5 अगस्त भारत की सम्प्रुभता एवं अक्षुण्णता के नजरिए से ऐतिहासिक दिन है। आज के दिन कश्मीर और धारा ३७० को एक नया परिपेक्ष्य मिला एवं जम्मू एवं कश्मीर–लद्ाख को केंद्रशासित प्रदेश के रूप में गठन किया गया। यह बड़ा फैसला दो मुख्य सन्देश देता है‚ पहला‚ देश की सुरक्षा और सम्प्रुभता सर्वोपरि है और दूसरा‚ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी पूरी राजनीतिक पूंजी दांव पर लगाकर एक बड़ा फैसला लिया जो देश के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। सत्तर वर्ष से चली आ रही यथास्थिति को बदलते हुए आगे बढ़ने का साहस एवं राजनीतिक संकल्प शायद प्रधानमंत्री मोदी के अलावा कोई दूसरा प्रधानमंत्री नहीं दिखा सकता है। दो कदम आगे बढ़कर विकास की आधारशिला पर पर नव निर्माण का जो संकल्प उन्होंने लिया है‚ निश्चित रूप से राष्ट्र निर्माण में यह प्रयास सकारात्मक सिद्ध होगा। कहना न होगा कि यह ऐतिहासिक कदम उठाने के लिए दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति की दरकार होती है‚ और निश्चित ही प्रधानमंत्री मोदी ने दिखाई है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कश्मीर समस्या की जटिलताओं को समझते हुए इसके समाधान के लिए नारा दिया था–‘कश्मीरियत‚ इंसानियत‚ जम्हूरियत’। कश्मीर की समस्या के प्रति उनका यह दृष्टिकोण व्यापक‚ व्यावहारिक एवं मानवतावादी है। उनकी यह नीति उनके व्यवहार कुशल राजनेता एवं संवेदनशील कवि ह्रदय की साझा उपज थी। अभी हाल ही में जम्मू कश्मीर पर १४ विभिन्न दलों की सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘दिल की दूरी’ और ‘दिल्ली की दूरी’ को हम खत्म करना चाहते हैं। साथ में प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू कश्मीर के युवाओं को राजनीतिक नेतृत्व देने एवं इन केंद्रशासित राज्यों में लोकतंत्र को और अधिक मजबूत करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। इस सर्वदलीय बैठक में सरकार की तरफ से यह भी आश्वासन दिया गया कि जैसे ही हालात सामान्य होंगे‚ वैसे ही जम्मू एवं कश्मीर का राज्य का दरजा वापस बहाल कर दिया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के वक्तव्य में आप सहज ही वाजपेयी द्वारा दिए गए नारे के सूत्र तलाश कर सकते हैं। ॥ इस ऐतिहासिक निर्णय के समय बहुत से राजनीतिक पंडितों एवं विपक्ष के नेताओं ने सरकार के इस कदम पर गंभीर प्रश्न खड़े किए थे। उन्होंने इसे ‘विध्वंसकारी कदम’ कहा था। उन्होंने यहां तक कहा था कि ‘आप सोच सकते हैं कि आपने जीत हासिल की है‚ लेकिन आप गलत हैं‚ और इतिहास आपको गलत साबित करेगा’। आज जब इस ऐतिहासिक निर्णय के दो साल हुए हैं‚ तो उन नेताओं की भविष्यवाणियां सिरे से गलत साबित हो रही हैं। घाटी के हालात लगातार सुधर रहे हैं‚ आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान आतंकवादी एवं हिंसक घटनाओं में साफ कमी देखने को मिली है। ॥ बीते दो सालों में केंद्र सरकार ने आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत काम किया है। कश्मीर में आतंकी घटनाएं खत्म होने का सीधा अर्थ है–पर्यटन और विकास‚ जिसकी दिशा में कश्मीर लगातार आगे बढ़ रहा है। राजनीतिक प्रक्रिया भी धीरे–धीरे बहाल हो रही है। इसे सुरक्षा बलों की कामयाबी के साथ–साथ कश्मीर की जनता में सरकार और व्यवस्था के प्रति विश्वास बहाली के तौर पर देखा जाना चाहिए। दोनों ही केंद्रशासित प्रदेशों में पर्यटन की भरपूर संभावना है। पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार इस दिशा में लगातार पहल कर रही है। कहना न होगा कि आतंकवाद के दौर में राज्य की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार पर्यटन पूरी तरह से धराशायी हो गया था। पर्यटक आखिर उस प्रदेश में जाएंगे ही क्यों जहां जान–माल की सुरक्षा की कोईगारंटी न हो। कहना यह भी कि एक समय था जब बॉलीवुड़ की अनेक फिल्मों की यहां शूटिंग होती। हर दूसरा फिल्म निर्माता यहां अपनी फिल्म शूट करना चाहता था। लेकिन आतंकवाद ने कश्मीर में फिल्म की शूटिंग को तो बीते समय की बात बना दिया था।
अनुच्छेद ३७० की समाप्ति और नए केंद्रशासित प्रदेशों के निर्माण का एक महत्वपूर्ण पक्ष लद्ाख के विकास से भी जुड़ा हुआ है। लद्ाख का नियंत्रण केंद्र के हाथों में आने से वहां इंास्ट्रक्चर का चौतरफा विकास हो रहा है। नयी सड़कें‚ टनल‚ एयरपोर्ट‚ हेलीपैड‚ खेल के स्टेडियम आदि के निर्माण के साथ वहां पर्यटन को सुलभ बनाया जा रहा है। लद्ाख के छात्र–छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए बहुत दूर जाना पड़ता था अब केंद्र सरकार ने वहाँ सेन्ट्रल यूनिवÌसटी बनाने के लिए ७५० करोड़ रुûपये के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। पिछले वर्ष हुए लद्ाख के ‘स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद’ के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को बहुमत मिलना इस बात की पुष्टि करता है कि लद्ाख की जनता ने इस परिवर्तन पर अपनी मुहर लगा दी है। पंचायत चुनाव प्रक्रिया का सफल आयोजन निश्चित रूप से लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करेगा। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से दूरदराज के लोगों तक आर्थिक मदद को सीधे पहुंचाया जा रहा है। भारत सरकार की सभी योजनाओं को बिना किसी संकोच के स्थानीय स्तर पर लागू किया जा रहा है। प्रशासनिक रिफॉर्म को लागू करना अब कहीं ज्यादा तीव्र और आसान हो गया है। युवाओं को स्किल और वोकेशनल ट्रेनिंग के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण की ओर ले जाने के लिए भी विस्तृत परियोजनाएं लागू की गई हैं। सबका साथ सबका विकास एवं सबका विश्वास के मूलमंत्र के साथ जम्मू कश्मीर एवं लद्ाख के नागरिक विकास एवं खुशहाली की नये अध्याय की शुरु आत करेंगे। युवाओं का भविष्य अब विश्वविद्यालयों‚ प्रयोगशालाओं एवं खेल के मैदानों में तय होगा। नये भारत के निर्माण में नया कश्मीर नई भूमिका निभाएगा ऐसा मेरा दृढ़ विश्वास है।







