जीरादेई विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र बिहार के 243 विधानसभा सीटों में से एक है। यह विधानसभा सीट एक सामान्य श्रेणी की विधानसभा सीट है। यह विधानसभा सीट सिवान जिले में स्थित है और सिवान संसदीय सीट के 6 विधानसभा सीटों में से एक है। इस बार चुनावी मैदान में प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज भी है। जनसुराज ने ऐलान किया है कि वह बिहार की 243 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली है। ऐसे में बिहार विधानसभा चुनाव इस बार ज्यादा ही दिलचस्प होने वाला है। ऐसे में चलिए आपको इस सीट के बारे में जानकारी देते हैं।
जातीय समीकरण और मतदाता
साल 2020 में हुए विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जीरादेई विधानसभा सीट पर अगर कुल मतदाताओं की बात करें तो उनकी संख्या 277386 है। इस सीट पर मुस्लिम आबादी ज्यादा है। ऐसे में मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा अगर अन्य जातियों और उपनामों के आधार पर वोटरों की बात करें तो मुस्लिम वोटरों की संख्या 34395 है, यानी 12.4 फीसदी। इसके अलावा सिंह वोटरों की संख्या 34118 है, जोकि 12.3 फीसदी हैं। वहीं शाह, प्रसाद, चौधरी वोटरों की संख्या भी अच्छी खासी है।
पिछले चुनावों में क्या-क्या हुआ?
इस सीट पर साल 2020 में हुए विधानसभा चुनाव की अगर बात करें तो इस सीट से सीपीआईएमएल के उम्मीदवार अमरजीत कुशवाहा ने जीत दर्ज की थी। उन्हें 69442 वोट मिले थे। वहीं दूसरे स्थान पर थे जदयू के उम्मीदवार कमला सिंह, जिन्हें 43932 वोट्स मिले थे। वहीं साल 2015 के विधानसभा चुनाव की अगर बात करें तो इस सीट से जदयू के उम्मीदवार रमेश सिंह कुशवाहा ने जीत दर्ज की थी, जिन्हें 40760 वोट्स मिले थे। वहीं भाजपा की आशा देवी दूसरे स्थान पर थीं, जिन्हें 34669 वोट्स मिले थे। इसके अलावा तीसरे स्थान पर थे सीपीआईएमएलए के अमरजीत कुशवाहा, जिन्हें 34562 वोट्स मिले थे।
जीरादेई विधानसभा चुनाव 2025 बिहार के सिवान जिले की एक महत्वपूर्ण सीट है, जहां आगामी चुनाव अक्टूबर-नवंबर 2025 में होने की संभावना है। फिलहाल इस सीट पर सीपीआई(एमएल) के अमरजीत कुशवाहा विधायक हैं, जिन्होंने 2020 के चुनाव में जदयू के कमला सिंह को 25,510 वोटों के बड़े अंतर से हराया था।
मुख्य बातें:
-
वर्तमान विधायक: अमरजीत कुशवाहा (सीपीआई(एमएल))
-
2020 के परिणाम:
-
अमरजीत कुशवाहा (सीपीआईएमएल): 69,442 वोट
-
कमला सिंह (जदयू): 43,932 वोट
-
जीत का अंतर: 25,510 वोट
-
-
जातीय समीकरण:
-
कुशवाहा, यादव, मुस्लिम, राजपूत, दलित यहां बड़ी संख्या में हैं
-
मुस्लिम वोटर निर्णायक भूमिका में, साथ ही यादव और कुशवाहा वोटर महागठबंधन की तरफ झुके रहे हैं
-
भाजपा को परंपरागत रूप से ब्राह्मण, राजपूत, वैश्य मतदाताओं का समर्थन मिलता रहा है
-
2025 के समीकरण:
-
राजनीतिक मुकाबला: सीपीआई(एमएल) के साथ भाजपा, राजद, जदयू, कांग्रेस और इस बार जनसुराज के उतरण से चुनाव त्रिकोणीय या बहुकोणीय हो सकता है।
-
मतदाता: करीब 3.2 लाख मतदाता (2025 में 3,19,478 पंजीकृत), जिसमें मुस्लिम मतदाता लगभग 34,395 (12.4%), सिंह 34,118 (12.3%) हैं।
-
स्थिति: पिछले चुनावों में कोई भी पार्टी लगातार दो बार नहीं जीत सकी है; जनता अक्सर बदलाव करती रही है।
संभावनाएँ:
-
सीपीआई(एमएल) मौजूदा विधायक अमरजीत कुशवाहा को फिर से उतार सकती है।
-
भाजपा और राजद सहित एनडीए-यूपीए गठबंधन सीट वापसी के लिए जोरदार तैयारी में हैं।
-
महागठबंधन में सीट बंटवारा, विपक्षी वोटों के बंटवारे या एकजुटता पर चुनाव का परिणाम निर्भर करेगा।
-
जनसुराज जैसे नए विकल्प से समीकरण और रोचक हो सकते हैं।
सम्बन्धित मुद्दे:
-
क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, बेरोजगारी, स्वास्थ्य और मुआवजा जैसी बुनियादी परेशानियां चुनावी चर्चाओं में हैं।
अभी तक प्रत्याशियों की फाइनल सूची सामने नहीं आई है, लेकिन जैसे-जैसे चुनाव पास आते जाएंगे, मुकाबला और दिलचस्प होता जाएगा।
2025 के चुनावी मुकाबले में मुख्य मुद्दे रोज़गार (नौकरियाँ), पलायन, सामाजिक न्याय और आरक्षण, जाति जनगणना, युवाओं की अपेक्षाएँ, महिला सशक्तिकरण, और विकास होने की संभावना है।
-
रोज़गार: सभी दल—विशेषकर आरजेडी, कांग्रेस और लोकल वाम दल—सरकारी और निजी क्षेत्रों में रोजगार, बेरोजगारी भत्ता और स्थानीय स्तर पर नियोजन को सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना रहे हैं। युवा वोटरों को आकर्षित करने के लिए तेजस्वी यादव जैसे नेता स्थायी रोजगार के दावे कर रहे हैं और इसे अपने प्रचार अभियान की केंद्रीय धुरी बना चुके हैं।
-
सामाजिक न्याय और आरक्षण: बीजेपी और उसके सहयोगी दल सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण—खासकर हाल ही में हुई जाति जनगणना का श्रेय लेने—को केंद्रीय मुद्दा बना रहे हैं। आरजेडी भी 85% तक आरक्षण की मांग के साथ इस वर्ग के मतदाताओं को साधने की रणनीति पर है।
-
जाति जनगणना: एनडीए और महागठबंधन दोनों समाज के जातीय समीकरण को संतुलित करने के लिए जाति जनगणना का मुद्दा उठाते रहे हैं और इसका श्रेय लेने में प्रतिस्पर्धा दिखा रहे हैं।
-
महिला सशक्तिकरण: एनडीए और विपक्ष दोनों महिलाओं की आर्थिक-शैक्षिक स्थिति सुधारने के लिए योजनाओं की घोषणा कर चुके हैं।
-
विकास और आधारभूत ढांचा (सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा): विकास की राजनीति और लोकल वादे (जैसे बिजली, सड़क, शिक्षा) पर भी चुनावी विमर्श केंद्रित रहेगा।
कुछ पारंपरिक मुद्दे, जैसे बिहार को विशेष राज्य का दर्जा, पिछली बारों की तुलना में 2025 के चुनाव में प्रमुखता से गायब हैं। इस बार सत्तापक्ष और विपक्ष—दोनों ही इससे दूरी बना रहे हैं, खासकर नीतीश कुमार के एनडीए में वापस जाने के बाद।
तो, 2025 के विधानसभा चुनाव में युवा, रोजगार, सामाजिक न्याय, आरक्षण, जाति आधारित समीकरण, और स्थानीय विकास के इर्द-गिर्द मुकाबला केंद्रित रहेगा, जबकि कुछ पुराने मुद्दे हाशिए पर जा सकते हैं।






