सरकार को जिन बातों को लेकर सतर्कता का उच्चतम स्तर अपनाना चाहिए उन्हें लेकर लापरवाही भरा रवैया कतई उचित नहीं है और चिंतित करने वाला है।
किसी बात को लेकर जारी होने वाले निर्देश कुछ ही घंटों में बदलने पड़ें तो क्या कहा जाए। आधार कार्ड की फोटोकॉपी किसी से साझा न करने की हिदायत वाले बयान को सरकार ने वापस ले लिया लेकिन इससे सबके मन में संदेह उठ रहे हैं, डाटा सुरक्षा के सरकार के दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं। ऐसी हिदायत भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने दी थी कि कोई भी किसी संगठन या व्यक्ति के साथ अपने आधार कार्ड की फोटोकॉपी साझा करने से बचे।
भ्रम फैलने की आशंका को देखते हुए सरकार ने कुछ ही घंटों में यह सलाह वापस ले ली। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि वह यह दिशानिर्देश वापस ले रहा है, क्योंकि इसकी गलत व्याख्या हो सकती है। दरअसल, इस सलाह के तुरंत बाद विपक्षी दलों और लोगों ने सोशल मीडिया पर आधार डाटा की सुरक्षा को लेकर सवाल उठा दिए थे। कहा जाने लगा कि लगता है कि सरकार ने भी मान लिया है कि आधार डाटा लीक होने का अंदेशा है तो यह गंभीर मामला है। भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने इस सलाह पर सवाल उठाए।
कांग्रेस ने भी सवाल उठाते हुए कहा, ‘सारी दुनिया में आधार बंटवाने के बाद सरकार को याद आया कि आधार की फोटोकॉपी का दुरु पयोग हो सकता है, फिर आनन फानन में इस ऑर्डर को वापस ले लिया गया। सरकार है या सर्कस?’ इस पर सरकार की ओर से नया बयान जारी करते हुए कहा गया कि गाइडलाइंस से कई तरह के गलत अर्थ निकाल लिए गए, जिस वजह उसे वापस लिया गया है। सरकार का दावा है कि आधार से जुड़ा डाटा पूरी तरह से सुरक्षित है।
लोगों को विशिष्ट आईडी का इस्तेमाल करते समय सामान्य विवेक का प्रयोग करना चाहिए। सवाल उठता है कि जब बैंक खाता खोलने, किराएदारी सत्यापन, भूमि सौदों, मोबाइल के सिम कार्ड लेने आदि अधिकांश कामों के लिए आधार की अनिवायर्ता के सालों बाद ऐसी सलाहें सामने आएंगी तो कोई इसे क्या समझे। अज जब डाटा सुरक्षा भारी खतरे में है, और इस कारण निजता ही संकट में है, तो सरकार को इस बारे में अत्यंत सचेत रहना चाहिए।







