कन्हैया कुमार के भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को छोड़ कांग्रेस में शामिल होने पर लगा था कि भाकपा इस पर कुछ तीखी बयानबाजी करेगी. हालांकि, पार्टी की ओर से यही बयान आया कि किसी व्यक्ति से बड़ी पार्टी होती है. जाहिर है भाकपा नेताओं को न तो सदमा लगा दिख रहा है और न ही किसी प्रकार की कोई नाराजगी ही दिख रही है. लेकिन, बिहार की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी राष्ट्रीय जनता दल में सियासी विमर्श जरूर जारी है कि टीम राहुल गांधी का हिस्सा बन चुके आखिर कन्हैया कुमार को लेकर आरजेडी क्या रुख अपनाए. इसी बीच अंदरखाने की खबर यह है कि राजद ने अपने प्रवक्ताओं एवं सभी नेताओं से साफ कह दिया है कि कन्हैया कुमार के कांग्रेस में शामिल होने को लेकर कोई भी प्रतिक्रिया व्यक्त ना करे.
हालांकि, इससे पहले ही आरजेडी के वरिष्ठ नेता और विधायक भाई वीरेंद्र ने कन्हैया कुमार के कांग्रेस के में शामिल होने को लेकर कहा कि कौन है कन्हैया कुमार? मैं इन्हें नहीं जानता. इससे पहले RJD का बड़ा बयान आया. RJD विधायक डॉ मुकेश रौशन ने कहा था कि महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव हैं, और महागठबंधन की ताकत भी वही हैं. तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन ने अच्छा काम किया है और आगे भी अच्छा काम करेंगी. किसी के आने-जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता.
राजद के अंदरखाने की खबर समझें
जाहिर है कन्हैया कुमार के कांग्रेस की टीम राहुल गांधी में आने के साथ ही तेजस्वी को कन्हैया से ऊपर रखने-दिखाने की राजद की ओर से बयान आने लगे. हालांकि, जैसे ही कांग्रेस के अध्यक्ष मदन मोहन झा, विधायक दल के नेता अजीत शर्मा और एमएलसी प्रेमचंद्र मिश्र ने यह कहा कि कन्हैया कुमार के आने से पार्टी को फायदा होगा, लेकिन महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव हैं. इसके बाद से ही राजद की ओर से बयानबाजियों का सिलसिला थम गया. अंदरखाने की खबर यही है कि राजद ने अपने नेताओं-प्रवक्ताओं को यही निर्देश दिया है कि जब तक पार्टी की ओर से कोई निर्देश न मिले बयान न दिए जाएं.
कन्हैया के आने से राजद के नेता क्यों खुश नहीं?
अब सवाल यह है कि महागठबंधन में सहयोगी दल कांग्रेस में एक अच्छे वक्ता के तौर पर पहचान रखने वाले कन्हैया कुमार के शामिल होने से आरजेडी को खुश होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नजर नहीं आ रहा. सबसे खास बात यह है कि कन्हैया कुमार जीसीपीआई में से कांग्रेस में आए हैं वह भी बिहार में महागठबंधन का हिस्सा है. ऐसे में जानकारी यही सामने आ रही है कि कन्हैया कुमार के कांग्रेस में शामिल होने से राजद के नेता खुश नहीं हैं.
क्या तेजस्वी के सामने चुनौती बनेंगे कन्हैया कुमार?
कहा तो यह भी जाता है कि कन्हैया से आरजेडी वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से ही खुश नहीं है, जब सीपीआई ने उन्हें बेगूसराय से उम्मीदवार बना दिया था तब गठबंधन के बावजूद आरजेडी ने कन्हैया के सामने अपना उम्मीदवार खड़ा कर दिया था. यही वजह रही थी जो कन्हैया कुमार की हार का अंतर 4 लाख 71 हजार से अधिक की थी. सियासी जानकारों की नजर में राजद का यह रुख इसलिए भी है क्योंकि महागठबंधन में अब कांग्रेस को भी एक चेहरा मिल गया है जो चुनौती के मुकाबिल खड़ा हो सकता है.
इस मामले में तेजस्वी से कहीं पीछे हैं कन्हैया?
दरअसल, बिहार में फिलहाल महागठबंधन का चेहरा तेजस्वी यादव हैं, लेकिन कन्हैया कुमार के बोलने का तरीका और भाषण की शैली काफी अच्छी है. लोगों से वह अच्छा कनेक्ट करते हैं. कन्हैया कुमार ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जब बिहार में ‘जन गण मन’ यात्रा निकाली थी तो उन्हें बहुत सपोर्ट भी मिला था. खास तौर पर मुस्लिम वर्ग से उन्हें व्यापक जन समर्थन मिल रहा था. हालांकि राजनीति में जाति की बात आएगी तो उसके कन्हैया कुमार कितने स्वीकार्य होंगे यह भी देखने वाली बात होगी.
कब तक खामोश रहेंगे राजद के नेता?
सवाल यह भी है कि कांग्रेस क्या कन्हैया कुमार के बूते महागठबंधन से बाहर निकलने का साहस दिखा पाएगी, या फिर कन्हैया को भी यही निर्देश दिया जाएगा कि वह भी तेजस्वी को अपना नेता माने? . हालांकि, फिलहाल यह भी खबर सामने आ रही है कि राजद तब तक टिप्पणी नहीं करने जा रही जब तक कन्हैया कुमार की ओर से तेजस्वी यादव के सामने खड़े होने के कोई संकेत नहीं मिलते.






