21 जुलाई 2026 को जब राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे, तो कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और सोनम वांगचुक के आंदोलन ने एक नया मोड़ लिया. NEET पेपर लीक और पुलिस कार्रवाई के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन, अचानक कांग्रेस के ‘किले’ में तब्दील होता नजर आने लगा. अब सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी के दखल ने इस आंदोलन को कांग्रेस का बना दिया है?
CJP आंदोलन: शुरुआत और पहचान
CJP और सोनम वांगचुक का आंदोलन NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ था. यह आंदोलन डिजिटल था. इसकी पहचान सोशल मीडिया, ऑनलाइन याचिकाएं और युवाओं की जुड़ाव थी. इसका कोई राजनीतिक चेहरा नहीं था. CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने साफ कहा था, ‘हमें कोई राजनीतिक दल नहीं चाहिए, हमें बस इंसाफ चाहिए.’ सोनम वांगचुक ने भी किसी राजनीतिक पार्टी से दूरी बनाए रखी थी. यही इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत थी. यह जनता का आंदोलन था, किसी पार्टी का नहीं.
तो फिर कांग्रेस के दखल से क्या बदल गया?
21 जुलाई 2026 को कांग्रेस ने अपना सबसे बड़ा राजनीतिक कदम उठाया. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, के.सी. वेणुगोपाल और पवन खेड़ा PM आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) के बाहर धरने पर बैठ गए. उनकी मांगें थीं:
- प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का इस्तीफा: 20 जुलाई को छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के लिए.
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: NEET पेपर लीक के मामले में.
- संसद में चर्चा: 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई पर विस्तृत चर्चा.
राहुल गांधी ने कहा, ‘हम कल की युवाओं के खिलाफ हुई क्रूरता का जवाब मांगने PM मोदी के घर आए हैं. PM और गृह मंत्री को भारत के युवाओं का भविष्य बर्बाद करने के लिए इस्तीफा देना चाहिए.’
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को ‘सबसे युवा विरोधी प्रधानमंत्री’ करार दिया. उन्होंने यह भी कहा कि देशभर में 152 परीक्षा पेपर लीक हुए हैं, जिससे 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं. दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस के कई नेताओं को धरना स्थल से हिरासत में ले लिया. हालांकि, देर रात तक सभी नेताओं को रिहाई मिल गई.
इस पूरे मामले पर एक्सपर्ट्स की राय भी पढ़ते हुए चलें:
1. ‘कांग्रेस ने आंदोलन को हाईजैक किया’
पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई के मुताबिक, ‘CJP और सोनम वांगचुक का आंदोलन एक ग्रासरूट आंदोलन था, लेकिन कांग्रेस ने इसे अपने राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बना लिया है. कांग्रेस का मकसद साफ है कि 2027 के चुनाव से पहले युवाओं और छात्रों को अपनी तरफ करना.’ उनका कहना है, ‘कांग्रेस का दखल आंदोलन को ताकत तो देगा, लेकिन उसकी ‘अराजनीतिक’ पहचान खत्म कर देगा.’
2. ‘आंदोलन ने कांग्रेस को मौका दिया’
रशीद किदवई कहते हैं, ‘CJP ने खुद कहा था हमें कोई राजनीतिक दल नहीं चाहिए. लेकिन जब पुलिस ने लाठीचार्ज किया और छात्रों को पीटा, तो आंदोलन को एक राजनीतिक सहारे की जरूरत थी. कांग्रेस ने वह मौका भांप लिया. अब यह आंदोलन कांग्रेस के बिना नहीं चल सकता, लेकिन कांग्रेस इस आंदोलन के बिना भी चल सकती है.’
3. ‘कांग्रेस की जमीन पर खड़ा हो गया आंदोलन’
CSDS के संजय कुमार कहते हैं, ‘CJP आंदोलन अब पूरी तरह से कांग्रेस के कब्जे में आ गया है. राहुल गांधी ने इसे अपनी ‘नेशनल पॉलिटिक्स’ का हिस्सा बना लिया है. यह आंदोलन अब ‘जनता का आंदोलन’ नहीं रहा, बल्कि ‘कांग्रेस का आंदोलन’ बन गया है.’
4. ‘CJP का किला, कांग्रेस की छाया’
रशीद किदवई का कहना है, ‘CJP आंदोलन अभी भी अपनी जमीन पर खड़ा है, लेकिन कांग्रेस ने उस पर अपनी छाया डाल दी है. अब CJP और कांग्रेस को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता. हालांकि, CJP के नेता अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक अभी भी ‘अराजनीतिक’ बने हुए हैं. लेकिन कांग्रेस का समर्थन उनकी ‘निष्पक्ष’ छवि को कमजोर कर रहा है.’
5. ‘कांग्रेस ने आंदोलन को वैधता दी’
दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और पॉलिटिकल एक्सपर्ट मिथिलेश कुमार के मुताबिक, ‘कांग्रेस का दखल आंदोलन को एक ‘राष्ट्रीय मुद्दा’ बनाने में मदद करेगा. लेकिन यह दोधारी तलवार है. कांग्रेस का समर्थन आंदोलन को जितना ताकत देगा, उतना ही इसे ‘राजनीतिक’ भी बनाएगा.’
कांग्रेस की राजनीति: एक बड़ी चाल बन गई?
राहुल गांधी और कांग्रेस ने इस आंदोलन को अपनी राजनीति का हिस्सा बनाकर तीन बड़े टारगेट हासिल किए हैं:
- युवाओं से जुड़ाव: 2027 के चुनाव से पहले कांग्रेस ने युवाओं और छात्रों को अपनी तरफ करने की कोशिश की है.
- विपक्षी एकजुटता: कांग्रेस ने INDIA गठबंधन को एक नया मुद्दा दिया है. अगर अन्य दल भी इस आंदोलन का समर्थन करते हैं, तो यह सरकार के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा बन सकता है.
- सरकार पर दबाव: राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग करके सरकार पर सीधा दबाव बनाया है.
तो क्या अब यह आंदोलन पूरी तरह कांग्रेसी हो गया है?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आंदोलन पूरी तरह से नहीं, लेकिन काफी हद तक हो गया है. CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक अभी भी खुद को ‘अराजनीतिक’ बताते हैं. लेकिन कांग्रेस का समर्थन और राहुल गांधी का दखल इस आंदोलन को एक राजनीतिक रंग दे चुका है.
हालांकि, यह कहना भी गलत नहीं है कि CJP की जमीन पर कांग्रेस का किला खड़ा हो गया है. CJP अब कांग्रेस के बिना नहीं चल सकता है. कांग्रेस ने इस आंदोलन को अपना ‘किला’ बना लिया है और अब CJP इस किले का हिस्सा बन गया है. अब आगे तीन बड़ी संभावनाएं हैं:
- INDIA गठबंधन का और मजबूत होना: अगर अन्य दल (SP, TMC, DMK) भी इस आंदोलन का समर्थन करते हैं, तो यह सरकार के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा बन सकता है.
- सरकार का और सख्त रुख: सरकार किसी भी कीमत पर इस्तीफा नहीं देगी. वह CJP और कांग्रेस को ‘तोड़फोड़’ और ‘साजिश’ करार दे सकती है.
- आंदोलन का ‘कांग्रेसीकरण’: CJP का ‘अराजनीतिक’ होने का नारा धीरे-धीरे खत्म हो सकता है. यह आंदोलन कांग्रेस के चुनावी एजेंडे का हिस्सा बन सकता है.







