बिहार में दो साल बाद रामनवमी रविवार को धूमधाम से मनाई जा रही है। पिछले दो सालों से कोरोना काल की वजह से कार्यक्रम इतने भव्य रूप से नहीं मनाया गया था। सुबह से पटना जंक्शन स्थित महावीर मंदिर परिसर के बाहर श्रद्धालु सुबह 5 बजे से ही कतार में लग गए। देखते-देखते श्रद्धालुओं की कतार 3 किलोमीटर लंबी लग गई। यहां लाइन में लगे युवाओं ने कहा कि वे नौकरी की मन्नत लेकर आए हैं। इसके अलावा खगड़िया और अररिया समेत कई जिलों में सुबह से ही मंदिरों भीड़ देखी जा रही है। भगवान हनुमान के दर्शन के लिए सभी कतारबद्ध होकर पंक्ति में खड़े हैं। इस दौरान प्रशासन द्वारा सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।

रामनवमी की पूरे बिहार में धूम है। रविवार की सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। मंदिर परिसर महावीरी झंडे से पट पड़ा है। पटना के महावीर मंदिर में तो शनिवार शाम 8 बजे से ही श्रद्धालु कतार में लगने लगे। रात 10 बजे तक भक्तों की लाइन महावीर मंदिर से वीर कुंवर सिंह पार्क तक पहुंच गई। इधर, सुरक्षा के मद्देनजर चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। शाम विभिन्न जगहों पर शोभा यात्रा निकाली जाएगी।




ऐसी है मंदिर में दर्शन की व्यवस्था
भगवान हनुमान के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की दो कतारें लगवाई गई हैं। एक लाइन में महिलाएं तो दूसरी लाइन में पुरुष हैं। मंदिर में प्रवेश करने के लिए एक ही द्वार बनाया गया है। जहां पहले कुछ महिलाओं को प्रवेश करवाया जाता है तो फिर कुछ पुरुषों को। फिर दर्शन करने के बाद मंदिर के पीछे के रास्ते से निकलने की सुविधा बनाई गई है।

इसके अलावा मंदिर के बाहर एक नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। यहां से मंदिर प्रांगण के आसपास की विधि व्यवस्था भंग न हो उसकी नजर रखी जा रही हैं। वही मंदिर के ठीक बाहर स्वास्थ्य शिविर भी लगाया गया है, ताकि आगे किसी श्रद्धालु को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी जो तो वह उनका ख्याल रखा जा सकता है। राजधानी पटना के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर के परिसर में ड्रोन के माध्यम से पुष्प की वर्षा की जाएगी। इस कार्यक्रम का आयोजन आज दोपहर 12 बजे किया जाएगा। इसको देखने के लिए लाखों लोगों की भीड़ उमड़ेगी।


जानकारी के मुताबिक रामनवमी को लेकर पटना के अलग-अलग समितियों के द्वारा एक के बाद एक 45 झांकियां डाकबंगला पहुंचेंगी। पटना शहर के विभिन्न मोहल्लों से निकलने वाली मनमोहक और प्रभु श्रीराम के जीवन चरित्र को प्रदर्शित करने वाली प्रेरक झांकिया इस शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण होगी।

इस बार जन जागृति के उद्देश्य से पूरे शहर में लगभग 65 हजार छोटे बड़े झंडों से राममय बनाने की तैयारी है और इसके साथ ही चंदन नगर कोलकाता के द्वारा बीस तोरण द्वार बनाने का कार्य शुरू हो चुका है। इसके अलावा बनारस से डमरू बजाने वालों को भी आमंत्रित किया गया है। डाक बंगला चौराहा पर अलौकिक आरती के लिए गंगा आरती के विशेष टीम को भी बुलाया जा रहा है। मुख्य आयोजन स्थल पर बिहार के महामहिम राज्यपाल फागु चौहान, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलावे कई राजनीतिनिक, कार्यकर्ता के मौजूद रहने की संभावना है।

खगड़िया में सुबह से ही मंदिरों में उमड़ी भीड़
दुलारिया महावीर मंदिर खगड़िया में सुबह से भक्तों की भीड़ जुटने लगी। इस मंदिर की कथा पौराणिक है। कहा जाता है कि करीब 200 वर्ष पहले यहां एक दुलरिया नाम की लड़की सड़क पर रहती थी। जिसे एक दिन हनुमान जी की मूर्ति उक्त स्थल पर मिली। उसी के द्वारा यहां हनुमान जी को स्थापित किया गया। यहां मन्नत की पूर्ति होती है।
पटना के हनुमान मंदिर में दर्शन करने के लिए कतार बद्ध श्रद्धालुओं को नियंत्रित रखने में पुलिस प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। वीर कुंवर सिंह पार्क के गेट नंबर 2 पर श्रद्धालुओं को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग तक करना पड़ा। गेट नंबर 2 से निकलकर श्रद्धालु जीपीओ गोलंबर होते हुए हनुमान मंदिर जाने का रूट था। लेकिन भीड़ को देखते हुए गेट नंबर 2 पर पुलिस ने सुबह 4 बजे श्रद्धालुओं को रोक दिया।
थोड़ी देर में वीर गेट नंबर 2 के पास इतनी बढ़ गई कि पुलिस को भी रोकना मुश्किल हो गया। श्रद्धालुओं की भीड़ जय श्रीराम के नारे लगाते सुबह लगभग 4:15 बजे बेकाबू हो गई और गेट नंबर 2 के पास लगी बैरिकेडिंग को तोड़ डाला। स्थिति को काबू में करने के लिए एसएसपी पटना आधा दर्जन प्रतिनियुक्त दंडाधिकारीयों के साथ-साथ आरिफ और पुलिस बल को काफी मशक्कत करना पड़ा। लगभग 1 घंटे के प्रयास के बाद 5:15 बजे पुलिस ने श्रद्धालुओं के बेतरतीब हो चुके कतार को व्यवस्थित कर सके और भीड़ को काबू में करने में सफल रही। इससे एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया है।
पटना का महावीर मंदिर: यहां रखा रामसेतु का तैरता पत्थर
सबसे पहले बात भारत के प्रसिद्ध पटना के महावीर मंदिर की। रामनवमी के दिन यहां अयोध्या की हनुमानगढ़ी के बाद सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती रही है। साल 1730 में स्वामी बालानंद द्वारा स्थापित यह मंदिर साल 1900 तक रामानंद संप्रदाय के अधीन था। फिर, 1948 में पटना हाइकोर्ट द्वारा सार्वजनिक मंदिर घोषित किए जाने तक इसपर गोसाईं संप्रदाय का अधिकार रहा। वर्तमान मंदिर का निर्माण आचार्य किशोर कुणाल के प्रयास से 1983 से 1985 के बीच आरंभ हुआ। इस भव्य मंदिर के गर्भगृह में भगवान हनुमान की मूर्तियां हैं। खास बात यी है कि अन्य मंदिरों से हटकर यहां बजरंग बली की युग्म मूर्तियां एक साथ हैं। एक मूर्ति परित्राणाय साधुनाम् (अर्थात अच्छे लोगों के कारज पूर्ण करने वाली) तो दूसरी विनाशाय च दुष्कृताम्बु (अर्थात बुरे लोगों की बुराई दूर करने वाली) है। यहां 15 किलो का रामसेतु का पानी में तैरता पत्थर कांच के बर्तन में रखा है।
अहिल्या देवी मंदिर: यहां श्रीराम ने किया था अहिल्या का उद्धार
द्बिहार के दरभंगा जिला में एक गांव है- अहियारी। यह अहिल्या स्थान के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि यहां भगवान श्रीराम ने ऋषि विश्वामित्र के कहने पर गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या का उद्धार किया था। इसके निकट हीं भोजपुर स्थान के बारे में मान्यता है कि वहां श्रीराम ने ताड़का वध किया था। इस स्थान पर अहिल्या देवी का मंदिर है। इस मंदिर के परिसर में भगवान श्रीराम, माता सीता व लक्ष्मण के मंदिर भी हैं। हर साल रामनवमी के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।







