विधानसभा की बोचहां सीट (सुरक्षित) राजद ने जीत ली है। शनिवार को इस उपचुनाव के लिए मतगणना हुई‚ जिसमें राजद उम्मीदवार अमर पासवान ने एकतरफा जीत हासिल की। राज्य निर्वाचन कार्यालय के अनुसार‚ राजद के अमर पासवान ने भाजपा की बेबी कुमारी को लगभग ३६६५३ मतों के अंतर से पराजित किया। राजद ने यह सीट विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) से छीनी है।
वीआईपी की प्रत्याशी गीता कुमारी तीसरे स्थान पर रहीं। राजद प्रत्याशी अमर पासवान को लगभग ८२५६२ मत मिले‚ जबकि भाजपा की प्रत्याशी बेबी कुमारी को ४५९०९ और वीआईपी की गीता कुमारी को २९२७९ मत। उल्लेखनीय है कि वीआईपी के विधायक रहे मुसाफिर पासवान के असामयिक निधन के कारण रिक्त हुई बोचहां (सु.) सीट के लिए उपचुनाव कराया गया है। पिछले चुनाव में वीआईपी के मुसाफिर पासवान राजग के उम्मीदवार थे‚ लेकिन वीआईपी इस बार राजग से अलग हो गई। राजग से भाजपा की बेबी कुमारी उम्मीदवार थीं‚ जबकि स्व.मुसाफिर पासवान के पुत्र अमर पासवान को राजद ने अपना उम्मीदवार बनाया था। वीआईपी की गीता कुमारी राजद के पूर्व नेता व पूर्व मंत्री रमई राम की पुत्री हैं। २५ राउंड की मतगणना में अमर पासवान को ८२५४७‚ बीजेपी की बेबी कुमारी को ४५८८९‚ वीआईपी की गीता कुमारी को २९२७६ और कांग्रेस के तरुण चौधरी को १३३६ मिले। ‘नोटा’ में २९६६ वोट पड़े़ हैं। राजद और भाजपा के बीच वोटों का अंतर ३६‚६५८ रहा। चुनाव परिणाम से खुश नजर आये अमर पासवान ने इसे पूरी तरह से जनता की जीत बताया। उल्लेखनीय है कि यह वही सीट है‚ जिसे लेकर वीआईपी और भाजपा आमने–सामने आ गई थी। इसके बाद इस सीट का राजनीतिक महत्व काफी बढ गया था। भाजपा ने इस सीट पर कब्जा जमाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। इससे इतर‚ इस सीट पर चुनाव वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी के लिए अग्निपरीक्षा थी‚ लेकिन जंग भाजपा और राजद के बीच ही हुई और मुकेश सहनी की पार्टी यहां तीसरे नंबर पर ही अटक गई। यानी अग्निपरीक्षा में मुकेश सहनी यहां असफल रहे। इस बीच‚ मुकेश सहनी की पार्टी के नेताओं के दावे भी सामने आ रहे हैं। मुकेश सहनी का कहना है कि इस चुनाव में भाजपा को वीआईपी के कारण हार मिली‚ लेकिन उनका यह दावा सच से कोसों दूर दिख रहा है। मुकेश सहनी ने इस सीट के लिए ९ बार विधायक रह चुके पूर्व मंत्री व राजद के कद्ावर नेता रमई राम की बेटी गीता कुमारी को टिकट दिया था। बोचहां क्षेत्र पर रमई राम की मजबूत पकड़ रही है। लिहाजा गीता देवी को वोट मिले‚ जिसके कारण रमई राम के भरोसे मुकेश सहनी ने भाजपा को थोड़ा ड़ैमेज जरूर कर दिया‚ लेकिन यह कहना गलत होगा कि भाजपा को वीआईपी की वजह से पराजय झेलनी पड़़ी।
बोचहां उपचुनाव में भूमिहारों की नाराजगी भाजपा को भारी पड़ गई। भाजपा का शत–प्रतिशत वोट बैंक माने जाने वाले भूमिहार जाति के लोगों ने इस बार भाजपा को सिरे से खारिज कर दिया। जिस वोट बैंक ने पिछले ४२ वर्षों से भाजपा का साथ नहीं छोड़ा था‚ वह इसबार कई कारणों से भाजपा के हाथों से निकल गया‚ जिसका खामियाजा उसे बोचहां विधानसभा उपचुनाव में भुगतना पड़ा है। इस चुनाव परिणाम ने भाजपा के लिए भीषण संकट भी खड़ा कर दिया है। ११ विधानसभा और दो लोकसभा सीटों वाले मुजफ्फरपुर में भाजपा का सबसे बड़ा वोट बैंक दरक गया है। भाजपा के ही कुछ लोगों ने वह काम कर दिया है‚ जो दूसरी पार्टियां बहुत कोशिश करके भी नहीं कर पायी थीं। १९९० के बाद से मुजफ्फरपुर जिले में भूमिहारों का पूरा वोट भाजपा को ही मिलता आया है।







