कांग्रेस ने मंगलवार को अपने कार्यकर्ताओं को गांव–गांव में अलख जगाने का निर्देश दिया है। रिसर्च विभाग‚ बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा बिहार पंचायत चुनाव के मद्ेनजर तैयार किया गया १६ साल की यात्रा विकेन्द्रीकरण से तबाही तक नामक डॉक्यूमेंट का विमोचन कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा की अध्यक्षता में किया गया। इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. मदन मोहन झा ने कहा कि जिस उदेश्य के लिए पंचायती राज की कल्पना हमारे बापू महात्मा गांधी ने की थी और पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गांधी ने जिन्हे साकार करने का प्रयास किया था वह अब भी अधूरा है। ग्राम स्वराज एक कोरी कल्पना रह गई है। सत्ता के विकेन्द्रीकरण की जगह केन्द्रीकरण हो रहा है। पंचायत प्रतिनिधि अपने आप को ठगा सा महसूस करते हैं। रिसर्च विभाग द्वारा तैयार किया गया यह दस्तावेज पार्टी पूरे राज्य के गाँव गाँव में पहुंचाएगी। इस अवसर पर बोलते हुए राज्यसभा सदस्य डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि कांग्रेस का यह मानना है कि ‘जो निर्णय जिस वर्ग को प्रभावित करे‚ वह निर्णय उसी स्तर पर लिया जाना चाहिए’। लेकिन वास्तव में हो कुछ और रहा है। सारे निर्णय दिल्ली या पटना के स्तर पर होते हैं और उसे पंचायत प्रतिनिधियों पर थोप दिया जाता है। सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को सामाजिक समता से जोडकर उसमे महिला‚ दलित‚ आदिवासी आरक्षण से जोड कर देखा जाना चाहिये। दल के कार्यकर्ताओं से आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि आप सब दिल्ली नहीं गाँव की ओर जाएं और पंचायत चुनाव में हिस्सा ले। अपने स्वागत भाषां मे बोलते हुए आनन्द माधव‚ चेयरमैन‚ रिसर्च विभाग ने कहा कि इस ड़ॉक्यूमेंट में हमारा प्रयास यह दर्शाने के रहा है कि किस तरह से कि सोलह साल में वर्तमान सरकार ने विकेंद्रीकरण के नाम पर तबाही ही अंजाम दिया है। गांधी जी के स्वशासन की कल्पना सिर्फ कोरी कल्पना ही रह गई है। उनका मानना था की सुशासन कभी भी स्वशासन के बिना आ नहीं सकता है। यह सुशासन नहीं कुशासन है‚ जो हर चीज को लाभ की दृष्टि से देखती है। इसबार सभी चार महत्वपूर्ण पदों पर ईवीएम के माध्यम से मतदान होना है। यह उन अनुचित व्यवहारों की ओर संकेत करता है जो हो सकते हैं और व्यापक रूप से मतदाता की पसंद को प्रभावित करेंगे। बिहार विधान परिषद सदस्य प्रेमचंद मिश्र ने कहा कि पंचायत हमारी बुनियाद है‚ जो खोखली होती जा रही है। बिहार पंचायत राज अधिनियम‚ १९९३ को ७३वें संविधान संाोधन अधिनियम‚ १९९२ के आधार पर पारित किया गया था। इस अवसर पर पूर्व विधायक @षि मिश्रा‚ पूर्व विधान परिषद सदस्य लाल बाबू लाल‚ नागेन्द्र कुमार विकल‚ विचार विभाग के चेयरमैन प्रो शशि कुमार सिंह‚ राजीव गांधी पंचयती राज संगठन के चेयरमैन असफर अहमद‚ सोशल मीडिया विभाग के चेयरमैन सौरभ कुमार‚ वरीय नेत्री संयुक्ता सिंह‚ सुद्धा मिश्रा‚ जिला अध्यक्ष शशि रंजन आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये।
बिहार में दारोगा या ऊपर के अधिकारी ही वाहन रोक व चालान काट सकेंगे………
बिहार में वाहन जांच के दौरान किसी वाहन को रोकने, चालान काटने या अन्य कार्रवाई करने का अधिकार दारोगा या...







