पंजाब में कांग्रेस की बुरी तरह भद पिटने के बाद कांग्रेस के भीतर से जो प्रतिक्रियाएं आई हैं‚ वे गंभीर भी हैं‚ और विचारोत्तेजक भी। यदि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व उचित संज्ञान नहीं लेती है तो इन प्रतिक्रियाओं ने पार्टी के संकट को मूर्त रूप प्रदान कर दिया है। जहां गुलाम नबी आजाद ने सोनिया गांधी को पत्र लिख कर कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक बुलाने की मांग की है‚ तो दूसरी ओर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने संवाददाता सम्मेलन बुलाकर जो सवाल खड़े़ किए हैं‚ वे सीधे–सीधे कांग्रेस के अस्तित्व से जुड़े़ हैं। कपिल सिब्बल ने शीर्ष नेतृत्व की निर्णय क्षमता और उसके दायित्वबोध पर सीधी टिप्पणी करते हुए कहा है कि एक अरसे से कांग्रेस का अध्यक्ष पद खाली है और इसके न भरे जाने की भारी कीमत पार्टी को चुकानी पड़़ रही है। वस्तुतः कपिल सिब्बल का कथन अकेले उनका नहीं है‚ बल्कि उन सभी वरिष्ठ कांग्रेसियों का है जो वर्षों से कांग्रेस से जुड़े़ हुए हैं और कांग्रेस के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। इन नेताओं की राय में सोनिया गांधी भले ही अंतरिम अध्यक्ष हैं लेकिन सारे निर्णय राहुल गांधी और प्रियंका गांधी द्वारा लिये जा रहे हैं। ये लोग निर्णय तो लेते हैं लेकिन उसके परिणामों की जिम्मेदारी लेने से कतराते हैं। पंजाब में हुई दुर्गति नेतृत्व क्षमता की अपरिपक्वता के कारण ही हुई। सक्षम कांग्रेसी नेताओं की इन प्रतिक्रियाओं के बाद वर्तमान शीर्ष कांग्रेस नेतृत्व को संभल जाना चाहिए और तत्काल वांछित कदम उठाने चाहिए। अन्यथा कांग्रेस का लड़़खड़़ाता भविष्य गहरे अंधकार का शिकार हो जाएगा। कांग्रेस इस समय भी देश की सबसे बड़़ी विपक्षी पार्टी है। उसकी कमजोरियों का फायदा तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी जैसी सीमित प्रभाव वाली पार्टियां उठा रही हैं। कांग्रेस की कीमत पर विपक्ष के तौर पर क्षेत्रीय पार्टियों के उभरने से विपक्ष उतना मजबूत नहीं रह जाएगा जितना कि उसे होना चाहिए। यह देश के हित में ही होगा कि कांग्रेस तत्काल प्रभाव से अपनी नीतिगत संरचना को स्पष्टता प्रदान करे‚ अपने संगठन को पुनर्गठित करे और शीर्ष नेतृत्व की हर गलती पर अपनी जी हुजूरी को कायम रखने वाले नेताओं के प्रति सावधान रहे। इतना ही नहीं‚ बल्कि कांग्रेस अपने भीतर के सक्षम नेताओं की बात को ध्यान से सुने तो संभव है कि वह एक बार पुनः अपनी खोई हुई शक्ति प्राप्त कर सकती है‚ अन्यथा पार्टी को डू़बने से कोई नहीं बचा पाएगा।
राज्यसभा में पास हुआ वंदेमातरम बिल, राष्ट्रीय गीत का अपमान करना अब पड़ेगा भारी
राज्यसभा में वंदेमातरम बिल पास हो गया है. बता दें कि इस बिल को 24 जुलाई को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री...






