मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में सोमवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के विधानमंडल दल की बैठक हुई‚ जिसमें घटक दलों के मंत्रियों‚ विधायकों एवं विधान पार्षदों ने शराबबंदी के लिए अपनी प्रतिबद्धता दुहराई और इसके पक्ष में संकल्प लिया। सभी ने हाथ उठाकर शराबबंदी का पुरजोर समर्थन किया। विधानमंडल के विस्तारित भवन के सेंट्रल हॉल में आयोजित इस बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ण शराबबंदी प्रदेश में वरदान साबित हुई है। कुछ लोग ऐसे ही इसका विरोध करते हैं। उन्हें इसके सकारात्मक परिणाम का अंदाजा नहीं है। शराबबंदी कानून पूरी सख्ती से लागू है और इसके छिटपुट विरोध का मुझपर किसी तरह का असर नहीं पड़ने वाला है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी की उपलब्धि सामाजिक बदलाव है और यह सभी क्षेत्रों में दिखाई भी पड़ रहा है। इसके लागू होने से राज्य में अपराध के साथ ही दुर्घटना की संख्या में भी कमी हुई है। उन्होंने कहा कि इससे जहां पारिवारिक विवाद कम हुए हैं‚ वहीं लोगों के स्वास्थ्य में भी सुधर हुआ है। मुख्यमंत्री ने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव का नाम लिये बगैर कहा‚ ‘लोग क्या–क्या बोल रहे हैं और यही लोग हैं‚ जो शराबबंदी के लिए पटना के गांधी मैदान में आयोजित मानव श्रृंखला में मुझसे सटकर फोटो खिंचवा रहे थे।’
उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि जब शराबबंदी है‚ तो शराब पीने की क्या जरूरत है। इस मौके पर कुछ सदस्यों ने अपने–अपने क्षेत्रों की समस्याएं मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं। सदस्यों की शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने चिंता प्रकट करते हुए भरोसा दिया कि सब मामलों पर कारवाई होगी। लिखित शिकायत दें। शीत सत्र के पहले दिन सेंट्रल हॉल में आयोजित एनड़ीए विधायक दल की बैठक में सभी विधायकों को सदन में मौजूद रहने की सलाह दी गई। पांच दिनों के अल्पकालीन सत्र में तीन विधायक प्रस्तुत किये जायेंगे और इस दौरान सदस्यों की मौजूदगी आवश्यक है। बैठक में शराबबंदी के मसले पर प्रशासन को पूरा सहयोग देने की भी सलाह दी गई। एनड़ीए की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार‚ उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद‚ रेणु देवी‚ शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी‚ पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी‚ पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी समेत मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य मौजूद रहे। एनड़ीए के सभी घटक दल के सदस्यों ने एनड़ीए की बैठक में भाग लिया॥।







