मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अधिकारियों को राज्य में बारिश के कारण पिछले दो–तीन दिन में हुई फसल क्षति का आंकलन करने का निर्देश दिया। नीतीश ने बुधवार को यहां एक‚ अणे मार्ग स्थित संकल्प में आपदा प्रबंधन विभाग‚ जल संसाधन विभाग एवं कृषि विभाग के साथ आयोजित बैठक में कहा कि पिछले पांच–छह माह से लगातार बारिश हुई है। राज्य में इस मॉनसून अवधि के दौरान चार चरणों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई। बाढ़ के दौरान राहत एवं बचाव कार्य पूरी मुस्तैदी के साथ किया गया।
उन्होंने कहा कि १५ अक्टूबर के पहले सभी जगह की रिपोर्ट लेकर हुई फसल क्षति का आकलन किया गया और उन्हें मुआवजा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पिछले दो–तीन दिनों में भी वर्षा के कारण हुई फसल क्षति का फिर से एक बार आकलन कर लें। कोई भी प्रभावित क्षेत्र छूटे नहीं। सभी गांवों में हुयी फसल क्षति की जानकारी लें। उन्होंने कहा कि वर्ष २००७ से आपदा की स्थिति में लोगों को हर प्रकार से सहायता की जा रही है। नीतीश ने कहा कि जल संसाधन विभाग को दो भागों में बांटा गया है ताकि सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण का कार्य ठीक ढंग से किया जा सके। सिंचाई कार्य को ठीक से देखने के साथ–साथ जल संसाधन विभाग बाढ़ से बचाव के स्थायी समाधान के लिए कार्य करे। जिन नदियों के किनारे तटबंधों का निर्माण बचा हुआ है उनका निर्माण कार्य जल्दी पूरा करें। उन्होंने कहा कि नदियों की उड़ाही के लिए योजना बनाकर काम करें। छोटी–छोटी नदियों को भी जोड़ने की योजना बनाएं ताकि जल संरक्षण हो सके और उससे सिंचाई कार्य में किसानों को काफी सुविधा हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की लगभग ७४ प्रतिशत आबादी की आजीविका का आधार कृषि है।
हमलोग कृषि के क्षेत्र में कई कार्य किए हैं‚ फसलों का उत्पादन और उत्पादकता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि अधिप्राप्ति का काम भी अच्छे से हो रहा है और लोगों की आमदनी बढ़ी है। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार एवं चंचल कुमार‚ जल संसाधन विभाग के सचिव संजीव हंस‚ कृषि विभाग के सचिव एन. सरवन कुमार‚ आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव संजय कुमार अग्रवाल एवं मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार उपस्थित थे।







