विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि लोकतंत्र में जनता अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से शासन करती है। हम वास्तव में आम जनता के प्रतिनिधि हैं। हमारा दायित्व है कि हम हमेशा इस राज्य की महान जनता के हित में कार्य करें। श्री सिन्हा विधान सभा भवन शताब्दी वर्ष शुभारंभ मौके पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि स्वाभाविक है जब जनता हमें इस महान काम के लिए चुनती है तो हमसे उनकी अपेक्षाएं भी बडी होतीं हैं। हमारा लोकतंत्र संविधान एवं कानून के माध्यम से चलता है‚ जिसमें विधायिका‚ कार्यपालिका एवं न्यायपालिका तीनों की भूमिका अहम होती है। विधायिका के सदस्य जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुन के आते हैं और यदि जनता हमें चुनती है तो माना जाता है कि हम लोग ऐसा काम करेंगे जो देश और समाज के हित में होगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विधायकों की भूमिका अहम है। जिस भावना से इस सदन की शुरूआत की गयी है या जनता के प्रतिनिधि की हैसियत से हम यहां पर इस सदन में जिनका विश्वास लेकर आते हैं‚ हम सब मिलकर इस विधान मंडल का माहौल ऐसा बनाएं कि जनता का विश्वास इस सदन में और गहरा हो सके। लोकतंत्र में विधायकों की सकारात्मक भूमिका यह सुनिश्चित करती है कि समाज में अच्छे प्रशासन के मानदंड को बहाल रखते हुए समाज के सभी वगां में धर्मिक सहिष्णुता‚ सहयोग एवं विश्वसनीयता को प्रोत्साहित किया जा सके। सभी विधायक जनता के साथ सीधे तौर पर जुडे होते हैं‚ जनता की दिक्कत/तकलीफ को अन्य सबों से वह बेहतर समझ सकत हैं। विधायकों द्वारा सदन में उठाए गए प्रश्नों का बहुत महत्व है। विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य–संचालन नियमावली में ऐसे कई प्रावधान अंकित हैं‚ जिनके माध्यम से हम आमजन की समस्या को सदन में उठा सकते हैं‚ उस पर विमर्श कर सकते हैं और सरकार से उसके सकारात्मक हल की मांग कर सकते हैं सभा की कार्रवाई को सुचारू रूप से चलाने हेतु विपक्ष का सहयोग अति आवश्यक है‚ विपक्ष के द्वारा सरकार की नीतियों का गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन तथा समिति के माध्यम से प्रभावी नियंत्रण रखा जा सकता है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि हम लागोेें को यह सुनिश्चित करना है कि सदन में सदस्यों की उपस्थिति अच्छी हो और ज्यादा–से–ज्यादा विमर्श हो सके । सभा की कार्रवाई में किसी प्रकार विध्न न आए । सदन में वित्तीय मामलों के निष्पादन के मायम से विधायकगण यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि जनता का पैसा सही स्थान पर उपयोग हो रहा है या नहीं । विधयिका में विधायी शक्तियाँ निहित होती हैं । विधि का निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है जिसके बारे में हम सभी विधायकों को विस्तार से जानकारी होनी चाहिए क्योंकि हम लोग जनप्रतिनिधि हैं और हम सभी हमारे द्वारा दिये जाने वाले मतों के असर के बारे में जानने में सक्षम होने चाहिए। साथ ही संविधान प्रदत्त विशेषाधिकार के संदर्भ में भी हमारी समझ स्पष्ट होनी चाहिए। किन बातों से हमारे विशेषाधिकार का हनन होता है उनकी वैधानिक जानकारी भी हमें होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज ही से इस विशिष्ट दिन के शताब्दी वर्ष का शुभारंभ हो रहा है।
पूरे वर्ष के दौरान इस संदर्भ में कई कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे । इसके अलावा पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन का यह शताब्दी वर्ष भी है और इस शताब्दी वर्ष में पूरे वर्ष के दौरान लोकतंत्र का उत्सव मनाने के लिए लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला जी का एक पत्र भी आया हुआ है जिसमें विगत पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में यह संकल्प लिया गया था कि पूरे देश में लोकतंत्र का उत्सव मनाया जाये । इसकी एक विस्तृत कार्य योजना बनाई जा रही है । इन कार्यक्रमों में अन्य विषयों के अलावा समाज में व्याप्त नैतिक मूल्यों को रोकने के लिए पूरे समाज में जनजागरूकता अभ्यिान चलाये जाने की आवश्यकता है । इस संबंध में हम ने एक विशिष्ट योजना भी बनायी है जिसमें राज्य सरकार को कोई अनुदान नहीं देना है बल्कि यह आम लोगों में खासकर युवा वर्ग में नैतिक मूल्यों को मोटिवेट प्रेरित करने का कार्य करेगा । हमें जनता ने बडे विश्वास से चुनकर भेजा है‚ इस लोकतंत्र के पावनमंदिर में । हमें अपने अनुशासन‚ आचरण और सेवा समर्पण से उनके जीवन को सरल‚ कल्याणकारी और सुविधायुक्त बनाने के लिए ईमानदारी से सतत प्रयास करना होगा । हमारे प्रयास के प्रभाव से समाज में सकारात्मक माहौल बने‚ युवाओं को विकसित करने में हम भागीदार बने । हम अपनी विरासत को संरक्षित और सुरक्षित कर अगली पीढी तक उसे पहुॅंचायें । हमें स्वामी विवेकानंद के कथन को सत्य बनाना है कि २१वीं सदी भारत का होगा और भारत विश्व गुरू बनेगा।







