लोकसभा और राज्यसभा में पेपर लीक के मुद्दे पर प्रदर्शन और लाठीचार्ज को लेकर तीसरे दिन भी बहस नहीं हो पाई. संसद को स्थगित करने से पहले लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला ने कहा- सरकार और विपक्ष दोनों बहस चाहती है. आप लोग एक साथ बैठिए और इसे तय करिए. हालांकि, इसके बाद हंगाम को देखते हुए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई. राज्यसभा का मामला भी कुछ इसी तरह का रहा. राज्यसभा सरकार की तरफ से लीडर जेपी नड्डा ने कहा कि हम चर्चा के लिए तैयार हैं.
सवाल उठ रहा है कि जब सरकार और विपक्ष दोनों पेपर लीक पर चर्चा के लिए तैयार है, तो फिर पेपर लीक मामले पर सदन में चर्चा क्यों नहीं हो पा रही है? आखिर तीसरे दिन भी संसद की कार्यवाही स्थगित क्यों कर दी गई?
चर्चा के लिए सब तैयार, 3 बयान
1. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि सरकार पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा के लिए पहले दिन से तैयार है. हम इस पर बहस चाहते हैं.
2. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि चर्चा जरूरी है. सरकार पहले मंत्री का इस्तीफा ले और फिर सदन में इस मुद्दे पर चर्चा कराए. सरकार बताए कि आने वाले समय में पेपर लीक रोकने के लिए उसके पास क्या तैयारी है.
3. कन्नौज से सांसद और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने लोकसभा में कहा कि मंत्री का इस्तीफा तो कभी भी लिया जा सकता है. बहस इस बात पर होनी चाहिए कि बच्चों को क्यों मारा गया? लड़कियों पर अत्याचार क्यों हुआ?
बड़ा सवाल- फिर चर्चा क्यों नहीं हो पा रही?
पेपर लीक पर हंगामे को लेकर 3 दिन से संसद का कामकाज ठप है. संसद में इस पर चर्चा नहीं हो पा रही है. मंगलवार (21 जुलाई) को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे 2 मुख्यमंत्री और सांसदों की टीम के साथ पीएम आवास पर धरना देने पहुंच गए. यहां बाद में सपा मुखिया अखिलेश यादव भी पहुंचे.
राज्यसभा में रुल 267 के तहत चर्चा, क्यों?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश के मुताबिक राज्यसभा में विपक्ष नियम 267 के तहत चर्चा चाहती है. इसके लिए नोटिस भी दिए गए हैं.
1. राज्यसभा में इस नियम के तहत अगर चर्चा की शुरुआत होती है तो सबसे पहले प्रधानमंत्री या संबंधित विभाग के मंत्री को उक्त विषय पर बयान देना पड़ता है. इसके बाद सांसद अपना पक्ष रखते हैं. आखिर में सरकार का जवाब आता है.
2. रुल 267 के तहत चर्चा होने पर उस दिन के सभी कामकाज को रोक दिया जाता है. इससे यह संदेश जाता है कि देश में यह सबसे गंभीर मुद्दा है. विपक्ष अक्सर दबाव बनाने के लिए इस नियम के तहत चर्चा की मांग करती है.
लोकसभा में चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव, क्यों?
कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के मुताबिक स्थगन प्रस्ताव के तहत हम चर्चा चाहते हैं. सरकार को हमने बता दिया है, लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं है. इसके तहत चर्चा क्यों चाहती है कांग्रेस?
1. लोकसभा में यह एक असाधारण व्यवस्था है. इस प्रस्ताव पर अगर सहमति बनती है तो लोकसभा के सारे कामकाज रोक दिए जाते हैं. इस प्रस्ताव को पर चर्चा के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जरूरी है. यानी 50 सांसद साइन करके प्रस्ताव को भेजेंगे, उसके बाद इस पर फैसला हो सकता है.
2. इस प्रस्ताव के तहत चर्चा का मतलब है कि सरकार संबंधित विषय पर घिरी हुई है या उसकी स्थिति कमजोर है. इसे सरकार की कमजोरी के तौर पर देखा जाता है. इसलिए सरकार इस नियम के तहत चर्चा नहीं चाहती है. विपक्ष इस प्रस्ताव के जरिए बहस में निंदा तत्व को भी शामिल कर लेती है.
3. कांग्रेस की एक मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी है. कांग्रेस का कहना है कि पहले मंत्री इस्तीफा दे, फिर इस बार आगे की बातचीत होगी. वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने छात्रों पर लाठीचार्ज का मुद्दा उठाया.
संसद में चर्चा जरूरी क्यों?
संसद को लोकतंत्र का मंदिर कहा जाता है. यहां पर सरकार अपना पक्ष रखती है. वहीं विपक्ष सरकार से जवाब मांगती है. किसी भी जरूरी मुद्दे पर यहां बहस की जाती है. बहस के दौरान सरकार तथ्यात्मक रूप से अपना पक्ष रखती है. नीति के बारे में लोगों को जानकारी देती है.
संसद में जो बहस होती है, वो रिकॉर्ड में होता है. उसे भविष्य के लिए दर्ज किया जाता है. सरकार और विपक्ष की इससे जवाबदेही बढ़ती है.





