आज संसद में एक बार फिर से हंगामा होने के आसार हैं। राज्यसभा के निलंबित 12 विपक्षी सांसदों का क्या होगा, आज साफ हो जाएगा लेकिन विपक्ष का कहना है कि ये तानाशाही है। एक ओर आज 12 सांसदों को निलंबन पर आगे की रणनीति तय करने के लिए विपक्षी दलों की बैठक है तो दूसरी ओर सरकारी सूत्रों के मुताबिक, ये भी खबर आ रही है कि निलंबित सासंद राज्यसभा के चेयरमैन वैंकया नायडू से मिलकर माफी मांग सकते हैं। संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी कहा है कि अगर माफीनामे का कोई नोटिस आता है तो विचार किया जा सकता है। आपको बता दें कि संसद के मानसून सेशन में अशोभनीय आचरण के आरोप में राज्यसभा के 12 सांसदों को पूरे शीत सत्र के लिए सस्पेंड कर दिया गया है । ये कार्रवाई 9,10 और 11 अगस्त को मानसून सत्र के दौरान हुई हिंसा और अभद्र व्यवहार की वजह से की गई है।
कांग्रेस, DMK और नेशनल कांफ्रेंस के वाकआउट के बाद लोकसभा दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित किया गया।
कल भी हमने उनसे कहा कि आप लोग माफी मांग लीजिए, खेद व्यक्त कीजिए। लेकिन उन्होंने इसे खारिज कर दिया, साफ इनकार किया। इसलिए मज़बूरी में हमें ये फैसला लेना पड़ा। उन्हें सदन में माफी मांगनी चाहिए: 12 सांसदों के निलंबन पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी
सारा देश इस बात का साक्षी है कि प्रधानमंत्री मोदी किसानों के प्रति और कृषि के प्रति प्रतिबद्ध हैं और रहेंगे। उनके 7 साल के कार्यकाल में जो ऐतिहासिक काम कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए हुए हैं, वे पहले कभी भी कांग्रेस सरकार में नहीं हुए: केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर
जिन 12 सांसदों को सस्पेंड किया गया है, उनमें सबसे ज्यादा कांग्रेस के हैं। कांग्रेस के 6 सांसदों को निलंबित किया गया है । कांग्रेस की फूलो देवी नेताम, छाया वर्मा, रिपुन बोरा, राजमणि पटेल, सैयद नासिर हुसैन, अखिलेश प्रसाद सिंह है। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस की दो सांसद हैं। डोला सेन और शांता छेत्री है। डोला सेन तो 2021 में दो बार सस्पेंड हो चुकी हैं। शिवसेना के भी दो सांसदों को सस्पेंड किया गया है- अनिल देसाई और प्रियंका चतुर्वेदी। इसके अलावा लेफ्ट के दो सांसद ई करीम और बिनॉय विश्वम भी निलंबित किए जा चुके हैं।
निलंबन के पीछे सरकार तीन मुख्य वजहें
संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी के मुताबिक 9 अगस्त, 10 अगस्त और 11 अगस्त को विरोध करते-करते विपक्ष के सांसदों ने संसदीय परंपराओं को भी कुचल दिया था । राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को लिखे गए पत्र में उन्होंने लिखा है कि मॉनसून सत्र के दौरान सदन के काम में बाधा डाली गई थी, हिंसा की गई और सुरक्षाकर्मियों पर भी हमला किया गया। सदन की कार्यवाही को रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया। टेबल पर डांस हुआ , फाइलें फेंकी गई, सीटी बजाई गई…जिसकी वजह से सदन की गरिमा को ठेस पहुंची। संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने ये भी कहा कि….भविष्य में ऐसी घटना ना हो इसलिए ऐसा फैसला किया गया है।







