वित्त वर्ष 2020-21 में 20.2 प्रतिशत की वृद्धि के बाद 2021-22 में यह केवल 11.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा। अगर इन क्षेत्रों में सुधार गतिविधियों में तेजी आती है तो जीडीपी के आंकड़ों में और भी बेहतरी आएगी। रोजगार और उत्पादन के क्षेत्र में भी अपेक्षित सुधार अभी नहीं हो सका है, जिनमें जल्द-से-जल्द सुधार लाने की जरु रत है, ताकि विकास की रफ्तार को और भी तेज किया जा सके। देखा जाए तो कोरोना महामारी का खौफ अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और भू-राजनैतिक संकट की वजह से विकास का परिदृश्य वैश्विक स्तर पर अनिश्चित बना हुआ है। चीन में ओमीक्रोन के प्रसार और रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला करने से वैश्विक हालात बिगड़े हैं। इन वजहों से वैश्विक अर्थव्यवस्था मुद्रास्फीतिजनित मंदी की ओर बढ़ रही है। ऐसे हालात में भारत की मौजूदा वृद्धि दर को बहुत ही बेहतर माना जाना चाहिए। सरकार का अंतिम खपत व्यय पिछले वित्त वर्ष के जीडीपी के 11.3 प्रतिशत से घटकर 10.7 प्रतिशत (स्थिर मूल्य पर) रह गया है, जबकि सरकार अंतिम खपत व्यय को बढ़ाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है। ऐसा देश एवं विदेश में प्रतिकूल आर्थिक माहौल की वजह से हुआ है। देश का राजकोषीय घाटा 6.7 प्रतिशत है, जो वित्त 2021-22 के 6.9 प्रतिशत के बजट अनुमान के अनुरूप है। अप्रैल महीने में कर संग्रह के आंकड़े भी उत्साह बढ़ाने वाले हैं। इससे भविष्य की कठिनाइयों से निपटने में सरकार को थोड़ी आसानी हो सकती है। साथ ही उसे राजकोषीय घाटा को नियंत्रण में रखने में भी आसानी होगी।
भारत की सेवा गतिविधियों में मई महीने में पिछले 11 साल की तुलना में सबसे तेज विस्तार हुआ है, क्योंकि अर्थव्यवस्था फिर से खुलने के कारण मांग में बहाली और नये कारोबार में वृद्धि से सेवा क्षेत्र को मजबूती मिली है। एसएंडपी ग्लोबल इंडिया सर्विसेज पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) मई महीने में बढ़कर 58.9 पर पहुंच गया, जो अप्रैल में 57.9 था। यह अप्रैल 2011 के बाद का उच्चतम स्तर है। गौरतलब है कि 50 से ऊपर की संख्या विस्तार और इससे कम संकुचन को दर्शाती है। एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट ने वित्त वर्ष 2022-23 में भारतीय अर्थव्यवस्था के वृद्धि अनुमान में 0.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है साथ ही इसके 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। पड़ताल से साफ है जब विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्था कोरोना महामारी के दुष्परिणामों से बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रही है, तब भारत न सिर्फ कोरोना महामारी के नकारात्मक प्रभावों से बाहर आ गया है, बल्कि दहाई अंक के जीडीपी वृद्धि दर को पाने की दिशा में भी तेजी से अग्रसर है।

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